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Sawan Somvar 2026: ज्यादातर लोग सावन सोमवार पर यह एक गलती कर देते हैं… क्या आप भी?

Sawan Somvar 2026: सावन 2026 के पहले सोमवार पर जानिए व्रत रखने के नियम, बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका, पांच सोमवार की पूरी सूची, सावन शिवरात्रि की तिथि और भगवान शिव की पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताएं।
Sawan Somvar 2026

Sawan Somvar 2026:आज बाज़ार से निकल रहा था तो देखा हर गली-मोहल्ले में बम-बम भोले की धुन बज रही है। पूछा तो पता चला आज सावन का पहला सोमवार है। अब मध्य प्रदेश में तो सावन सोमवार का मतलब ही अलग है - सुबह-सुबह लोटे में जल लेकर मंदिर की लाइन, कहीं भजन-कीर्तन, तो कहीं घर की महिलाएं व्रत की तैयारी में जुटी हुई। लेकिन असली सवाल यह है कि इस बार सावन में कितने सोमवार आएंगे और बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका क्या है। चलिए, बिना लाग-लपेट के सीधी बात करते हैं।

सावन 2026 कब शुरू हुआ, कब खत्म होगा

हिन्दू पंचांग के मुताबिक इस साल सावन का महीना 30 जुलाई गुरुवार से शुरू हो गया है। यह पवित्र महीना 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगा। और हां, इस बार का सावन कुछ खास है, क्योंकि इसमें पूरे पांच सोमवार पड़ रहे हैं। पुराने लोग कहते हैं कि जिस साल सावन में पांच सोमवार आते हैं, वह साल भोलेनाथ की खास कृपा वाला माना जाता है।

आज है सावन का पहला सोमवार

लाला रामस्वरूप पंचांग के हिसाब से आज यानी 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है। अगर आपने अभी तक व्रत का संकल्प नहीं लिया, तो कोई बात नहीं, बाकी चार सोमवार अभी बाकी हैं।

पांचों सोमवार की पूरी लिस्ट यहां देखें

पहला सोमवार 3 अगस्त को है। दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ेगा। तीसरा सोमवार 17 अगस्त को आएगा। चौथा सोमवार 24 अगस्त को रहेगा और पांचवां सोमवार 31 अगस्त को होगा। इन तारीखों को कहीं लिख लीजिए या मोबाइल में रिमाइंडर लगा लीजिए, ताकि कोई सोमवार छूटे नहीं।

किस दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए

अब बात करते हैं बेलपत्र की, जिसके बिना शिवजी की पूजा अधूरी मानी जाती है। लेकिन बेलपत्र तोड़ने के भी कुछ नियम हैं। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या के दिन गलती से भी बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। इसके अलावा संक्रांति काल में और सोमवार के दिन भी बेलपत्र तोड़ने से बचना चाहिए। अगर इन तिथियों में बेलपत्र चाहिए हो, तो एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। बेलपत्र तोड़ते समय मन ही मन शिवजी को प्रणाम जरूर करें, यह शिष्टाचार भी है और आस्था भी।

बेलपत्र तोड़ने का सही तरीका

बहुत लोग जल्दबाजी में टहनी समेत बेलपत्र तोड़ लेते हैं, जो गलत माना जाता है। बेलपत्र को हमेशा तीन पत्तियों के डंठल समेत ही तोड़ना चाहिए, टहनी को नुकसान पहुंचाए बिना। पत्तियां कहीं से कटी-फटी न हों, इस बात का खास ध्यान रखें।

क्या दूसरे का चढ़ाया बेलपत्र फिर से चढ़ा सकते हैं

यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। धर्मशास्त्रों में बेलपत्र को एक ऐसा इकलौता पत्ता बताया गया है जो कभी बासी नहीं होता। इसीलिए अगर आपके पास नया बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो पहले से चढ़ाए गए बेलपत्र को अच्छी तरह पानी से धोकर दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पूरी तरह शास्त्रसम्मत है, इसमें कोई दोष नहीं माना जाता।

भगवान शिव को बेलपत्र कैसे चढ़ाएं

शिवजी को हमेशा उल्टा बेलपत्र चढ़ाया जाता है, यानी पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली का इस्तेमाल करें। साथ ही जल की धारा अर्पित करना भी नहीं भूलें। सावन में शिवजी को सबसे पहले चंदन का तिलक लगाएं, फिर बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें। इसके बाद जल से अभिषेक करें, दीप जलाएं और अगर संभव हो तो भोग में केसर की खीर चढ़ाएं। इतना कर लिया तो समझिए पूजा पूरी हो गई।

शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है

शिवलिंग पर तीन से लेकर ग्यारह बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है, हालांकि इससे ज्यादा बेलपत्र चढ़ाने में भी कोई मनाही नहीं है। बस ध्यान रखें कि बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ रहे। जिन पत्तों पर धारियां हों या जो कटे-फटे हों, उन्हें भूलकर भी न चढ़ाएं। यह छोटी सी बात है, लेकिन पूजा की शुद्धता के लिए जरूरी मानी जाती है।

बेलपत्र का धार्मिक महत्व

बेलपत्र का त्रिकोणीय आकार भगवान शिव की तीन आंखों और उनके त्रिशूल का प्रतीक माना जाता है। यह ठंडक देने वाला पत्ता है, इसीलिए गर्मी के मौसम में शिवजी को खासतौर पर प्रिय बताया गया है। मान्यता है कि सावन में बेलपत्र से पूजा करने वाले भक्तों को आध्यात्मिक शांति मिलती है। बेल वृक्ष के नीचे शिवलिंग की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसा शास्त्रों में लिखा गया है। बिल्व वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से ज्ञान बढ़ता है और वहां गरीबों को भोजन कराने से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, ऐसी लोक मान्यता प्रचलित है।

सावन शिवरात्रि 2026 कब है

सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है और ठीक 11 दिन बाद यानी 11 अगस्त 2026, मंगलवार को सावन शिवरात्रि पड़ेगी। इस दिन कांवड़िए कांवड़ में जल भरकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। कई शहरों में इस दिन बड़ी कांवड़ यात्राएं भी निकाली जाती हैं, इसलिए भीड़ से बचने के लिए समय से मंदिर पहुंचना बेहतर रहता है।

तो भाई, इस बार सावन में पांच सोमवार का दुर्लभ संयोग है। अगर आप भी व्रत रखने और बेलपत्र चढ़ाने का मन बना रहे हैं, तो ऊपर बताए गए नियमों का ध्यान रखिए। छोटी-छोटी बातों का खयाल रखने से ही पूजा पूरी और फलदायी मानी जाती है। हर हर महादेव।