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मध्यप्रदेश में बेरोजगारी पर गरमाई सियासत, जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से पूछे तीखे सवाल

Madhya Pradesh News

Madhya Pradesh News : मध्यप्रदेश में रोजगार और बेरोजगारी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को खुला पत्र लिखकर प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार निवेश और रोजगार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर लाखों युवा अब भी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।

यह मामला सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं से लेकर निजी क्षेत्र में रोजगार तलाश रहे उम्मीदवारों तक, हर किसी के लिए यह एक अहम विषय बन गया है। ऐसे में रोजगार के सरकारी आंकड़े और विपक्ष के दावे दोनों चर्चा का विषय बने हुए हैं।

विधानसभा में दिए गए आंकड़ों का हवाला

अपने खुले पत्र में जीतू पटवारी ने विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए आधिकारिक जवाब का उल्लेख किया। उनके अनुसार, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल द्वारा सदन में प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक 30 जून 2026 तक मध्यप्रदेश रोजगार पोर्टल पर 17.71 लाख से अधिक युवाओं का पंजीकरण दर्ज है।

मध्यप्रदेश

पटवारी ने यह भी दावा किया कि दिसंबर 2025 में प्रदेश में पंजीकृत स्नातक और स्नातकोत्तर बेरोजगारों की संख्या करीब 6.17 लाख थी, जो जून 2026 तक बढ़कर 7.29 लाख से ज्यादा हो गई। यानी छह महीने के भीतर 1.12 लाख से अधिक शिक्षित बेरोजगारों की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

ये आंकड़े विधानसभा में सरकार की ओर से प्रस्तुत जानकारी पर आधारित बताए गए हैं। हालांकि इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि सभी पंजीकृत युवा पूरी तरह बेरोजगार हैं, क्योंकि रोजगार पोर्टल पर कई उम्मीदवार बेहतर अवसरों की तलाश में भी अपना पंजीकरण बनाए रखते हैं।

निवेश बढ़ा तो नौकरियां कहां गईं?

पत्र में जीतू पटवारी ने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि यदि प्रदेश में लगातार निवेश आ रहा है और नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, तो शिक्षित बेरोजगारों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ क्यों रही है।

उन्होंने कहा कि निवेश सम्मेलनों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की घोषणाएं होती हैं। लेकिन युवाओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन घोषणाओं से आखिर कितनी स्थायी नौकरियां वास्तव में बनीं।

कांग्रेस का आरोप है कि निवेश के दावों और रोजगार की वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। वहीं सरकार पहले भी यह कहती रही है कि निवेश परियोजनाओं का असर चरणबद्ध तरीके से रोजगार के रूप में सामने आता है।

सरकारी भर्तियों पर भी मांगा जवाब

खुले पत्र में जीतू पटवारी ने सरकारी नौकरियों को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि पिछले ढाई वर्षों में कितने नियमित सरकारी पदों पर नियुक्तियां हुईं और कितने पद आज भी खाली पड़े हैं।

इसके अलावा उन्होंने यह भी जानना चाहा कि संविदा, आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था के माध्यम से कितने युवाओं को रोजगार दिया गया। उनका कहना है कि स्थायी रोजगार और अस्थायी रोजगार के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए, ताकि युवाओं को वास्तविक स्थिति समझ में आ सके।

रोजगार ऑडिट और श्वेत पत्र की मांग

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से रोजगार व्यवस्था की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं।

उन्होंने मांग की कि प्रदेश के सभी जिलों का रोजगार ऑडिट कराया जाए। साथ ही शिक्षित बेरोजगारी पर सरकार एक विस्तृत श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें यह स्पष्ट बताया जाए कि किस विभाग में कितने स्वीकृत पद हैं, कितने पद रिक्त हैं और कितनों पर नियुक्ति हो चुकी है। पटवारी ने यह भी कहा कि निवेश सम्मेलनों से मिले वास्तविक रोजगार का जिला-वार डेटा सार्वजनिक किया जाए, ताकि युवाओं को यह पता चल सके कि किन क्षेत्रों में वास्तव में रोजगार के अवसर बने हैं।

समयबद्ध भर्ती कैलेंडर की भी उठी मांग

पत्र में एक और महत्वपूर्ण सुझाव समयबद्ध भर्ती कैलेंडर जारी करने का दिया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थी लंबे समय से नियमित भर्ती प्रक्रिया की मांग करते रहे हैं। यदि भर्ती का वार्षिक कैलेंडर पहले से तय हो, तो उम्मीदवारों को तैयारी करने में सुविधा मिलेगी और विभागों में खाली पदों को भी समय पर भरा जा सकेगा।

युवाओं के साथ संवाद की जरूरत

जीतू पटवारी ने रोजगार के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी सलाह दी है। उनका कहना है कि इस बैठक में सरकार, उद्योग जगत, विपक्ष और युवाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, ताकि रोजगार बढ़ाने के लिए व्यावहारिक समाधान निकाले जा सकें। रोजगार जैसे बड़े विषय पर अलग-अलग पक्षों की भागीदारी से बेहतर नीति बनाने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि कौशल विकास, उद्योग और रोजगार नीति के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।