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Petrol Diesel Rate 21 May : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की हलचल के बीच जारी हुए नए रेट, जानें आपके शहर में आज क्या है भाव


  • सरकारी तेल कंपनियों ने आज के लिए पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए हैं।
  • दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों में आज ईंधन की कीमतें पूरी तरह स्थिर हैं।
  • नोएडा, भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम में आज तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • जयपुर, चेन्नई, पटना और लखनऊ के उपभोक्ताओं को आज आंशिक कटौती के साथ राहत मिली है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड रिकवरी के साथ एक बार फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गया है।
Petrol Diesel Rate 21 May : आज यानी 21 मई 2026 को घरेलू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने देश भर के लिए पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दामों में उतार-चढ़ाव के बीच आज भारतीय उपभोक्ताओं के लिए मिलाजुला दिन रहा। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे देश के महानगरों में ईंधन के दाम पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के नोएडा और ओडिशा के भुवनेश्वर जैसे शहरों में तेल थोड़ा महंगा हो गया है। इसके विपरीत राजस्थान के जयपुर, बिहार के पटना और तमिलनाडु के चेन्नई में आम जनता को बढ़ती महंगाई से हल्की राहत मिली है, जहाँ आज तेल के भाव में गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक बाजार में पिछले कुछ समय से कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इस समय ब्रेंट क्रूड एक बार फिर रिकवरी करते हुए 105 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) भी 99 डॉलर के आसपास बना हुआ है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद बाजार में यह हलचल बढ़ी है जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत अंतिम चरण में होने का दावा किया है। इससे आने वाले समय में दुनिया भर में तेल की सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है। देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के कुछ इलाकों में आज सुबह ग्राहकों के लिए कोई नया सरप्राइज नहीं मिला। दिल्ली में तेल कंपनियों ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली के लोग आज भी 98.64 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से पेट्रोल और 91.58 रुपये प्रति लीटर पर डीजल खरीद रहे हैं। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पेट्रोल 109.70 रुपये पर स्थिर है, जबकि कर्नाटक के बेंगलुरु में यह 107.16 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। हरियाणा के गुरुग्राम में भी आज पुरानी कीमतें ही लागू हैं और पेट्रोल 99.38 रुपये पर बना हुआ है। राहत की बात करें तो देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दाम में मामूली 4 पैसे की कमी आई है, जबकि वहाँ डीजल 94.08 रुपये पर टिका है। सबसे ज्यादा फायदा चेन्नई के वाहन चालकों को मिला है, जहाँ पेट्रोल 35 पैसे टूटकर 104.57 रुपये पर आ गया है और डीजल भी 33 पैसे सस्ता हुआ है। राजस्थान के जयपुर में पेट्रोल 30 पैसे की गिरावट के साथ 108.70 रुपये प्रति लीटर पर आ गया है। इसके अलावा पटना, लखनऊ, चंडीगढ़ और हैदराबाद के लोगों को भी आज आंशिक गिरावट का सीधा फायदा मिला है। एक तरफ जहाँ कई शहरों में कीमतें घटी हैं, वहीं दिल्ली से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इलाके में आज सुबह तेल महंगा हो गया। नोएडा में पेट्रोल 19 पैसे की तेजी के साथ 98.65 रुपये और डीजल भी 19 पैसे बढ़कर 91.93 रुपये प्रति लीटर पर पहुँच गया है। भुवनेश्वर में पेट्रोल की कीमत 21 पैसे चढ़कर 105.33 रुपये हो गई है। दक्षिण भारत के केरल की बात करें तो तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल ₹111.71 प्रति लीटर बिक रहा है जो 18 पैसे ज़्यादा है जबकि डीज़ल ₹100.59 प्रति लीटर पर मिल रहा है, जिसमें 29 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। भारत के अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन की कीमतें एक समान न होने के पीछे टैक्स का पूरा गणित काम करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की जो भी कीमत होती है और डॉलर के मुकाबले रुपये की जो स्थिति होती है, उस पर सबसे पहले केंद्र सरकार अपनी एक्साइज ड्यूटी लगाती है। इसके बाद सभी राज्य सरकारें अपने-अपने हिसाब से वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) वसूलती हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों के शहरों में भी पेट्रोल-डीजल के भाव में बड़ा अंतर दिखाई देता है। दुनिया भर में फरवरी के अंत से लेकर अब तक कच्चे तेल की कीमतें 40 फीसदी से ज्यादा उछल चुकी हैं। इस भारी बढ़ोतरी के बावजूद भारत सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने मिलकर आम जनता पर इसका सीधा बोझ नहीं पड़ने दिया। पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियों ने लगभग 76 दिनों तक बढ़ती लागत का पूरा बोझ खुद उठाया, जिससे उन्हें 24,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम 'Under-Recovery' नुकसान झेलना पड़ा। इस कड़े दौर के बाद ही कंपनियों ने दो किस्तों में कुल मिलाकर महज 3.91 रुपये प्रति लीटर तक की मामूली बढ़ोतरी की। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके आम आदमी को राहत देने का प्रयास किया है, जिससे सरकारी खजाने को करीब 30,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। घरेलू गैस (LPG) के दामों को नियंत्रित रखने के लिए भी कंपनियों ने अलग से 40,000 करोड़ रुपये का घाटा सहा है। अगर वैश्विक स्तर पर तुलना करें तो अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 45 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं, जबकि म्यांमार, मलेशिया और यूएई जैसे देशों में यह तेजी 50 फीसदी से अधिक रही है। इसके मुकाबले भारत में ईंधन की कीमतों में वृद्धि को सिर्फ 4.4 फीसदी तक ही सीमित रखा गया है, जो दुनिया की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम और सराहनीय है।