Sports News Without Access, Favor, Or Discretion!

  1. Home
  2. Latest Big News

एक ही प्रदेश, एक ही नियुक्ति, फिर वेतन और नियम अलग-अलग क्यों? B.Ed शिक्षकों ने उठाए गंभीर सवाल


MP BEd Teachers Salary : मध्यप्रदेश में B.Ed प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जिन शिक्षकों ने नियमानुसार नियुक्ति प्राप्त की और लगातार स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें प्रशासनिक देरी का नुकसान नहीं उठाना चाहिए। उनका तर्क है कि जब नियुक्ति प्रक्रिया समान रही और कार्य भी एक जैसा है, तो जिलों के हिसाब से अलग-अलग व्यवस्था क्यों लागू की जा रही है।

कई जिलों में वेतन रुका, कई जगह मिल रहा पूरा भुगतान

शिक्षकों का सबसे बड़ा मुद्दा वेतन को लेकर है। उनका कहना है कि प्रदेश के कुछ जिलों में B.Ed प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों को नियमित और पूरा वेतन दिया जा रहा है। वहीं कई जिलों में महीनों से वेतन रोक दिया गया है। यही असमानता अब विवाद की वजह बन गई है। शिक्षकों का कहना है कि यदि नियुक्ति एक समान प्रक्रिया से हुई है और सभी शिक्षक एक जैसी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, तो वेतन भुगतान में भी पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए। शिक्षक संगठनों के अनुसार, अलग-अलग जिलों में अलग आदेश लागू होने से कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। उनका मानना है कि पूरे प्रदेश के लिए एक समान प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

ब्रिज कोर्स की फीस जमा, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ

B.Ed शिक्षकों की दूसरी बड़ी चिंता ब्रिज कोर्स को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 10,579 B.Ed प्रशिक्षित शिक्षकों से ब्रिज कोर्स के लिए 25-25 हजार रुपये शुल्क लिया गया। इनमें से 10,521 शिक्षकों के आवेदन राज्य स्तर पर स्वीकृत भी हो चुके हैं। इसके बावजूद करीब 10 महीने गुजर जाने के बाद भी ब्रिज कोर्स शुरू नहीं हो पाया है। शिक्षकों का कहना है कि यदि कोर्स शुरू होने में इतनी देरी होनी थी, तो फीस लेने के बाद स्पष्ट समय-सीमा पहले ही घोषित की जानी चाहिए थी। शिक्षा क्षेत्र के जानकार भी मानते हैं कि किसी भी प्रशिक्षण प्रक्रिया में समयबद्धता जरूरी होती है। लंबी देरी से न केवल प्रशासनिक भ्रम पैदा होता है, बल्कि कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना भी बढ़ती है।

रोज स्कूल में पढ़ा रहे शिक्षक, फिर भी बढ़ रहा प्रोबेशन

शिक्षकों का कहना है कि वे नियमित रूप से स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा चुनाव ड्यूटी, जनगणना से जुड़े कार्य और शिक्षा विभाग द्वारा सौंपे जाने वाले अन्य सरकारी दायित्व भी निभा रहे हैं। इसके बावजूद कई जिलों में उनका प्रोबेशन पीरियड बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे शिक्षकों के भविष्य को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। शिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं है, तो प्रशासनिक या संस्थागत देरी का असर उनके सेवा रिकॉर्ड पर नहीं पड़ना चाहिए।

एक समान नीति की मांग तेज

शिक्षक संगठनों का कहना है कि पूरे प्रदेश में समान नियम लागू होना जरूरी है। उनका तर्क है कि शिक्षा व्यवस्था में अलग-अलग जिलों के लिए अलग आदेश लागू होने से भ्रम की स्थिति बनती है और कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि किसी प्रशिक्षण, नियुक्ति या सेवा शर्त से जुड़ा निर्णय राज्य स्तर का है, तो उसका क्रियान्वयन भी पूरे प्रदेश में एक जैसा होना चाहिए। इससे विवाद और असमानता दोनों कम होंगे।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

B.Ed प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिन जिलों में वेतन रोका गया है, वहां जल्द 100 प्रतिशत वेतन जारी किया जाए। इसके साथ ही प्रोबेशन अवधि बढ़ाने से जुड़े निर्णयों की समीक्षा की जाए। शिक्षकों का कहना है कि ब्रिज कोर्स जल्द शुरू किया जाए और इसकी स्पष्ट समय-सीमा सार्वजनिक की जाए, ताकि अनिश्चितता खत्म हो सके। साथ ही पूरे प्रदेश में सभी जिलों के लिए एक समान आदेश लागू किए जाएं और संबंधित संस्थाओं की देरी का भार शिक्षकों पर न डाला जाए।