बिलाल से विशाल तक का सफर: कुर्बानी की प्रथा से आहत युवक ने अपनाया सनातन धर्म
Khandwa News : बकरीद के मौके पर बेजुबान जानवरों की कुर्बानी की प्रथा से व्यथित होकर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के एक युवक ने अपने धर्म को छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया है। खिरकिया निवासी बिलाल, जो पेशे से बस ऑपरेटर है, उसने जिले के प्रसिद्ध महादेवगढ़ मंदिर में विधि-विधान के साथ अपना धर्मांतरण पूरा किया। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी काफी सुर्खियों में है। बिलाल का कहना है कि बचपन से ही उसके मन में एक टीस थी। बकरीद के दौरान जानवरों की कुर्बानी को देखना उसके लिए हमेशा से ही पीड़ादायक रहा। एक संवेदनशील व्यक्ति होने के नाते, वह इन प्रथाओं को स्वीकार नहीं कर पा रहा था। समय बीतने के साथ उसकी यह मानसिक कशमकश और अधिक गहरी होती गई। उसने बताया कि जब भी वह कुर्बानी की प्रक्रिया देखता, उसका मन अशांत हो जाता था। उसने काफी समय तक इस पर विचार किया और अंततः सनातन धर्म की ओर आकर्षित हुआ। हाल ही में जब बकरीद का त्योहार मनाया गया, तो जानवरों की हत्या को देखकर युवक का दिल पूरी तरह टूट गया। उस समय चल रहे पुरुषोत्तम मास के धार्मिक महत्व के बारे में सुनकर उसे ऐसा लगा कि यह उसके लिए एक संकेत है। पुरुषोत्तम मास को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है, जिसमें लोग आत्मिक शुद्धि के लिए विशेष प्रयास करते हैं। इसी दौरान उसने यह पक्का इरादा कर लिया कि अब वह अपनी जीवन पद्धति बदल लेगा। महादेवगढ़ मंदिर के प्रमुख अशोक पालीवाल के अनुसार, युवक ने स्वयं उनके पास आकर अपनी इच्छा व्यक्त की थी। उसने किसी दबाव में नहीं, बल्कि पूरी तरह अपनी मर्जी से यह कदम उठाया है। मंदिर प्रबंधन ने उसकी घर वापसी के लिए एक विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया। सनातन परंपरा के अनुसार, इस प्रक्रिया को 'शुद्धिकरण' कहा जाता है, जिसमें युवक को विभिन्न पवित्र तत्वों से स्नान कराया गया। इस अनुष्ठान में 10 विधि स्नान शामिल थे, जिसमें गंगाजल, गाय का दूध, पंचामृत, गोमूत्र, गोबर, तुलसी की मिट्टी, विभिन्न फल और धातुओं के साथ पंचगव्य का उपयोग किया गया। यह प्रक्रिया व्यक्ति को पुराने जीवन के प्रभावों से मुक्त कर नए जीवन के लिए तैयार करने का एक तरीका मानी जाती है। मंदिर के पंडितों और विद्वानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस संस्कार को संपन्न कराया। जब यह प्रक्रिया पूरी हुई, तो पूरा मंदिर परिसर भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा। सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और सनातन धर्म के समर्थक इस पल के साक्षी बने। मंदिर में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल होकर विशाल ने भी अपनी नई आस्था के प्रति निष्ठा प्रकट की। 'हर-हर महादेव' और 'जय श्री राम' के नारों से मंदिर का माहौल भक्तिमय हो गया। इस आयोजन के अंत में मंदिर समिति ने विशाल को पवित्र ग्रंथ 'रामायण' भेंट की। उन्हें सनातन धर्म की शिक्षाओं और जीवन पद्धति को समझने के लिए मार्गदर्शन भी दिया गया। अब बिलाल, जो अब विशाल के रूप में जाना जाता है, ने संकल्प लिया है कि वह पूरी तरह से हिंदुत्व की मान्यताओं का पालन करेगा और अपने आगे के जीवन को सात्विक मार्ग पर बिताएगा।
