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दमोह में अनोखा विरोध: जब सरकार को जगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों ने भैंस के आगे बजाई बीन


Damoh news update : मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल चौराहे पर सोमवार को एक बेहद अजीबोगरीब और दिलचस्प नज़ारा देखने को मिला। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए 'भैंस के आगे बीन बजाने' का मुहावरा हकीकत में बदल दिया। दमोह में तैनात ये कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन जब प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो उन्होंने सरकार की कथित संवेदनहीनता को दर्शाने के लिए इस अनूठे प्रदर्शन का रास्ता चुना। यह पूरा घटनाक्रम सोमवार दोपहर को तब शुरू हुआ जब कर्मचारी हाथों में पारंपरिक बीन और ढोल लेकर चौराहे पर एकत्र हुए। उनका उद्देश्य यह संदेश देना था कि उनकी समस्याओं के प्रति सरकार का रुख वैसा ही है जैसे एक कहावत के अनुसार, भैंस के आगे बीन बजाने का कोई असर नहीं होता। प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद कर्मचारी तब हैरान रह गए जब सड़क से गुजर रही भैंसें उनकी बीन की धुन पर रुकने के बजाय बेपरवाह होकर आगे बढ़ती रहीं। कर्मचारियों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गई क्योंकि उनका पूरा प्रदर्शन इसी बात पर टिका था कि बीन बजनी चाहिए और भैंस को रुकना चाहिए। भैंसों को लुभाने के लिए चारे का सहारा लिया। काफी देर तक की मशक्कत और चारे का लालच देने के बाद, आखिरकार दो भैंसें वहां रुकने के लिए तैयार हुईं। इसके बाद प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने उन भैंसों को माला पहनाई, उन्हें चारा खिलाया और फिर उनके सामने बीन बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इसकी तस्वीरें देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। प्रदेश के अन्य जिलों की तरह दमोह में भी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर बेमियादी हड़ताल कर रहे हैं। इन कर्मचारियों का मुख्य तर्क है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनकर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उनका दावा है कि सरकार द्वारा समय-समय पर किए गए वादों के बावजूद उनकी स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल अपनी आर्थिक और सेवा संबंधी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, जो उनके परिवार के भविष्य के लिए जरूरी है। इस हड़ताल के कारण जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी काफी असर पड़ा है, जिससे आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।