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आज सूरज सिर के ऊपर आएगा, परछाई गायब हो जाएगी - ये दुर्लभ घटना एक बार ही होती है साल में


Zero Shadow Day June 21 : 21 जून सिर्फ साल का सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात लेकर नहीं आता, बल्कि इस बार यह एक ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना का भी गवाह बनेगा जिसे देखकर लोग हैरान रह जाएंगे। दोपहर के समय कुछ स्थानों पर लोगों की परछाई लगभग गायब होती हुई दिखाई देगी। इस घटना को "जीरो शैडो डे" कहा जाता है। मध्य प्रदेश के 14 जिले इस अनोखी खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे। खास बात यह है कि इसे देखने के लिए किसी दूरबीन, कैमरे या विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होगी। खुले आसमान के नीचे खड़े होकर ही इस नजारे को देखा जा सकता है।

सूरज की उत्तरायण यात्रा का अंत

दरअसल, जून 21 वह तारीख है जब सूरज अपनी छह महीने की उत्तरायण यात्रा पूरी करता है। आप सोचते होंगे कि यह क्या बात है? तो समझिए। हर साल 21 दिसंबर को सूरज अपनी दक्षिणायन यात्रा शुरू करता है। फिर छह महीने बाद 21 जून को उत्तरायण यात्रा पूरी करके उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी सबसे ऊंची जगह पर पहुंच जाता है। इसी मुहूर्त पर सूरज पृथ्वी के ठीक 90 डिग्री के कोण पर आ जाता है। इसका मतलब है कि सूरज ठीक सिर के ऊपर होता है न आगे और न ही पीछे। जब रोशनी ऊपर से बिल्कुल सीधी पड़ती है, तो कोई परछाईं नहीं बनती। यही 'ज़ीरो शैडो डे' (Zero Shadow Day) का मुख्य अर्थ है।

मध्य प्रदेश के 14 जिले होंगे खास

यह घटना मध्य प्रदेश के लिए इतनी खास क्यों है? इसलिए कि ये 14 जिले कर्क रेखा के ठीक ऊपर स्थित हैं। कर्क रेखा वह काल्पनिक रेखा है जो पृथ्वी को दो हिस्सों में बांटती है। 21 जून को सूरज जब इसी कर्क रेखा के ठीक ऊपर आता है, तब इन 14 जिलों में यह दुर्लभ घटना घटती है। इन जिलों में जो भी शहर या गांव कर्क रेखा पर सीधे स्थित हैं, वहां के लोग इस खगोलीय खेल को सीधे अनुभव कर सकते हैं। यह घटना केवल उत्तर से दक्षिण की ओर धीरे-धीरे बढ़ती है। इसलिए इन 14 जिलों की अवस्थिति इतनी महत्वपूर्ण है।

साल का सबसे बड़ा और सबसे छोटी रात का दिन

21 जून को एक और बात खास होती है। यह साल का सबसे लंबा दिन होता है और सबसे छोटी रात। इसे अंग्रेजी में समर सॉल्सिटिस कहते हैं। हिंदी में इसे ग्रीष्म अयनांत भी कहा जाता है। इस दिन सूरज सुबह अपेक्षाकृत जल्दी निकलता है और शाम को देर से डूबता है। आप पूरे दिन सूरज का ज्यादा समय पाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध सूरज की ओर सबसे ज्यादा झुकी हुई अवस्था में होती है। इसी वजह से दिन बहुत लंबा होता है और सूरज ऊंचाई पर होता है।

किसी उपकरण की कोई जरूरत नहीं

सबसे अच्छी बात यह है कि इस घटना को देखने के लिए आपको महंगे दूरबीन या किसी और उपकरण की कोई जरूरत नहीं है। आप सीधे अपनी आंखों से इसे देख सकते हैं। बस सावधानी रखें। सूरज को सीधे न देखें क्योंकि इससे आंखों को नुकसान हो सकता है। किसी अंधेरी जगह पर खड़े होकर या किसी चीज से आंखों को बचाकर इस घटना को अनुभव कर सकते हैं। छोटे बच्चों को यह घटना देखकर बहुत मजा आएगा। स्कूलों में भी शिक्षकों को इसे एक बेहतरीन शिक्षण मुहूर्त मानना चाहिए। आखिरकार, विज्ञान सबसे अच्छा तब सीखा जाता है जब आप इसे सीधे अपनी आंखों से देखते हैं।

भारतीय संस्कृति में इसका महत्व

भारतीय पंचांग में 21 जून का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह ग्रीष्म संक्रांति का दिन होता है। इसी दिन से आयु घटने लगती है और रातें बढ़ने लगती हैं। प्राचीन काल में खगोलविदों ने इस घटना को ट्रैक करके ही अपने गणनाएं करते थे। आज भी यह हमें बताता है कि हमारे पूर्वज कितने विज्ञान-सचेत थे। 21 जून को जीरो शैडो डे केवल एक भौतिकीय घटना नहीं है। यह प्रकृति का एक शानदार प्रदर्शन है, जो हमें हर साल याद दिलाता है कि पृथ्वी और सूरज के बीच का रिश्ता कितना अद्भुत है।