सागर शराब कांड: मौत का आंकड़ा 22 पार, 112 लोग अभी भी अस्पताल में जिंदगी से जूझ रहे
Mp Big News, Sagar Liquor Tragedy Update : मध्य प्रदेश के सागर जिले से आ रही खबरें रुला देने वाली हैं। बंडा क्षेत्र के कई गांवों में एक के बाद एक कई परिवार अपने घर के चिराग खो चुके हैं। नकली और जहरीली शराब पीने से अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 112 लोगों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। यह पूरा मामला शनिवार को सामने आना शुरू हुआ था। बंडा तहसील के 6 से 7 गांवों में अचानक कई लोगों की तबियत बिगड़ने लगी। देखते ही देखते यह खबर पूरे सागर जिले में फैल गई और प्रशासन में हड़कंप मच गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
बंडा और आसपास के गांवों में सस्ती देसी शराब पीने के कुछ घंटों बाद ही लोगों की हालत बिगड़नी शुरू हुई थी। कुछ लोगों को उल्टियां होने लगीं, कुछ के शरीर नीले पड़ने लगे और कुछ को तेज अकड़न महसूस हुई।
डॉक्टरों के मुताबिक ये सारे लक्षण मिथाइल अल्कोहल विषाक्तता से जुड़े होते हैं। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि पीड़ितों ने जो शराब पी थी उसमें सामान्य एथेनॉल की जगह जानलेवा मिथाइल अल्कोहल मिलाया गया था।
सागर गोल्ड ब्रांड बना मौत की वजह
जांच में सामने आया है कि ज्यादातर पीड़ितों ने सागर गोल्ड नाम की देसी शराब पी थी। यह ब्रांड बंडा इलाके में काफी आसानी से और सस्ते दामों में बिकता था। पुलिस को शक है कि असली सागर गोल्ड की खाली बोतलों में नकली शराब भरकर बेची जा रही थी। पुरानी बोतलें, नकली लेबल, ढक्कन और यहां तक कि फर्जी क्यूआर कोड तक इस्तेमाल किए गए, ताकि लोगों को असली-नकली का फर्क ही पता न चले।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़ रहे तार
इस पूरे नेटवर्क की जांच में अब उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले का कनेक्शन सामने आया है। मध्य प्रदेश से सटे ललितपुर के कुछ शराब कारोबारियों की भूमिका पर पुलिस बारीकी से नजर रख रही है। बताया जा रहा है कि नकली शराब वहीं तैयार होकर सस्ते दामों में सागर जिले के गांवों तक पहुंचाई जाती थी। सरकारी दुकान पर जो शराब 137 रुपए की मिलती थी, वही नकली शराब महज 70 से 80 रुपए में बेची जा रही थी। यही सस्तापन गांव के लोगों को अपनी ओर खींच लाया।
प्रशासन की कार्रवाई तेज, कई अफसर सस्पेंड
मामला सामने आते ही कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश पर जिले भर की शराब दुकानों और ठेकों पर जांच शुरू कर दी गई। अब तक 25 से ज्यादा लोगों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है, वहीं करीब 10 से 12 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। लापरवाही के आरोप में बंडा थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी समेत कई पुलिस और आबकारी अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब शहर के लाइसेंसी ठेकेदारों ने खुद आबकारी विभाग को लिखित शिकायत दी थी कि नकली शराब बिक रही है, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
एसपी अनुराग सुजानिया के कार्यकाल में दूसरा बड़ा हादसा
सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया एक बार फिर चर्चा में हैं। इससे पहले जब वे मुरैना में एसपी थे, तब भी जहरीली शराब से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। एक ही अफसर के कार्यकाल में दूसरी बार ऐसा हादसा होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सियासत भी हुई गरम
इस हादसे के बाद मध्य प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी बंडा क्षेत्र के बमूरा गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन असली मौत का आंकड़ा छिपा रहा है और असल में करीब 50 लोगों की जान जा चुकी है। पटवारी ने एसपी अनुराग सुजानिया को तुरंत निलंबित कर जेल भेजने की मांग भी की है। हालांकि प्रशासन की तरफ से आधिकारिक आंकड़ा अभी 22 मौतों का ही बताया जा रहा है।
सरकार का मुआवजे का ऐलान
राज्य सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। इसके साथ ही जिले की सभी शराब दुकानों पर सैंपल जांच के आदेश भी दिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली शराब का यह कारोबार और कहां-कहां फैला हुआ है।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सहित सागर और बंडा के अस्पतालों में अभी भी दर्जनों मरीज भर्ती हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार इन मरीजों की निगरानी कर रही है।
