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Sagar Sharab Kand News : जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला जारी, आरोपी राम सिंह लोधी की भी मौत; मेथेनॉल से मचा हड़कंप

Sagar Sharab Kand News : सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब कांड लगातार गंभीर होता जा रहा है। मेथेनॉल की पुष्टि के बाद पुलिस कार्रवाई तेज है और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी गाज गिरी है।
Sagar Sharab Kand News

Mp Big News,Sagar Sharab Kand News :  मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब कांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। 6 सितंबर से सामने आ रही मौतों और बीमारियों के बीच अब मामले में आरोपी बनाए गए राम सिंह लोधी की भी इलाज के दौरान मौत हो गई है। उसे पुलिस ने अवैध शराब बेचने के आरोप में नामजद किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, राम सिंह ने भी वही शराब पी थी, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।

इस मामले में सबसे अहम खुलासा शराब में मेथेनॉल की मौजूदगी को लेकर हुआ है। उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि पोस्टमार्टम में मृतकों के शरीर में बड़ी मात्रा में मेथेनॉल पाया गया। हालांकि, मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं, इसलिए आधिकारिक आंकड़े को ही अंतिम मानना जरूरी है।

Sagar Sharab Kand: आरोपी राम सिंह लोधी की भी मौत

पुलिस के अनुसार राम सिंह लोधी पर जहरीली शराब की बिक्री से जुड़ा मामला दर्ज किया गया था। वह गांव में अवैध शराब बेचने का काम करता था। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर उसने खुद भी वही शराब पी थी जिसे वह बेच रहा था।

तबीयत बिगड़ने के बाद उसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस ने राम सिंह समेत कई लोगों को आरोपी बनाया है। अलग-अलग एफआईआर में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों और कथित अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं।

आखिर कितना खतरनाक है मेथेनॉल ?

इस पूरे मामले में मेथेनॉल सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है। मेथेनॉल एक औद्योगिक रसायन है, जिसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर सॉल्वेंट, ईंधन और दूसरे रासायनिक उत्पादों में किया जाता है। इसे पीने के लिए इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक है।

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में जाने के बाद मेथेनॉल जहरीले रसायनों में बदल सकता है। इससे आंखों की रोशनी, दिमाग और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। गंभीर विषाक्तता की स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है। इसी वजह से जहरीली शराब पीने के बाद कई लोगों की हालत तेजी से बिगड़ने की बात सामने आई है।

मौतें  आंकड़ों में अंतर क्यों?

सागर शराब कांड को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में 13 मौतों की पुष्टि बताई गई, जबकि बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। एक रिपोर्ट में 22 मौतों और 112 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी गई है। फिलहाल बड़ी संख्या में मरीज सागर और भोपाल के अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती और स्क्रीनिंग भी बढ़ाई है।

30 आरोपियों पर FIR, गिरफ्तारियां भी तेज

पुलिस ने मामले में कई अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार करीब 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और कई आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जा चुका है। बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।

जांच सिर्फ शराब बेचने वालों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शराब तैयार कहां हुई, उसमें मेथेनॉल कैसे पहुंचा, इसे किन लोगों ने सप्लाई किया और गांवों तक इसका नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था। मामले में लाइसेंसी ठेकेदारों के नाम भी एफआईआर में सामने आए हैं।

अलग-अलग थानों में दर्ज हुए मामले

बंडा और विनायका थानों में अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गई है। बंडा थाने की एफआईआर में लाइसेंसी ठेकेदार यशवंत सिंह ठाकुर से जुड़ा मामला दर्ज किया गया है, जबकि विनायका थाने की एफआईआर में सिद्धार्थ कुशवाहा का नाम सामने आया है। पुलिस अब शराब की सप्लाई चेन को जोड़ने की कोशिश कर रही है। जांच का एक अहम सवाल यह है कि कथित जहरीली शराब का वास्तविक स्रोत क्या था।

SDOP के बाद SDM भी हटाईं गईं

जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा एक्शन हुआ है। बंडा के SDOP प्रदीप वाल्मीकि को हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में तैनात किया गया है। उनकी जगह रोहित लखारे को बंडा SDOP की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा बंडा SDM आरती यादव को भी पद से हटाया गया है। उन्हें सागर जिला कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ किया गया है, जबकि संजय कुमार जैन को बंडा SDM की जिम्मेदारी दी गई है।

मजिस्ट्रियल जांच से सामने आएंगे कई जवाब

प्रशासन ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि जहरीली शराब कहां तैयार हुई, किसने इसे स्टोर किया, किन माध्यमों से सप्लाई हुई और निगरानी तंत्र में कहीं लापरवाही हुई या नहीं।

यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला केवल अवैध शराब की बिक्री तक सीमित नहीं है। इसमें प्रशासनिक निगरानी, शराब के लाइसेंसधारी नेटवर्क और कथित सप्लाई चेन की भूमिका भी जांच के दायरे में है।