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खेत से होंगे बड़े फैसले: एमपी में शुरू होगी कृषि कैबिनेट, मार्च में पहली बैठक


MP Agriculture News : मध्य प्रदेश की खेती और किसानों से जुड़े फैसले अब सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि खेतों के बीच लिए जाएंगे। किसान कल्याण वर्ष के तहत राज्य सरकार एक नई व्यवस्था की शुरुआत करने जा रही है, जिसे “कृषि कैबिनेट” नाम दिया गया है। इसका मकसद साफ है किसानों की आमदनी बढ़ाना, खेती को आधुनिक बनाना और कृषि से जुड़े हर क्षेत्र को एक साथ आगे ले जाना।

मार्च में होगी पहली कृषि कैबिनेट बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने तय किया है कि कृषि कैबिनेट की पहली बैठक मार्च महीने में निमाड़ अंचल में आयोजित की जाएगी। संभावित स्थान खरगोन या खंडवा जिला हो सकता है। यह बैठक राजधानी से दूर, सीधे किसानों के इलाके में होगी ताकि जमीनी जरूरतों के आधार पर फैसले लिए जा सकें। इस बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग से जुड़े अहम प्रस्तावों पर चर्चा होगी। सरकार का मानना है कि खेती, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण को एक-दूसरे से जोड़कर ही किसानों की स्थायी आय सुनिश्चित की जा सकती है।

किसान कल्याण वर्ष 2026 का रोडमैप

डॉ. मोहन यादव ने किसान कल्याण वर्ष 2026 की रूपरेखा पर हुई बैठक में साफ कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार का मूल उद्देश्य है। यह लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाने से नहीं, बल्कि उत्पादकता, बाजार और तकनीक—तीनों को मजबूत करने से पूरा होगा। प्रदेश के एक करोड़ से अधिक किसानों को ध्यान में रखते हुए सरकार “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” की सोच के साथ 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रही है। इसके तहत खेती से जुड़े हर पहलू को एक साझा मॉडल में लाने की योजना है।

खेती के साथ बाजार और तकनीक पर जोर

सरकार कृषि उत्पादों के लिए मजबूत विपणन व्यवस्था खड़ी करने पर काम कर रही है ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके। इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और मूल्य संवर्धन के नए अवसर तैयार किए जाएंगे। उच्च उत्पादन देने वाले बीजों का वितरण, आधुनिक और डिजिटल कृषि यंत्रों का उपयोग, प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहन, कृषि स्टार्टअप और एफपीओ के जरिए रोजगार श्रृंखला का विस्तार ये सभी पहलें किसान कल्याण वर्ष का अहम हिस्सा होंगी। साथ ही जिला स्तर पर कृषि आधारित क्लस्टर विकसित कर खेती से जुड़े सभी क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।

ब्राज़ील जाएंगे मध्य प्रदेश के किसान

खेती और पशुपालन की आधुनिक तकनीकों को समझने के लिए प्रदेश के किसानों को ब्राज़ील भेजने की योजना भी बनाई गई है। वहां के अनुभवों से लौटकर किसान नई तकनीक अपनाएंगे, जिससे उत्पादन और आमदनी दोनों में सुधार की उम्मीद है।

निमाड़ अंचल बना उदाहरण

मुख्यमंत्री ने निमाड़ क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि खेती और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से वहां बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खेती से बढ़ती हरियाली का असर पर्यावरण पर भी पड़ा है और पूरे निमाड़ अंचल का तापमान पहले की तुलना में करीब चार डिग्री तक कम हुआ है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव किसानों की मेहनत का नतीजा है और यही वजह है कि आगे की कृषि नीतियों का केंद्र किसान और खेत ही होंगे।