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ई-रिक्शा में सफर कर रहे हैं? इंदौर में ऐसे चलता था चोरी का खेल, 18 साल तक पुलिस को देता रहा चकमा

MP Crime News : रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से यात्रियों को बनाते थे निशाना, 250 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगालने के बाद पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का किया खुलासा
MP Crime News

MP Crime News : अगर आप रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से शेयरिंग ई-रिक्शा में सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय चोरी गिरोह का खुलासा किया है, जिसने आम यात्रियों की लापरवाही को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया था। गिरोह के सदस्य खुद भी यात्री बनकर ई-रिक्शा में बैठते थे और सफर के दौरान चुपचाप बैग, पर्स, नकदी और सोने के जेवर गायब कर देते थे।

इंदौर पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं था। पिछले करीब 18 वर्षों से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के अलग-अलग शहरों में इसी तरीके से वारदातों को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस का दावा है कि गिरोह का मास्टरमाइंड 53 वर्षीय मेहबूब हमीद है, जो उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है।

कैसे करता था गिरोह वारदात?

पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य सबसे पहले रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ऐसे यात्रियों की तलाश करते थे जो अकेले सफर कर रहे हों या परिवार के साथ हों। खास तौर पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले लोग इनके आसान निशाने बनते थे।

इसके बाद सभी आरोपी एक ही शेयरिंग ई-रिक्शा में सवार हो जाते। सफर शुरू होते ही कुछ साथी यात्रियों से बातचीत शुरू कर देते, ताकि उनका ध्यान दूसरी ओर चला जाए। इसी दौरान मास्टरमाइंड मेहबूब बेहद सफाई से बैग या पर्स से नकदी और जेवर निकाल लेता था। 

मंजिल आने से पहले या अलग-अलग जगहों पर उतरकर सभी आरोपी फरार हो जाते थे। यात्रियों को अक्सर चोरी का पता तब चलता था, जब वे अपने गंतव्य पर पहुंचकर सामान चेक करते थे। तब तक आरोपी काफी दूर निकल चुके होते थे।

महाराष्ट्र से आए परिवार के साथ हुई बड़ी चोरी

इस गिरोह की हालिया वारदात ने पुलिस को तेजी से कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया। महाराष्ट्र से इंदौर अपनी बेटी को ससुराल छोड़ने आए 60 वर्षीय पवन सिंह रेलवे स्टेशन से शेयरिंग ई-रिक्शा में बैठे थे।

पुलिस के अनुसार, जब ई-रिक्शा स्कीम-78 पहुंचा तो परिवार को पता चला कि बेटी के बैग से करीब 12 तोला सोने के जेवर गायब हो चुके हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की।

आधे नंबर से खुल गया पूरा राज

इस मामले की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पुलिस को शुरुआत में सिर्फ ई-रिक्शा का आधा नंबर ही पता था। इसी छोटे से सुराग के आधार पर विजय नगर एसीपी पराग सैनी के निर्देशन में लसूड़िया थाना पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई।

पुलिस टीम ने 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। अलग-अलग स्थानों की रिकॉर्डिंग को जोड़ते हुए आरोपियों की गतिविधियों का पूरा क्रम तैयार किया गया। आखिरकार पुलिस ने गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।

जांच के दौरान आरोपियों के कब्जे से करीब 20 लाख रुपये मूल्य का चोरी का सामान भी बरामद किया गया। पुलिस अब बरामद आभूषणों और अन्य सामान की पहचान कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रही है।

18 साल में कई राज्यों में फैला नेटवर्क

पुलिस जांच के अनुसार मेहबूब हमीद का नेटवर्क सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं था। वह पिछले करीब 18 वर्षों से अलग-अलग राज्यों में इसी तरीके से चोरी करता रहा।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में करीब 40 चोरी के मामले दर्ज हैं। इनमें अकेले इंदौर में 11 प्रकरण शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियां अब दूसरे राज्यों की पुलिस से भी संपर्क कर रही हैं ताकि पुराने मामलों की जानकारी साझा की जा सके।

चोरी की कमाई से बनाया आलीशान बंगला

जांच में सामने आई एक और जानकारी ने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने चोरी से कमाए गए पैसों से उत्तर प्रदेश के बिजनौर में करीब ढाई करोड़ रुपये का आलीशान बंगला तैयार कर लिया।

जब जांच टीम वहां पहुंची तो बंगले की भव्यता देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। अब इस संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और आय के स्रोत की भी जांच की जा रही है।

परिवार की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामले की जांच यहीं खत्म नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में आरोपी के परिवार के कुछ सदस्यों की भूमिका भी सामने आई है। पत्नी समेत अन्य लोगों से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस को आशंका है कि आने वाले दिनों में कई पुराने मामलों का भी खुलासा हो सकता है।