सागर में "सागर गोल्ड" नकली शराब का भंडाफोड़, दिल्ली से आया स्पिरिट, मुरैना से आया कारीगर, ततरवारा गांव की फैक्ट्री से खुला
Sagar Fake Liquor Case: मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब कांड की जांच अब एक ऐसे नेटवर्क तक पहुंच गई है, जिसके तार सागर से बाहर दूसरे राज्यों और शहरों तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने नकली शराब बनाने वाले कथित अंतरराज्यीय गिरोह के 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान हजारों खाली बोतलें, बोतल बनाने और पैकिंग से जुड़ी मशीनें समेत बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई।
शुरुआत में मामला कुछ गांवों में जहरीली शराब पीने से लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौतों तक सीमित नजर आ रहा था। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कथित तौर पर शराब बनाने, बोतल तैयार करने, पैकिंग और फिर ग्रामीण इलाकों में सप्लाई करने की अलग-अलग कड़ियां मिलीं। ताजा जांच में दिल्ली से सागर तक औद्योगिक रसायन पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस की जांच के मुताबिक, ततरवारा गांव में कथित तौर पर नकली शराब तैयार करने की व्यवस्था बनाई गई थी। वहीं दूसरी तरफ ग्वालियर से 11,050 खाली बोतलें और बोतल निर्माण व सीलिंग से जुड़े उपकरण बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
बंडा शराब कांड के बाद तेज हुई कार्रवाई
सागर के बंडा क्षेत्र में शराब पीने से हुई मौतों के बाद पुलिस लगातार जांच कर रही थी। इसी जांच में नकली शराब बनाने वाले नेटवर्क की परतें खुलीं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 10,000 से ज्यादा खाली प्लास्टिक की शीशियां मिलीं। साथ ही बोतल बनाने की डाई मशीन, बोतल पैक करने की डाई मशीन और बोतल सील करने वाली मशीन भी जब्त हुई। यानी यह छोटे स्तर की जुगाड़ नहीं, बल्कि सुनियोजित उत्पादन इकाई जैसी थी।
ततरवारा गांव बना ठिकाना
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली शराब बनाने के लिए ग्राम ततरवारा में चंदू राजा नाम के व्यक्ति का ठिकाना चुना गया। पुलिस के अनुसार बंडा थाना क्षेत्र के छापरी गांव का एक आरोपी और उसका दोस्त रोहित पटेल, जो गढ़ाकोटा थाना क्षेत्र के पिपरिया का रहने वाला है, पहले से मुरैना के एक व्यक्ति के संपर्क में थे। इन्हीं लोगों ने चंदू राजा को नकली शराब बनाकर ज्यादा मुनाफा कमाने का सुझाव दिया। चंदू राजा राजी हो गया और मुरैना से आई टीम को अपने गांव में काम करने की सहमति दे दी।
सागर में "सागर गोल्ड" नकली शराब का भंडाफोड़, दिल्ली से आया स्पिरिट, मुरैना से आया कारीगर, ततरवारा गांव की फैक्ट्री से खुला
पुलिस के मुताबिक मुरैना का दिनेश शिवहरे अपने साथियों के साथ बंडा पहुंचा। वह खाली बोतलें, ढक्कन, पैकिंग के गत्ते के कार्टून और ढक्कन लगाने की मशीन साथ लाया। यह पूरा सामान ततरवारा में रखवाया गया। शराब में इस्तेमाल होने वाला स्पिरिट या थिनर ट्रांसपोर्ट के जरिए दिल्ली से सागर मंगाया गया। वहां से गाड़ी में भरकर उसे ततरवारा ले जाया गया। इसके बाद नकली शराब तैयार होने लगी। तैयार शराब की पेटियां लाइसेंसी दुकानों की आड़ में और कमीशन पर काम करने वालों के जरिए आसपास के इलाके में बेची गईं।
जिसने बनाई, वही बना शिकार
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि शराब तैयार करने वाला दिनेश शिवहरे खुद उसी शराब का शिकार हुआ। पुलिस के अनुसार उसकी तबीयत बिगड़ी और सागर के एक निजी अस्पताल में इलाज चला। इलाज के दौरान उसके साथी उसे अस्पताल से डिस्चार्ज करवाकर मुरैना ले जाने लगे। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
उसके एक साथी देवा उर्फ देवेंद्र की आंखों की रोशनी भी चली गई। पुलिस का कहना है कि तब आरोपियों को समझ आ गया कि शराब मानक के अनुरूप नहीं है और जानलेवा है। तब तक वह बाजार में पहुंच चुकी थी। कार्रवाई के डर से आरोपी फरार होने लगे, और इसी बीच इलाके में मौतों का सिलसिला बढ़ता गया।
अब तक 20 से ज्यादा मौतें, 52 आरोपी
पुलिस के अनुसार इस शराब कांड में अब तक 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। कुल 52 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 37 गिरफ्तार हो चुके हैं।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने आबकारी ठेकेदार मनीष लोधी और उसके पार्टनर आशीष साहू के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र में यह शराब खपाई। ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।
जहरीली शराब क्यों जानलेवा होती है
नकली शराब में अक्सर औद्योगिक स्पिरिट या मिथाइल अल्कोहल मिला दिया जाता है। मिथाइल अल्कोहल शरीर में पहुंचकर जहरीले रसायनों में बदल जाता है। इससे आंखों की रोशनी जाना, अंगों का काम बंद होना और मौत तक हो सकती है।
इसलिए सिर्फ सस्ती या बिना लेबल वाली शराब ही नहीं, बल्कि बिना जांच के बिकने वाली किसी भी शराब से बचना चाहिए। अगर शराब पीने के बाद उल्टी, धुंधला दिखना, तेज सिरदर्द या सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
