मध्य प्रदेश में अगले 3 दिन बारिश का दौर जारी, कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवा का अलर्ट

MP Weather Alert : मध्य प्रदेश में इस वक्त इंद्रदेव पूरी तरह मेहरबान हैं। मानसून की सक्रियता के कारण राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बादलों का आना-जाना लगा हुआ है। पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश के बाद अब मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए एक बार फिर नया अलर्ट जारी किया है। प्रदेश के कई इलाकों में अब भी रिमझिम तो कहीं झमाझम बारिश होने के पूरे आसार बने हुए हैं। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो मानसून की मौजूदा स्थिति अगले बहत्तर घंटों तक ऐसी ही बनी रहने वाली है। इस दौरान केवल बारिश ही नहीं, बल्कि गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। हवाओं की रफ्तार चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे तक जाने की संभावना है। विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि खराब मौसम के समय लोग बेवजह बाहर निकलने से बचें और सुरक्षित ठिकानों पर ही रहें। भारी बारिश के लिहाज से सीधी, सतना, शहडोल, पन्ना और मैहर जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं। इन जिलों के लिए विभाग ने खास चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने भी स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि इन इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़ और नर्मदापुरम जैसे जिलों में भी मौसम बदला रहेगा। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, रीवा, जबलपुर, सागर, छतरपुर और टीकमगढ़ में भी तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर चलता रहेगा। बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन और हरदा के निवासियों को भी गरज-चमक के साथ बौछारें देखने को मिल सकती हैं। इन सभी जिलों में मौसम विभाग ने येलो और ऑरेंज अलर्ट के बीच स्थिति पर नजर बनाए रखने को कहा है। आने वाले तीन दिनों की बात करें तो तापमान में मामूली बदलाव देखने को मिलेगा। पारे में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उमस का हल्का अहसास हो सकता है। हालांकि, उसके बाद तापमान में फिर से गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे राहत मिलेगी। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में बारिश की गतिविधियां बाकी क्षेत्रों की तुलना में थोड़ी ज्यादा सक्रिय रहेंगी। मानसून के आंकड़ों पर गौर करें तो मध्य प्रदेश में इस साल अब तक का प्रदर्शन काफी उत्साहजनक रहा है। पूरे प्रदेश में अब तक सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। अगर संभागों की बात करें तो पश्चिमी मध्य प्रदेश ने तो रिकॉर्ड ही तोड़ दिए हैं, वहां सामान्य से चौबीस प्रतिशत ज्यादा पानी बरस चुका है। वहीं दूसरी ओर, पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में अभी भी सामान्य से आठ प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिसकी भरपाई आने वाले दिनों में हो सकती है।
