Sports News Without Access, Favor, Or Discretion!

  1. Home
  2. Latest Big News

MP में किसान ATM कार्ड का मामला गरमाया, लाखों कार्ड स्टोर में पड़े,सहकारिता मंत्री ने दिए जांच के आदेश

MP Farmers ATM Card

MP Farmers ATM Card : मध्य प्रदेश में किसानों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश उस समय सवालों में आ गई, जब किसान ATM कार्ड से जुड़ा बड़ा आंकड़ा सामने आया। जिन कार्डों के जरिए किसानों को बैंकिंग सुविधा आसान बनाने की योजना थी, उनमें से बड़ी संख्या किसानों तक पहुंच ही नहीं पाई।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में करीब 23 लाख किसान सहकारी बैंकों से ऋण लेते हैं। इसके मुकाबले करीब 19.5 लाख ATM कार्ड खरीदे गए। लेकिन इनमें से लगभग 2.5 लाख कार्ड ही किसानों को वितरित और एक्टिवेट किए जा सके। इसका मतलब है कि करीब 17 लाख कार्ड अभी इस्तेमाल से बाहर हैं।

करीब ₹23 करोड़ खर्च, फिर भी किसानों तक नहीं पहुंचे कार्ड

इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू खर्च से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के अपेक्स बैंक और 38 जिला सहकारी बैंकों में ATM कार्ड की खरीद पर करीब ₹23 करोड़ खर्च किए गए। करीब 19.5 लाख कार्ड खरीदे गए, जबकि अब तक केवल लगभग 2.5 लाख कार्ड ही एक्टिवेट हुए हैं।

यहीं से असली सवाल खड़ा होता है। अगर कार्ड तैयार कराने के बाद उन्हें किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी, तो इतनी बड़ी संख्या में कार्ड खरीदने का फैसला किस आधार पर लिया गया? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंकिंग सुविधा का फायदा तभी मिलता है, जब कार्ड किसान के हाथ में पहुंचे, एक्टिवेट हो और किसान उसका इस्तेमाल कर सके।

लाखों ATM कार्ड स्टोर में पड़े होने की बात

मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में कार्ड बैंक के स्टोर में पड़े हैं। इनमें वर्ष 2022-23 के दौरान खरीदे गए कार्ड भी शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसे में उनकी वैधता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

अगर कार्ड अपनी वैधता पूरी कर लेते हैं और किसानों तक पहुंचने से पहले ही अनुपयोगी हो जाते हैं, तो इस खरीद का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है। इसके बाद नए कार्ड तैयार कराने की जरूरत पड़ सकती है, जिससे दोबारा खरीद और वितरण पर खर्च का सवाल खड़ा होगा।

हालांकि, अंतिम रूप से कितनी राशि वास्तव में व्यर्थ गई है, यह जांच और संबंधित बैंक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए अभी इसे पूरी तरह सरकारी धन की बर्बादी का अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी।

38 जिला सहकारी बैंकों और 825 शाखाओं की थी जिम्मेदारी

रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के 38 जिला सहकारी बैंकों की करीब 825 शाखाओं के जरिए ATM कार्ड किसानों तक पहुंचाए जाने थे। योजना का मकसद सहकारी बैंक से जुड़े किसानों को बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच देना था।

लेकिन कार्ड तैयार होने और उनके वितरण के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। करीब 19.5 लाख कार्डों की खरीद के बावजूद लगभग 2.5 लाख कार्ड ही एक्टिवेट हो पाए।

इस स्थिति में सिर्फ कार्ड खरीदने पर ही नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या किसानों की सूची पर्याप्त रूप से तैयार थी? क्या शाखाओं को कार्ड बांटने के लिए स्पष्ट लक्ष्य दिए गए थे? क्या किसानों को कार्ड एक्टिवेशन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई? इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आ सकते हैं।

सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने दिए जांच के आदेश

मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि ATM कार्ड की वास्तविक जरूरत कितनी थी, बड़ी संख्या में कार्ड खरीदने का निर्णय किस आधार पर लिया गया और किसानों तक कार्ड पहुंचाने में इतनी कम प्रगति क्यों हुई।

मंत्री की ओर से यह भी कहा गया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले में केवल खरीद का सवाल नहीं है। इसमें जरूरत का आकलन, टेंडर और खरीद प्रक्रिया, कार्डों का भंडारण, वितरण, एक्टिवेशन और उनकी वैधता जैसे कई पहलुओं की जांच जरूरी होगी।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे घोटाला बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार केवल जांच के आदेश देकर जिम्मेदारी पूरी न करे, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।

यह राजनीतिक आरोप है और इसकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी। फिलहाल सरकार की ओर से जांच के आदेश दिए जा चुके हैं, इसलिए आगे की कार्रवाई और रिपोर्ट इस पूरे मामले की तस्वीर साफ कर सकती है।