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मध्य प्रदेश के 4.5 लाख कर्मचारियों के लिए पदोन्नति का रास्ता साफ, जानिए क्या है नई गाइडलाइन


मध्यप्रदेश सरकार ने लंबे समय से रुकी शासकीय कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में पहली समीक्षा बैठक आयोजित की है और सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों की कैडरवार और एकमुश्त वरिष्ठता सूची एक सप्ताह के भीतर तैयार करें। यह पूरी प्रक्रिया मप्र लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत पूरी की जाएगी। यदि यह प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो राज्य के लगभग 4.50 लाख शासकीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सकता है। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है।

2016 से रुकी थी पदोन्नति, अब फिर शुरू हुई प्रक्रिया

मध्यप्रदेश में वर्ष 2016 के बाद से नियमित पदोन्नतियां लगभग ठप पड़ी थीं। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी बिना पदोन्नति पाए ही सेवानिवृत्त हो गए। जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। इसके बाद नए नियम तैयार किए गए, लेकिन विभिन्न कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति नहीं बन सकी और मामला न्यायालय तक पहुंच गया। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभागों को पदोन्नति संबंधी प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारी तेज कर दी है।

कैसे होगी पदोन्नति की प्रक्रिया?

नए नियमों के अनुसार सबसे पहले रिक्त पदों का आरक्षण श्रेणियों के आधार पर वर्गीकरण किया जाएगा। निर्धारित व्यवस्था के तहत 16 प्रतिशत पद अनुसूचित जाति (SC) और 20 प्रतिशत पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए निर्धारित किए जाएंगे। इसके बाद बचने वाले पदों पर सभी पात्र कर्मचारियों को अवसर मिलेगा, जिसमें एससी और एसटी वर्ग के कर्मचारी भी शामिल रहेंगे। पदोन्नति में गोपनीय प्रतिवेदन (Annual Confidential Report) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जिन कर्मचारियों की रिपोर्ट संतोषजनक होगी, उनके लिए प्रक्रिया आसान रहेगी। यदि गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं है और इसमें कर्मचारी की गलती नहीं बल्कि विभागीय कारण जिम्मेदार हैं, तो केवल इसी आधार पर कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाएगा।

नए नियमों में क्या-क्या बदलाव हुए?

मप्र लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब अधिकारियों के लिए Merit-cum-Seniority और निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए Seniority-cum-Merit का सिद्धांत लागू होगा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मामले में पात्रता को ही पर्याप्त माना जाएगा। पहले जिन कर्मचारियों को आधे वर्ष की सेवा पूरी होने के कारण अपात्र माना जाता था, अब यदि किसी कर्मचारी ने संबंधित वर्ष में कम से कम आधा वर्ष सेवा कर ली है तो उसे पूरा वर्ष पूरा करने के बराबर माना जाएगा। इसके अलावा केवल कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) के आधार पर पदोन्नति नहीं रोकी जाएगी। यदि कोई अधिकारी प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर है तो उसके लौटने का इंतजार किए बिना पात्र अन्य कर्मचारी को पदोन्नति दी जा सकेगी। एक और अहम बदलाव यह है कि गोपनीय प्रतिवेदन की कमी, यदि विभागीय स्तर की वजह से है, तो पदोन्नति में बाधा नहीं बनेगी।

करीब 2 लाख सरकारी नौकरियों का रास्ता भी खुल सकता है

सरकार की इस पहल का असर केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि बड़ी संख्या में कर्मचारियों को पदोन्नति मिलती है तो उनके वर्तमान पद रिक्त होंगे। अनुमान है कि लगभग 2 लाख पद खाली हो सकते हैं, जिन पर आगे चलकर नई सरकारी भर्तियों का रास्ता खुल सकता है। यानी जिन कर्मचारियों को पदोन्नति मिलेगी, उन्हें तो लाभ होगा ही, साथ ही सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी नए अवसर बनने की संभावना है। हालांकि इन पदों पर भर्ती का अंतिम निर्णय सरकार की आगामी भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक आवश्यकता पर निर्भर करेगा।