गुरु पूर्णिमा पर एमपी में बड़ा ऐलान, सीएम मोहन यादव बोले- तय समय पर शुरू हों सभी सांदीपनि विद्यालय
Guru Purnima 2026 MP : इस बार मध्य प्रदेश में गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने वाली। राज्य सरकार इसे भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और शिक्षा से जोड़कर बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में जिन सांदीपनि विद्यालयों का उद्घाटन अभी बाकी है, उन्हें गुरु पूर्णिमा से पहले हर हाल में पूरा किया जाए।
सरकार का मानना है कि गुरु पूर्णिमा केवल श्रद्धा का पर्व नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय शिक्षा व्यवस्था, संस्कार और गुरु के महत्व से जोड़ने का सबसे अच्छा अवसर है। इसी सोच के साथ इस वर्ष पूरे प्रदेश में "महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व" आयोजित किया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा पर पूरे प्रदेश में होंगे विशेष कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में गुरु पूजन और गुरु सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन आयोजनों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, विभिन्न प्रतियोगिताएं और सम्मान समारोह भी होंगे।
राज्य सरकार चाहती है कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से भी जोड़ा जाए। इसी वजह से विभिन्न शिक्षा विभागों के साथ निजी शिक्षण संस्थानों और कला-संस्कृति से जुड़े संगठनों की भी भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सांदीपनि विद्यालयों पर रहेगा खास फोकस
बैठक में सबसे बड़ा फैसला उन सांदीपनि विद्यालयों को लेकर लिया गया, जिनका लोकार्पण अभी बाकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी लंबित कार्य समय पर पूरे किए जाएं ताकि गुरु पूर्णिमा से पहले इन विद्यालयों का शुभारंभ हो सके। सांदीपनि विद्यालयों की अवधारणा भारतीय शिक्षा परंपरा से प्रेरित मानी जाती है। सरकार का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाना है।
महर्षि सांदीपनि पर तैयार होगी विशेष पुस्तिका
सरकार ने विद्यार्थियों को भारतीय शिक्षा परंपरा से परिचित कराने के लिए एक और महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि के जीवन, उनके योगदान और गुरुकुल शिक्षा पद्धति पर आधारित 10 से 20 पृष्ठों की एक सरल और उपयोगी पुस्तिका तैयार की जाए। यह पुस्तिका प्रदेश के सभी विद्यालयों में वितरित की जाएगी ताकि छात्र आसानी से समझ सकें कि प्राचीन भारत की शिक्षा व्यवस्था कैसी थी और गुरु-शिष्य संबंध का वास्तविक महत्व क्या था।
श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से सीखेंगे विद्यार्थी
सरकार ने केवल गुरु पूर्णिमा तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रखे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों में मनाए जाने वाले मित्रता दिवस पर विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की प्रेरक कथा भी सुनाई जाए।
इसका उद्देश्य बच्चों को सच्ची दोस्ती, समानता, विनम्रता और जीवन मूल्यों की सीख देना है। शिक्षा विशेषज्ञ भी लंबे समय से मानते रहे हैं कि ऐसी कहानियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास में सकारात्मक भूमिका निभाती हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पहल
राज्य सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की उस सोच से भी मेल खाती है, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में छात्र-शिक्षक संवाद, सांस्कृतिक गतिविधियां, निबंध, भाषण और अन्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
