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उज्जैन में सावन के दूसरे सोमवार पर उमड़ा आस्था का सैलाब, तड़के 2:30 बजे खुले महाकाल मंदिर के पट

Mahakal Sawari 2026

Mahakal Sawari 2026 : उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार, 10 अगस्त 2026 को सावन के दूसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। बाबा महाकाल की भस्मारती और दर्शन के लिए देशभर से पहुंचे भक्त बीती रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बैठे रहे। सोमवार को श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने पट खोलने का समय पहले ही तड़के 2:30 बजे कर दिया, जबकि आम दिनों में मंदिर सुबह 3 बजे खुलता है। पट खुलते ही मंदिर परिसर "जय महाकाल" के उद्घोष से गूंज उठा और तड़के करीब 3 बजे भस्मारती शुरू हुई।

भस्मारती से पहले हुआ विशेष पूजन-अभिषेक

भस्मारती शुरू होने से पहले पुजारियों ने विधि-विधान से बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके तुरंत बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से महापंचामृत अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक पूरा होने पर बाबा महाकाल का भांग और चंदन से आकर्षक श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद भगवान को वस्त्र धारण कराए गए और अंत में परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई, जो इस मंदिर की सबसे विशिष्ट और प्राचीन परंपराओं में गिनी जाती है।

शंख और डमरू की गूंज के बीच संपन्न हुई आरती

भस्म अर्पण के बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के बीच बाबा महाकाल की भस्मारती संपन्न हुई। इस पूरे दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर जयकारे लगाए। सावन का सोमवार होने के कारण न सिर्फ महाकालेश्वर मंदिर, बल्कि उज्जैन के अन्य शिव मंदिरों में भी सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मंदिर समिति ने भीड़ प्रबंधन के लिए दर्शन व्यवस्था, पार्किंग और कांवड़ यात्रियों के लिए भी अलग से इंतजाम किए हैं।

खास होता है सावन का महीना

हिंदू पंचांग के अनुसार 30 जुलाई 2026 से शुरू हुआ श्रावण मास 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। यह महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है, यही वजह है कि हर सोमवार महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है। कई भक्त घंटों इंतजार के बाद भस्मारती और बाबा के दर्शन कर पाए, बावजूद इसके श्रद्धा और उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई।

शाम को निकलेगी बाबा महाकाल की दूसरी सवारी

श्रावण-भादौ मास में हर सोमवार बाबा महाकाल की सवारी निकालने की सदियों पुरानी परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि राजाधिराज महाकाल स्वयं अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। आज निकलने वाली यह वर्ष 2026 की दूसरी सवारी है, जिसकी थीम इस बार लोकनृत्य पर आधारित रखी गई है। मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार सवारी में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिससे यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता की झलक भी पेश करेगा।

सवारी मार्ग पर उमड़ेगा भक्तों का जनसैलाब

बाबा महाकाल की सवारी को देखने के लिए श्रद्धालु घंटों पहले से मार्ग के किनारे डेरा जमा लेते हैं। सवारी के दौरान पूरा उज्जैन शहर "जय महाकाल" के जयकारों से गूंज उठता है और भक्त पालकी पर पुष्पवर्षा करते हुए अपने आराध्य का स्वागत करते हैं। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस वर्ष की सभी सवारियों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

जानिए 2026 की सभी सवारियों का पूरा कार्यक्रम

इस वर्ष श्रावण-भादौ मास में बाबा महाकाल की कुल छह सवारियां निकाली जाएंगी। पहली सवारी 3 अगस्त को वैदिक उद्बोधन की थीम पर निकल चुकी है, आज 10 अगस्त को दूसरी सवारी लोकनृत्य पर आधारित रहेगी, जबकि 17 अगस्त को तीसरी सवारी में पुलिस, सेना, होमगार्ड, स्कूली और निजी बैंड अपनी प्रस्तुति देंगे। 24 अगस्त को चौथी सवारी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगी, 31 अगस्त को पांचवीं सवारी में 84 महादेव की झांकी निकाली जाएगी और 7 सितंबर को अंतिम राजसी (शाही) सवारी में सिंहस्थ महापर्व 2028 की झलक दिखाई जाएगी।