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Sonam Wangchuk news today : अस्पताल के बिस्तर से भी नहीं झुके वांगचुक, अब विवेक तन्खा ने भी उठाई आवाज

Sonam Wangchuk news today

 

Sonam Wangchuk news today :  भाई साहब, दिल्ली में इन दिनों एक ऐसा मामला चल रहा है जिस पर पूरे देश की नजर टिकी है। बात हो रही है सोनम वांगचुक की, वही इंजीनियर साहब जिनकी कहानी पर फिल्म '3 इडियट्स' का फुनसुख वांगड़ू वाला किरदार बना था। अब असल जिंदगी में भी वे किसी हीरो से कम नहीं दिख रहे।

28 जून से जंतर मंतर पर बैठे वांगचुक का अनशन अब एक बड़ा सियासी और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। हालत ये हो गई कि पुलिस को उन्हें जबरदस्ती उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाना पड़ा। लेकिन कमाल की बात ये है कि अस्पताल के बिस्तर पर भी उन्होंने हार नहीं मानी।

आखिर मामला है क्या

वांगचुक की मांग साफ है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्ती और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वे अनशन पर बैठे हैं। नीट पेपर लीक का मुद्दा हो या परीक्षा प्रणाली की खामियां, वांगचुक कहते रहे हैं कि जब तक सरकार जवाबदेही तय नहीं करती, वे पीछे नहीं हटेंगे।

 

21 दिन तक जंतर मंतर पर सब कुछ शांति से चलता रहा। लेकिन लगातार भूखे रहने से उनकी सेहत बिगड़ने लगी। तस्वीरें सामने आईं तो सोशल मीडिया से लेकर हाईकोर्ट तक चर्चा शुरू हो गई। आखिरकार दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल भिजवा दिया।

सफदरजंग अस्पताल से भी नहीं टूटा हौसला

यहां पहुंचकर भी वांगचुक ने अपना अनशन खत्म नहीं किया। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो भी उनके साथ अस्पताल में मौजूद रहीं और उन्होंने साफ कह दिया कि परिवार की सहमति के बिना उन्हें कुछ भी नहीं दिया जाए, न मुंह से न इंजेक्शन के जरिए।

 

 

हाल ही में, वांगचुक ने अस्पताल से एक पत्र लिखकर तीन शर्तें रखीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया नाकामियों की ज़िम्मेदारी स्वीकार कर ले, या अगर वह और उनके साथी संसद पहुँचकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं से मिल सकें, तो वे अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे।

विवेक तन्खा की चिंता ने बढ़ाई हलचल

इसी बीच राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वांगचुक का अनशन खत्म न कराना सरकार, संसद और न्यायपालिका, तीनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

तन्खा ने आगे लिखा कि अगर अनशन के दौरान वांगचुक को किसी तरह का नुकसान होता है, तो इसे पूरे लोकतांत्रिक तंत्र की सामूहिक विफलता माना जाएगा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसे हालात बने तो वे खुद सांसद बने रहना पसंद नहीं करेंगे। इतना तीखा बयान किसी सांसद की तरफ से आना अपने आप में बड़ी बात है।

वांगचुक से मुलाकात 

तन्खा वांगचुक से मिलने खुद जंतर मंतर पहुंचे थे और उनकी सेहत का हाल जाना था। मुलाकात के बाद उन्होंने भावुक पोस्ट लिखी थी कि वांगचुक इस देश के सच्चे योद्धा हैं और उनके संघर्ष का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। तन्खा ने ये भी लिखा कि देश के लिए वांगचुक का जीवित रहना बहुत जरूरी है, उनका जीवन और विचार देश की धरोहर की तरह हैं।

सियासी गलियारों में भी हलचल

वांगचुक का यह अनशन सिर्फ शिक्षा सुधार तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि अब यह संसद के मानसून सत्र में विपक्ष की एकजुटता की परीक्षा भी बनता दिख रहा है। अलग-अलग दलों के नेता उनसे मिलने पहुंच रहे हैं और सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से ही वांगचुक को अस्पताल भेजा।