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नरसिंहपुर में लोन दिलाने के नाम पर ठगी का पर्दाफाश, दिल्ली से गिरफ्तार हुआ अंतरराज्यीय आरोपी


Narsinghpur Police : मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में पुलिस ने लोन दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दिल्ली से एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी बैंक और फाइनेंस कंपनियों के नाम पर पोस्टर लगाकर लोगों को जाल में फंसाता था। आरोपी लोगों को आसान लोन का लालच देकर उनसे अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे वसूलता था। पुलिस जांच में सामने आया कि यह आरोपी लंबे समय से देश के कई शहरों में इसी तरह की ठगी को अंजाम दे रहा था। वह कॉल सेंटर चलाकर लोगों को फोन करवाता था और फिर खुद बैंक अधिकारी बनकर उनसे बातचीत करता था। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब नरसिंहपुर के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

नरसिंहपुर निवासी ओंकार प्रसाद चौधरी ने 2 फरवरी 2026 को पुलिस के पास आवेदन देकर बताया कि उन्हें लोन दिलाने के नाम पर लगभग 93,900 रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया है। शिकायत मिलते ही पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के मार्गदर्शन और एसडीओपी मनोज गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी माध्यमों से जांच शुरू की। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाकर पूरे नेटवर्क को समझने की कोशिश की गई।

रेलवे स्टेशन के पोस्टर से शुरू हुई कहानी

जांच में सामने आया कि मार्च 2025 में नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन के आसपास की दीवारों पर एक फाइनेंस कंपनी के नाम से पोस्टर लगे थे। इन पोस्टरों में कम समय में आसान लोन दिलाने का दावा किया गया था और संपर्क के लिए एक मोबाइल नंबर दिया गया था। ओंकार प्रसाद चौधरी ने उसी नंबर पर फोन किया। कॉल एक महिला ने उठाई और उसने खुद को बैंक से जुड़ा कर्मचारी बताया। जब ओंकार प्रसाद ने पांच लाख रुपये के लोन के बारे में पूछा तो महिला ने उन्हें एक अन्य व्यक्ति से बात करने के लिए कहा, जिसने खुद को बैंक मैनेजर बताया।

दस्तावेज मंगवाकर शुरू हुई ठगी

फोन पर बातचीत करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम अमेर पवार बताया और कहा कि लोन प्रक्रिया शुरू करने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, समग्र आईडी और बैंक पासबुक की कॉपी भेजनी होगी। पीड़ित ने व्हाट्सएप के माध्यम से सभी दस्तावेज भेज दिए। इसके बाद आरोपी ने अलग-अलग कारण बताकर पैसे मांगना शुरू कर दिया।

अलग-अलग शुल्क के नाम पर वसूले पैसे

आरोपी ने बीमा शुल्क, डीडी चार्ज, जीएसटी, खाता परिवर्तन शुल्क और लोन प्रोसेसिंग फीस जैसे कई बहाने बनाकर पैसे मांगे। पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोन की राशि सीधे खाते में आ जाएगी। नरसिंहपुर में लोन दिलाने के नाम पर ठगी का पर्दाफाश, दिल्ली से गिरफ्तार हुआ अंतरराज्यीय आरोपी पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 93,900 रुपये भेज दिए। कुछ पैसे फोनपे के जरिए ट्रांसफर किए गए, जबकि कुछ रकम ऑनलाइन दुकानों से भुगतान के जरिए भेजी गई।

और पैसे मांगने पर हुआ शक

इतनी रकम लेने के बाद भी आरोपी ने लोन जारी नहीं किया और खाते के वेरिफिकेशन के नाम पर 5,500 रुपये और मांगे। जब पीड़ित ने पैसे देने से मना किया तो आरोपी ने उसे भोपाल बुला लिया। पीड़ित अपनी पत्नी के साथ भोपाल भी पहुंचा, लेकिन आरोपी उनसे मिलने के बजाय उन्हें अलग-अलग स्थानों पर बुलाकर भ्रमित करता रहा। काफी देर इंतजार करने के बाद पीड़ित को समझ में आया कि उसके साथ ठगी हुई है।

तकनीकी जांच से आरोपी की पहचान

पुलिस टीम ने मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जांच शुरू की। डिजिटल ट्रेल के आधार पर पता चला कि इस ठगी के पीछे दिल्ली निवासी देवकीनंदन कपूर नाम का व्यक्ति है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दिल्ली में एक कॉल सेंटर चला रहा था, जहां से लोगों को फोन कर लोन की जानकारी दी जाती थी।

दिल्ली में दबिश देकर गिरफ्तारी

पुख्ता जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां कराला इलाके के जैन नगर से आरोपी देवकीनंदन कपूर को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपी ने कई अहम खुलासे किए। उसने बताया कि वह अलग-अलग राज्यों में जाकर रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर फर्जी बैंक और फाइनेंस कंपनियों के पोस्टर चिपकाता था।

दूसरों के बैंक खातों का करता था इस्तेमाल

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ठगी से मिले पैसे अपने खाते में नहीं लेता था। वह दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। इसके लिए वह लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज ले लेता था और उन्हीं के नाम से खाते खुलवाकर उनका उपयोग पैसे लेने के लिए करता था। पुलिस ने ऐसे दस बैंक खातों को चिन्हित कर जब्त किया है।

कॉल सेंटर में युवती को भी किया गुमराह

आरोपी ने अपने कॉल सेंटर में बिहार की रहने वाली एक युवती को टेली-कॉलर के रूप में काम पर रखा था। उसे बताया गया था कि यह एक वैध फाइनेंस कंपनी का काम है। युवती लोगों को कॉल कर लोन के बारे में जानकारी देती थी। जब कोई व्यक्ति लोन लेने में रुचि दिखाता था तो आरोपी खुद उससे संपर्क कर शुल्क के नाम पर पैसे मांगता था। बाद में युवती को कई महीनों तक वेतन नहीं मिला, जिससे उसे शक हुआ और उसने नौकरी छोड़ दी।

आरोपी खुद को बताता था क्रिकेट खिलाड़ी

पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह खुद को पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ी बताता था। उसने दावा किया कि वह लगभग 16 वर्षों से दिल्ली की क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़कर क्रिकेट खेल रहा है और बच्चों को क्रिकेट की कोचिंग भी देता है।

पुलिस ने बरामद किए कई दस्तावेज

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के पास से 10 चेकबुक, 10 पासबुक, 7 एटीएम कार्ड, 2 आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है और जल्द ही और खुलासे हो सकते हैं। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि किसी भी लोन या वित्तीय सेवा के लिए केवल अधिकृत बैंक या भरोसेमंद संस्थानों से ही संपर्क करें और किसी भी अनजान नंबर या पोस्टर के आधार पर पैसे ट्रांसफर करने से पहले पूरी जांच जरूर करें।