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Jabalpur की हवा में घुली मिठास, देश में तीसरा नंबर पाकर गदगद हुआ पूरा शहर

संस्कारधानी जबलपुर का AQI महज 77, इंदौर और लखनऊ को छोड़ा पीछे, महापौर बोले- अगली बार नंबर-1 पर होगा कब्जा
Jabalpur

Mp Big News , Jabalpur के लोगों के लिए यह हफ्ता किसी तोहफे से कम नहीं है। शहर ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पूरे देश में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है। यह खबर सामने आते ही नगर निगम के दफ्तर से लेकर शहर की गलियों तक खुशी की लहर दौड़ गई।

दिल्ली में मिला बड़ा सम्मान

यह उपलब्धि किसी छोटी बात नहीं है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिल्ली में एक खास समारोह रखा, जहां जबलपुर को यह सम्मान दिया गया। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने मंच पर पहुंचकर जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया। तस्वीरें सामने आते ही शहरवासियों ने सोशल मीडिया पर बधाइयों की झड़ी लगा दी।

130 से 77 तक का सफर, कैसे बदली तस्वीर

असली कहानी तो आंकड़ों में छिपी है। महापौर ने बताया कि जब नगर सरकार की कमान उनके हाथ में आई थी, उस वक्त जबलपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स करीब 130 के आसपास था। आज यही आंकड़ा गिरकर 77 पर आ गया है। और सिर्फ यही नहीं, इस साल अप्रैल से लेकर अब तक शहर का औसत AQI करीब 67 दर्ज किया गया है, जो अपने आप में बड़ी बात है।

महापौर ने इस मौके पर एक दिलचस्प बात भी कही। उनके मुताबिक इंसान खाने-पीने की कई चीजों के बिना कुछ समय गुजार सकता है, लेकिन हवा के बिना एक पल भी जीना मुमकिन नहीं। शायद यही सोच नगर निगम की पूरी मुहिम के पीछे की असली वजह रही।

जमीन पर हुआ काम, तभी दिखा नतीजा

सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरकर यह बदलाव लाया गया है। शहर में धूल को काबू में रखने के लिए खास इंतजाम किए गए। जगह-जगह फव्वारे और फॉगर्स चलाए जा रहे हैं, ताकि हवा में उड़ने वाले धूल कणों को नीचे बिठाया जा सके।
हरियाली बढ़ाने पर भी खासा जोर दिया गया। साथ ही पुराने कचरे यानी लेगेसी वेस्ट को हटाने का काम भी तेजी से चल रहा है। इलेक्ट्रिक बसों को शहर में उतारा गया है, जिससे डीजल-पेट्रोल वाहनों से निकलने वाला धुआं कम हो सके। यातायात व्यवस्था को सुधारने पर भी नगर निगम की नजर बनी हुई है, क्योंकि जाम में फंसे वाहन प्रदूषण को और बढ़ा देते हैं।

इंदौर और लखनऊ को पछाड़ा

जबलपुर की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इसने बड़े शहरों को टक्कर देकर यह मुकाम हासिल किया है। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की सूची में जबलपुर का AQI 77 रहा, जबकि इंदौर का आंकड़ा 81 और लखनऊ का 136 दर्ज हुआ। यहां एक बात समझना जरूरी है कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में सिर्फ AQI का आंकड़ा नहीं देखा जाता। इसमें वायु गुणवत्ता में हुए सुधार, धूल पर नियंत्रण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण, पुराने कचरे के निपटारे और सार्वजनिक परिवहन जैसे कई पहलुओं को परखा जाता है। यानी जबलपुर ने कई मोर्चों पर एक साथ अच्छा प्रदर्शन किया है, तभी यह रैंक हासिल हुई।

अगला लक्ष्य नंबर-1

तीसरे स्थान से खुश होकर नगर निगम रुकने वाला नहीं है। महापौर ने साफ कहा है कि अगले साल के सर्वेक्षण में जबलपुर को देश में पहला स्थान दिलाना ही असली लक्ष्य है। उनका कहना है कि जिस रफ्तार से शहर में काम चल रहा है, उसे देखते हुए यह सपना पूरा होना मुश्किल नहीं लगता।

श्रेय किसे मिला

जीत का जश्न मनाते हुए महापौर ने इसका पूरा श्रेय अकेले खुद या निगम अधिकारियों को नहीं दिया। उन्होंने साफ तौर पर सफाई कर्मचारियों, अधिकारियों-कर्मचारियों, पार्षदों और एमआईसी सदस्यों का शुक्रिया अदा किया।

लेकिन सबसे ज्यादा तारीफ उन्होंने जबलपुर के आम नागरिकों की की। महापौर के शब्दों में यह सम्मान अकेले नगर निगम का नहीं, बल्कि पूरे जबलपुर शहर और यहां रहने वाले हर इंसान का है।