भाई राजा रघुवंशी की याद में खुले ढाबे पर पुलिस की कार्रवाई, दोनों भाई गिरफ्तार, जानें पूरा मामला
Indore News Today : इंदौर में राजा रघुवंशी हत्याकांड के बाद परिवार की ओर से शुरू किया गया ‘राजा भोज ढाबा’ एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह राजा की याद या उनका अधूरा सपना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्रवाई है। रविवार, 9 अगस्त 2026 तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, राऊ थाना क्षेत्र के कैट रोड स्थित ढाबे पर पुलिस ने अचानक जांच की।
पुलिस का दावा है कि वहां बिना जरूरी लाइसेंस शराब परोसी जा रही थी। कार्रवाई के बाद राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी और सचिन रघुवंशी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि कुल पांच लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आबकारी कानून के तहत प्रकरण दर्ज करने के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 का भी उल्लेख किया है।
यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यही ढाबा कुछ महीने पहले राजा रघुवंशी के उस अधूरे सपने को पूरा करने के प्रयास के तौर पर शुरू किया गया था, जिसे परिवार ने उनकी मौत के बाद आगे बढ़ाने का फैसला किया था। अब उसी जगह पर हुई पुलिस कार्रवाई ने परिवार और कारोबार को लेकर एक नया सवाल खड़ा कर दिया है।
राजा भोज ढाबे पर अचानक जांच की गई
पुलिस के मुताबिक राऊ थाना क्षेत्र में कैट रोड स्थित राजा भोज ढाबे पर अचानक जांच की गई। जांच के दौरान वहां शराब परोसे जाने की बात सामने आई। पुलिस का कहना है कि शराब परोसने के लिए आवश्यक अनुमति या लाइसेंस उपलब्ध नहीं था।
इसके बाद ढाबे से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने विपिन रघुवंशी और सचिन रघुवंशी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
मामले में सचिन रघुवंशी को ढाबे का मैनेजर बताया गया है, जबकि विपिन भी ढाबे के संचालन से जुड़े बताए गए हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों को जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। यहां यह समझना जरूरी है कि पुलिस द्वारा दर्ज मामला और आरोप अभी जांच व कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होती है।
पांच लोगों पर हुई कार्रवाई
पुलिस की कार्रवाई सिर्फ दो भाइयों तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले में कुल पांच लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है।
इनमें विपिन रघुवंशी और सचिन रघुवंशी के अलावा शिव यादव, शिवम और विशाल के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने शराब परोसने से संबंधित कार्रवाई के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 का भी उल्लेख किया है। लिस अधिकारियों के अनुसार आदेश के उल्लंघन से जुड़ा पहलू भी कार्रवाई में शामिल है। पूरे मामले में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।
ACP निधि सक्सेना ने दी कार्रवाई की जानकारी
मामले की जानकारी एसीपी निधि सक्सेना की ओर से दी गई। पुलिस के मुताबिक टीम ने ढाबे पर अचानक जांच की थी। इस दौरान शराब परोसे जाने की जानकारी सामने आने के बाद वहां मौजूद लोगों और ढाबे के संचालन से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।
पुलिस की इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू लाइसेंस का है। किसी ढाबे या रेस्टोरेंट में शराब परोसना केवल सामान्य खाद्य कारोबार का हिस्सा नहीं माना जाता। इसके लिए संबंधित आबकारी नियमों के तहत जरूरी अनुमति और लाइसेंस की जरूरत होती है। इसलिए पुलिस की जांच में लाइसेंस से जुड़ी स्थिति सामने आना मामले का मुख्य कानूनी बिंदु बन गया है।
राजा की याद में शुरू हुआ था ‘राजा भोज’
‘राजा भोज ढाबा’ की कहानी इस विवाद से काफी अलग रही है। दिसंबर 2025 में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक राजा रघुवंशी के परिवार ने कैट रोड पर यह ढाबा उनके अधूरे सपने को पूरा करने के उद्देश्य से शुरू किया था।
परिवार के अनुसार राजा की इच्छा थी कि शादी के बाद वह अपना रेस्टोरेंट या ढाबा शुरू करें। इसके लिए परिवार ने पहले से तैयारी भी की थी। लेकिन मई 2025 में मेघालय में राजा की हत्या के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। बाद में परिवार ने उसी योजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया और ‘राजा भोज’ नाम से कारोबार शुरू किया।
