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सागर में ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का बड़ा खुलासा, 2.69 करोड़ कैश और 30 लाख का सोना बरामद 6 गिरफ्तार

Sagar News

Sagar News : मध्य प्रदेश के सागर में पुलिस ने ऑनलाइन बेटिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में फर्जी फर्मों और दूसरे लोगों के दस्तावेजों से खोले गए बैंक खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी और संदिग्ध रकम के लेन-देन के लिए किया जा रहा था।

मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 2 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई में भोपाल से पकड़े गए दो मुख्य आरोपियों के कब्जे से 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद और करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना बरामद होने की बात सामने आई है।

सागर पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने 20 अगस्त 2026 को मीडिया के सामने मामले की जानकारी दी। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, फर्जी फर्मों और लेन-देन की कड़ियां खंगाल रही है।

मामले की शुरुआत 13 अगस्त 2026 को मकरोनिया थाने में मिली शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता रोहित पटेल ने पुलिस को बताया कि उसके दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर उसके नाम पर एक फर्म बनाई गई और बैंक में करंट अकाउंट खोल दिया गया।

पुलिस ने जब खाते की जांच की तो ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नाम की फर्म सामने आई। पुलिस के मुताबिक फरवरी 2026 से करीब छह महीने के दौरान इस खाते में लगभग 90 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था।

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यह रकम देखकर पुलिस को शक हुआ कि मामला सिर्फ एक फर्जी फर्म तक सीमित नहीं है। इसके बाद बैंक रिकॉर्ड, खातों के ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की गई।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर नरेंद्र सोलंकी के पर्यवेक्षण में और मकरोनिया थाना प्रभारी निरीक्षक नितिन पाल के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। जांच आगे बढ़ी तो नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं।

पुलिस की जांच के अनुसार गिरोह कथित तौर पर ऐसे लोगों की तलाश करता था, जिन्हें पैसे या कमीशन का लालच देकर उनके दस्तावेज लिए जा सकें। इन दस्तावेजों के आधार पर कथित तौर पर फर्म तैयार की जाती थी और उनके नाम से बैंक में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। इसके बाद इन खातों को नेटवर्क के लोग अपने इस्तेमाल में लेते थे।

ऐसे खातों को आम तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। इन खातों का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या नेटवर्क की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक लंबे समय से बैंकों को म्यूल खातों की पहचान और संदिग्ध लेन-देन की निगरानी के लिए निर्देश देता रहा है। RBI के अनुसार ऐसे खाते साइबर अपराध से हासिल रकम को आगे भेजने या छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

सागर पुलिस के तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण में अब तक 30 से ज्यादा संदिग्ध फर्मों का पता चलने की जानकारी दी गई है। जांच में सामने आई प्रमुख फर्मों में ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर, कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार इंटरप्राइजेस, राजपूत इंटरप्राइजेस, अनुभव ट्रेडर्स, सागर ट्रेडर्स और शर्मा जी इंटरप्राइजेस सहित अन्य नाम शामिल हैं। पुलिस के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण के मुताबिक इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों में 5.50 करोड़ रुपये से ज्यादा का ट्रांजेक्शन सामने आया है।

हालांकि यह आंकड़ा जांच के मौजूदा चरण का है। पुलिस सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण कर रही है। इसलिए जांच पूरी होने के बाद रकम और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तस्वीर में बदलाव संभव है।

पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि धर्मेंद्र नाहर ने ऑनलाइन बेटिंग और बैंक खातों से जुड़े इस काम के बारे में अमित विश्वकर्मा से जानकारी हासिल की थी।इसके बाद धर्मेंद्र ने सागर के स्थानीय साथियों के साथ मिलकर फर्जी फर्में तैयार करने और बैंक खाते खुलवाने का काम शुरू किया।

पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में सोनू दांगी, सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी और स्वर्णेंद्र पांडे के नाम भी सामने आए हैं। वहीं ऑनलाइन बेटिंग के संचालन से जुड़े मामले में पुलिस ने रिषभ पटेल को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद होने की बात पुलिस ने बताई है।

पुलिस के अनुसार पूछताछ में ऑनलाइन बेटिंग के संचालन के लिए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। पुलिस का दावा है कि ग्राहकों के ग्रुप बनाए जाते थे और वहां बेटिंग पैनल की लिंक तथा क्रेडिट कॉइन उपलब्ध कराए जाते थे। जांच में कुछ ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों के नाम भी सामने आए हैं। इन प्लेटफॉर्म से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संचालन की भूमिका की पुलिस जांच कर रही है।

यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है। किसी वेबसाइट या प्लेटफॉर्म का नाम पुलिस जांच में सामने आना अपने आप में उस वेबसाइट या उसके संचालकों के खिलाफ अपराध साबित नहीं करता। अंतिम जिम्मेदारी और भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगा।

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बरामदगी नकदी की है। पुलिस के अनुसार रिषभ पटेल के कब्जे से 2,69,42,700 रुपये नकद मिले हैं। इसके अलावा करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना, नोट गिनने की मशीन, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।

इतनी बड़ी नकदी मिलने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा किन खातों से आया, किन लोगों तक पहुंचा और इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता था।पुलिस ने मामले में धर्मेंद्र नाहर, सोनू दांगी, अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी, स्वर्णेंद्र पांडे और रिषभ पटेल को गिरफ्तार किया है।

वहीं सरमन उर्फ शुभम रैकवार और ऋषि केशव सिंह को पुलिस फरार बता रही है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें तलाश कर रही हैं। पुलिस ने अमित विश्वकर्मा और रिषभ पटेल को न्यायालय से 8 दिन की पुलिस रिमांड पर लिए जाने की जानकारी दी है। पूछताछ में बैंक खातों, फर्जी फर्मों, ऑनलाइन बेटिंग और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।