प्रधानमंत्री ने की तारीफ, अफसरों ने कर दिया पचास लाख का गोलमाल: नरसिंहपुर में अमृत सरोवर घोटाले का सच
- नरसिंहपुर के अमृत सरोवरों में पचास लाख का भ्रष्टाचार सामने आया है।
- जनपद पंचायत नरसिंहपुर की लिघारी, पिपरिया, पांजरा और कोदरास कला सहित कई पंचायतों में फर्जीवाड़ा हुआ है।
- विकास कार्यों के नाम पर कागजों में काम दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है।
Narsinghpur news today : प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में मिली सराहना के बीच नरसिंहपुर के अमृत सरोवरों से जुड़ा मामला सुर्खियों में है। पुलिस ने कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि जल संरक्षण के लिए बनी परियोजनाओं में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में देशभर के सफल जल संरक्षण प्रयासों का जिक्र करते हुए मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के अमृत सरोवरों की भी सराहना की थी। लेकिन इसी बीच जिले से सामने आई एक खबर ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया। आरोप है कि जिन अमृत सरोवरों को ग्रामीण विकास और जल संरक्षण का मॉडल बताया गया, उन्हीं परियोजनाओं में लाखों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
अब यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। पुलिस जांच शुरू हो चुकी है और सरकारी एजेंसियां भी पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जिन योजनाओं को ग्रामीण विकास की मिसाल माना गया, वहां गड़बड़ी कैसे हुई?
क्या है पूरा मामला?
नरसिंहपुर जनपद पंचायत क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों का निर्माण और विकास कार्य कराया गया था। शुरुआती जांच में आरोप सामने आए कि कुछ परियोजनाओं में निर्माण कार्य और खर्च से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं हुईं।
जिन पंचायतों के नाम सामने आए हैं, उनमें लिघारी, पिपरिया, पांजरा, खमरिया नारिया, पस्ताना और कोदरास कला शामिल हैं। आरोप है कि इन स्थानों पर अमृत सरोवरों के निर्माण और विकास कार्यों में सरकारी राशि का सही उपयोग नहीं किया गया और दस्तावेजों में भी कथित गड़बड़ियां की गईं।
करीब 50 लाख रुपये की कथित अनियमितता पर जांच
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मामले में लगभग ₹50 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित कार्यों पर हुआ या नहीं।
अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्य, भुगतान रिकॉर्ड, माप पुस्तिका (एमबी), बिल और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
मामले की गंभीरता को देखते हुए मूंगवानी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका उपयोग करने, आपराधिक साजिश तथा भ्रष्टाचार निवारण कानून से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
अकेला नरसिंहपुर नहीं, पूरे प्रदेश में यही तस्वीर
गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में भी हाल में एक अमृत सरोवर घोटाला सामने आया था, जहां सचिव पर बिना काम कराए भुगतान निकालने का आरोप लगा। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में भी ग्रामीणों ने पूर्व सरपंच और सचिव पर सांठगांठ का इल्जाम लगाया था। भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा तक में मृत व्यक्तियों के नाम पर मजदूरी निकालने जैसे मामले दर्ज हुए हैं।
