आप कौन,मैं लोकायुक्त डीएसपी हूं,और ये मेरी टीम, सुन JE और AE के हाथ-पांव फूले
Mp Big News,Bhopal Lokayukta Action: बिजली का नया मीटर लगवाने के लिए सरकारी दफ्तर पहुंचे एक व्यक्ति से कथित तौर पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने जाल बिछाया और भोपाल के छोला स्थित विद्युत विभाग के कार्यालय में जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर को ₹15 हजार लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने मीटर लगाने और पुराने बिजली प्रकरण में कार्रवाई से बचाने के नाम पर ₹20 हजार की मांग की थी।
7 सितंबर को पहुंची शिकायत, दो दिन बाद ट्रैप
मामला भोपाल के छोला इलाके में स्थित विद्युत विभाग के कार्यालय का है। रिपोर्टों के मुताबिक शाहजहांनाबाद क्षेत्र के निवासी तारिक सिद्दीकी ने 7 सितंबर को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि वह अपने मकान में नया बिजली मीटर लगवाना चाहता था। इसके लिए वह संबंधित विद्युत कार्यालय पहुंचा। वहां उसे कथित तौर पर पुराने बिजली मामले और चालान की कार्रवाई का हवाला दिया गया।
आरोप है कि मीटर लगवाने और पुराने मामले में कार्रवाई से बचाने के लिए ₹20 हजार की रिश्वत मांगी गई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद ट्रैप की तैयारी की गई। 9 सितंबर को कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
आप कौन, अंदर कैसे आए?" सवाल पूछते ही उड़े होश
टीम को देखकर जूनियर इंजीनियर ने रौब दिखाते हुए पूछा, "आप कौन हैं, अंदर कैसे आए?" जवाब मिला "मैं लोकायुक्त डीएसपी हूं, और ये मेरी टीम है।" यह सुनते ही पूरे दफ्तर में सन्नाटा छा गया। कुछ ही पलों में माहौल बदल गया और अधिकारी के हाथ-पांव फूल गए।
₹20 हजार की मांग, ₹15 हजार लेते पकड़े गए
लोकायुक्त की योजना के तहत शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम लेकर विद्युत कार्यालय भेजा गया। रिपोर्टों के अनुसार जैसे ही ₹15 हजार की राशि दी गई, लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई कर दी। इस कार्रवाई में विद्युत विभाग के AE राजेंद्र वरवड़े और JE अमित कुमार उपाध्याय को आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
यहां एक अहम बात यह है कि कथित मांग ₹20 हजार की बताई गई, जबकि ट्रैप के दौरान ₹15 हजार की राशि ली गई। इसलिए मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में शिकायत, सत्यापन और ट्रैप से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण रहेंगे।
दफ्तर में अचानक पहुंची लोकायुक्त टीम
कार्रवाई के दौरान विद्युत कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों के बीच भी हलचल मच गई। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि टीम के पहुंचने पर JE ने अधिकारियों से उनकी पहचान और कार्यालय में आने का कारण पूछा। इसके बाद टीम ने खुद को लोकायुक्त की टीम बताया।
भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा रही है। कानूनी प्रक्रिया में ट्रैप कार्रवाई के बाद जांच, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। किसी आरोपी के खिलाफ आरोप साबित होना अदालत की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
