लाड़ली बहना योजना अब कोर्ट के कठघरे,सरकार से मांगी गई ये अहम जानकारी
Ladli Behna Yojana Latest News : मध्य प्रदेश की करोड़ों महिलाओं से जुड़ी लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह योजना की किस्त नहीं, बल्कि हाईकोर्ट में पहुंचा एक मामला है। ग्वालियर बेंच में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से योजना से जुड़े कई अहम आंकड़े और जानकारी मांगी है। सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब देना है।
मामले में मुख्य सवाल सिर्फ यह नहीं है कि महिलाओं को हर महीने कितनी राशि मिल रही है। कोर्ट ने योजना के लाभार्थियों और भुगतान का पूरा विवरण भी मांगा है। यानी कितनी महिलाओं को लाभ मिल रहा है, कितनी रकम दी जा रही है और योजना पर सरकारी खजाने का कितना वित्तीय भार पड़ रहा है, इन पहलुओं पर सरकार को जानकारी देनी होगी।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की सबसे बड़े पैमाने पर लागू प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता योजनाओं में शामिल है। सरकारी पोर्टल पर अभी 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 पात्र आवेदक दर्ज हैं। योजना का घोषित उद्देश्य महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ाना, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करना तथा परिवार के फैसलों में उनकी भूमिका मजबूत करना है।
किसने दायर की जनहित याचिका?
ग्वालियर की सुधा दुबे की ओर से लाड़ली बहना योजना की उपयोगिता, सरकारी खर्च और महिलाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट अनिल मिश्रा ने पक्ष रखा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया है। सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
याचिका में खर्च और योजना की उपयोगिता पर सवाल उठाए गए
याचिका में दावा किया गया है कि लाड़ली बहना योजना पर अब तक करीब 50 से 60 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें हर साल करीब 15 से 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का भी दावा किया गया है। याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बाद योजना महिलाओं के सशक्तिकरण के अपने उद्देश्य को किस हद तक पूरा कर रही है। इसके साथ प्रदेश पर बढ़ते कर्ज और सरकारी वित्त पर पड़ने वाले असर का मुद्दा भी उठाया गया है।
इन आंकड़ों को याचिकाकर्ता के दावे के रूप में देखना जरूरी है। उपलब्ध सरकारी और हालिया रिपोर्टेड आंकड़ों में योजना के तहत इससे अधिक कुल भुगतान का आंकड़ा भी सामने आया है। इसलिए अंतिम तस्वीर सरकार द्वारा अदालत में पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड से ज्यादा स्पष्ट होगी।
कितनी महिलाओं को मिल रहा है लाभ?
मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक लाड़ली बहना पोर्टल पर 1,25,22,542 पात्र आवेदक दर्ज हैं। यही आंकड़ा योजना के मौजूदा लाभार्थी आधार के पैमाने को समझने में मदद करता है। वर्तमान में पात्र महिला को सामान्य तौर पर ₹1,500 प्रति माह की सहायता मिल रही है। सितंबर 2026 में योजना की 40वीं नियमित किस्त के रूप में करीब 1,500 रुपये प्रति हितग्राही ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
करीब 1.25 करोड़ महिलाओं को 1,500 रुपये देने पर केवल नियमित मासिक भुगतान का गणित लगभग ₹1,875 करोड़ बैठता है। हालांकि वास्तविक सरकारी व्यय को केवल इस गुणा से तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि बजट में योजना के अन्य वित्तीय प्रावधान और विशेष भुगतान भी शामिल हो सकते हैं।
2026-27 में लाड़ली बहना के लिए कितना बजट?
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत ₹23,882.81 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है। यह आंकड़ा विभिन्न रिपोर्टों में राज्य के बजट प्रावधान के रूप में दर्ज है। योजना पर खर्च का आकार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मासिक सहायता सीधे बड़ी संख्या में महिलाओं के बैंक खातों में जाती है। सरकार के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार योजना का लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ उनके स्वास्थ्य, पोषण और परिवार के निर्णयों में भूमिका को मजबूत करना है। यानी हाईकोर्ट में मांगा गया डेटा केवल लाभार्थियों की संख्या तक सीमित नहीं है। इस रिकॉर्ड से योजना के वास्तविक वित्तीय संचालन और उसके दायरे की तस्वीर भी सामने आ सकती है।
अब तक कितना पैसा महिलाओं के खातों में पहुंचा?
यहां एक महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक जून 2023 से अगस्त 2026 तक 39 नियमित किस्तों के जरिए महिलाओं के खातों में ₹63,560.90 करोड़ तक की राशि ट्रांसफर किए जाने की जानकारी दी गई है।
इससे याचिका में किए गए 50 से 60 हजार करोड़ रुपये के खर्च वाले दावे और उपलब्ध हालिया भुगतान आंकड़ों के बीच अंतर दिखाई देता है। हालांकि दोनों आंकड़ों की गणना का आधार अलग हो सकता है जैसे केवल नियमित भुगतान, विशेष सहायता या किसी विशेष अवधि का खर्च। इसलिए अदालत में सरकार द्वारा प्रस्तुत विस्तृत रिकॉर्ड इस अंतर को समझने के लिए अहम रहेगा।
रक्षाबंधन के दौरान 2026 में 250 रुपये की अतिरिक्त सहायता दिए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। इससे कुछ महीनों में सामान्य 1,500 रुपये से अधिक राशि का भुगतान हुआ।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी जानकारी
मामले में अदालत की ओर से सरकार से योजना के लाभार्थियों और भुगतान से जुड़ा पूरा डेटा मांगे जाने की बात सामने आई है। इसमें कितनी महिलाओं को योजना का लाभ मिल रहा है और उन्हें कितनी राशि दी जा रही है, इसका विवरण शामिल है। सरकार को चार सप्ताह में जवाब देना है।
इसका मतलब यह नहीं है कि योजना बंद होने जा रही है या महिलाओं को मिलने वाली राशि तत्काल रोक दी गई है। उपलब्ध जानकारी में ऐसी कोई अदालत की अंतिम व्यवस्था सामने नहीं आई है।

