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प्रदेश में 21 साल बाद लौट रही सरकारी बस सेवा, 25 सितंबर को इंदौर से शुरू होगी 'सुगम परिवहन'

मध्य प्रदेश में 21 साल बाद नई यात्री बस व्यवस्था शुरू होगी। इंदौर से 23 रूटों पर शुरुआत के बाद डेटा आधारित नेटवर्क से शहर, जिले और दूसरे राज्य जोड़े जाएंगे।
MP government bus service

Mp Big News,MP government bus service : मध्य प्रदेश में बस से सफर करने वाले यात्रियों के लिए सितंबर का आखिरी हफ्ता बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है। करीब 21 साल बाद प्रदेश में सरकारी निगरानी वाली नई यात्री परिवहन व्यवस्था शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 सितंबर को इंदौर से ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। शुरुआत इंदौर के 23 रूटों से होगी और इसके बाद दूसरे शहरों व जिलों को चरणबद्ध तरीके से नेटवर्क में जोड़ा जाएगा।

खास बात यह है कि इसे पुराने मॉडल की तरह केवल सरकारी बसों का नेटवर्क नहीं बनाया जा रहा। नई व्यवस्था में सरकार रूट, किराया, संचालन के मानक और निगरानी की व्यवस्था संभालेगी, जबकि बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों की भागीदारी से PPP मॉडल पर किया जाएगा।

यानी सरकार की भूमिका केवल बस चलाने तक सीमित नहीं होगी। रूट कितना उपयोगी है, बस समय पर चल रही है या नहीं, यात्रियों की सुरक्षा कैसी है और ऑपरेटर तय मानकों का पालन कर रहा है या नहीं इन सब पर तकनीक आधारित निगरानी का जोर रहेगा।

सरकारी सेवा, लेकिन पूरी तरह सरकारी बसें नहीं

नई व्यवस्था पुरानी राज्य परिवहन सेवा जैसी नहीं है। इसमें बसें पूरी तरह सरकार की नहीं होंगी। परिवहन विभाग रूट के परमिट जारी करेगा और निजी बस संचालक पीपीपी (सरकारी-निजी भागीदारी) मॉडल पर एग्रीमेंट करके बसें चलाएंगे।

यानी बस निजी ऑपरेटर की होगी, लेकिन रूट, किराया, संचालन के मानक और निगरानी की व्यवस्था सरकार तय करेगी। यात्री के लिए इसका मतलब है कि सेवा पर सरकारी नियंत्रण बना रहेगा। अभी किराए की दरों की जानकारी सामने नहीं आई है।

बसों की श्रेणियां भी तय हैं। साधारण, सेमी-डीलक्स, डीलक्स, एसी डीलक्स और लग्जरी, पांच तरह की सेवाएं मिलेंगी। मिडी बसों में 23 से 34 सीटें होंगी, जबकि स्टैंडर्ड बसों में 35 से 70 सीटें रहेंगी।पहले राज्य परिवहन निगम मुख्य रूप से साधारण बसें चलाता था। वह सेवा वर्ष 2004-05 में बंद हो गई थी। तब से प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में यात्रियों को निजी बसों पर निर्भर रहना पड़ा।

55 जिलों का रूट सर्वे पूरा, 1,036 मार्ग चिन्हित

जानकारी के मुताबिक, परिवहन विभाग प्रदेश के 55 जिलों का रूट सर्वे कर चुका है। इस डेटा के आधार पर लगभग 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट मार्ग विकसित किए जाएंगे। कुल मिलाकर 1,036 रूट होते हैं।

इन रूटों से शहरों और जिलों के साथ-साथ प्रदेश की सीमा से लगे दूसरे राज्यों तक भी बस संपर्क बनाने की योजना है। सरकार ने 2030 तक प्रदेश के 75 प्रतिशत विकासखंडों को सुगम बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

बेड़ा बढ़ेगा: 2027 तक 1,100 बसों का लक्ष्य

फिलहाल प्रदेश में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें चल रही हैं। अगले छह महीनों में 486 नई पीएम ई-बसें और 34 नई इंटरसिटी बसें बेड़े में जोड़ने की योजना है। वर्ष 2027 तक बसों की कुल संख्या 1,100 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। बसों की पार्किंग, मरम्मत और रखरखाव के लिए मौजूदा सात डिपो के अलावा अगले छह महीनों में नौ नए अत्याधुनिक डिपो बनाए जाएंगे। हर डिपो की क्षमता 100 बसों की होगी।

एक राज्य स्तरीय कंपनी करेगी नियंत्रण

पूरी व्यवस्था के संचालन और नियंत्रण के लिए 'मप्र यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIIL)' नाम की राज्य स्तरीय कंपनी बनाई गई है। इसके अधीन सात क्षेत्रीय कंपनियां काम करेंगी, जो अपने इलाके में बस संचालन की निगरानी और तालमेल संभालेंगी।

परिवहन संचालन के लिए प्रदेश को इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर, इन सात क्षेत्रों में बांटा गया है। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में परिवहन सलाहकार समितियां भी बनी हैं। ये समितियां स्थानीय जरूरत के हिसाब से रूट और सुविधाओं पर सुझाव देंगी।

जीपीएस, सीसीटीवी और पैनिक बटन से निगरानी

सुरक्षा और निगरानी के लिए बसों में जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन लगाए जाएंगे। लाइव लोकेशन और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम से बसों पर नजर रखी जाएगी। आईटी आधारित इस सिस्टम से यह देखा जा सकेगा कि बस तय रूट पर चल रही है या नहीं, समय-सारणी का पालन हो रहा है या नहीं और संचालन में कोई गड़बड़ी तो नहीं। महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी और पैनिक बटन पर खास जोर दिया गया है।

नई बस सेवा एक नजर में

शुरुआत 25 सितंबर को इंदौर से होगी और पहले चरण में 23 रूट चलेंगे। कुल 1,036 रूट चिन्हित हैं, जिनमें 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट हैं। इस समय 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें चल रही हैं। 2027 तक 1,100 बसों का और 2030 तक 75 प्रतिशत विकासखंडों को जोड़ने का लक्ष्य है। संचालन सरकारी निगरानी और निजी ऑपरेटरों की भागीदारी वाले पीपीपी मॉडल पर होगा।