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क्या आपके शहर में भी गिरे ओले? जानिए मध्यप्रदेश में अगले 7 दिन कैसा रहेगा मौसम का हाल


IMD Bhopal Alert : मध्यप्रदेश में इस समय मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। कड़ाके की ठंड के बीच अब आसमान से बरसती बूंदों और गिरते ओलों ने लोगों की मुश्किलों को थोड़ा बढ़ा दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिसे स्थानीय भाषा में 'मावठा' कहा जाता है। मौसम विभाग की मानें तो यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई जिलों में न केवल बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है, बल्कि घना कोहरा भी जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। अगर आप भी घर से बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं या किसान हैं, तो मौसम का यह ताजा हाल आपके लिए जानना बेहद जरूरी है।

पश्चिमी विक्षोभ का असर और मावठे की दस्तक

मध्यप्रदेश में छाई इस अनिश्चितता के पीछे मुख्य कारण 'वेस्टर्न डिस्टरबेंस' यानी पश्चिमी विक्षोभ को माना जा रहा है। यह एक ऐसी मौसम प्रणाली है जो भूमध्य सागर से उठती है और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और बर्फबारी लेकर आती है। जब यह सिस्टम सक्रिय होता है, तो मध्यप्रदेश जैसे मैदानी राज्यों में अचानक बादलों का डेरा जम जाता है और बेमौसम बारिश शुरू हो जाती है। इस समय प्रदेश के ऊपर एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग सिस्टम काम कर रहे हैं, जिसके कारण मौसम में यह अस्थिरता बनी हुई है। आज यानी मंगलवार को प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में विशेष हलचल देखी जा रही है। ग्वालियर, राजगढ़, रीवा और विदिशा जैसे जिलों में सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि गुना, मुरैना, भिंड और आगर मालवा में भी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर और सतना में भी प्रकृति का ऐसा ही रूप देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ों या बिजली के खंभों से दूर रहें।

घने कोहरे की चादर में लिपटेगा मध्यप्रदेश

बारिश के साथ-साथ अब कोहरा भी प्रदेशवासियों की परीक्षा लेने के लिए तैयार है। मौसम केंद्र ने चेतावनी जारी की है कि अगले तीन दिनों तक प्रदेश के कई इलाकों में मध्यम से बहुत घना कोहरा छाया रहेगा। बुधवार यानी 4 फरवरी को ग्वालियर संभाग के साथ-साथ बुंदेलखंड के जिलों जैसे टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में दृश्यता काफी कम रह सकती है। कोहरे का सबसे ज्यादा असर सुबह के समय देखने को मिलेगा, जिससे सड़क यातायात और ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है। 5 फरवरी को भी स्थिति में कुछ खास सुधार की उम्मीद नहीं है। इस दिन रीवा, मऊगंज और सतना जैसे पूर्वी जिलों में भी कोहरे का दायरा बढ़ जाएगा। जब हवा में नमी ज्यादा होती है और तापमान गिरता है, तो कोहरा घना हो जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर उन हाईवे पर जहां मोड़ अधिक हैं। 6 फरवरी को भी ग्वालियर और चंबल संभाग के जिलों में धुंध का असर बना रहेगा, जिससे ठंड का अहसास और ज्यादा बढ़ सकता है।

5 फरवरी से फिर बदलेगा खेल

अभी चल रही बारिश और ओलावृष्टि से राहत मिलने ही वाली थी कि मौसम विभाग ने एक और नई चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि 5 फरवरी को उत्तर-पश्चिम भारत में एक और नया और ताकतवर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। इसका सीधा असर मध्यप्रदेश पर पड़ेगा। इस नए सिस्टम की वजह से 10 फरवरी तक प्रदेश में फिर से बारिश और ओले गिरने का दौर शुरू हो सकता है। यानी अगले एक हफ्ते तक मौसम का मिजाज नरम-गरम बना रहेगा और धूप के दर्शन दुर्लभ हो सकते हैं। यह नया सिस्टम विशेष रूप से उन इलाकों को प्रभावित करेगा जो राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं। सागर, दमोह, दतिया और निवाड़ी जैसे जिलों में इस दौरान तेज हवाओं के साथ बारिश होने की पूरी संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार बारिश की तीव्रता पिछले दौर के मुकाबले थोड़ी ज्यादा हो सकती है, जिससे तापमान में एक बार फिर गिरावट दर्ज की जाएगी और रातें अधिक सर्द हो जाएंगी।

किसानों के लिए मावठा: वरदान या अभिशाप?

ग्रामीण इलाकों में इस समय चिंता और खुशी दोनों का माहौल है। खेती-किसानी के लिहाज से देखा जाए तो यह बारिश 'सोने पे सुहागा' भी हो सकती है और मुसीबत भी। गेहूं की फसल के लिए हल्की बारिश यानी मावठा किसी टॉनिक से कम नहीं है। इससे फसल की बढ़त अच्छी होती है और दाना पुष्ट बनता है। लेकिन समस्या तब आती है जब बारिश के साथ ओले गिरने लगते हैं। ओलावृष्टि से सरसों और चने जैसी नाजुक फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ओले गिरने से पौधों की पत्तियां और फूल टूट कर गिर जाते हैं, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा, अगर खेतों में ज्यादा देर तक पानी जमा रहता है, तो फसलों की जड़ें गलने का डर भी बना रहता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अभी खेतों में सिंचाई रोक दें और कीटनाशकों का छिड़काव भी फिलहाल न करें। मौसम साफ होने का इंतजार करना ही इस समय सबसे बेहतर कदम होगा।