नरसिंहपुर लूट कांड: होटल मैनेजर ने ही रची थी 1 करोड़ की साजिश, ऐसे हुआ पर्दाफाश
Narsinghpur Crime News : मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में बीती रात एक ऐसी वारदात हुई जिसने शहर के अमन-चैन को कुछ घंटों के लिए हिला कर रख दिया। नरसिंहपुर नगर के बीचों-बीच स्थित होटल कुसुम वैली में तड़के तीन बजे जब पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, तब कुछ नकाबपोश बदमाशों ने एक बड़ी लूट को अंजाम दिया। शुरुआती खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया क्योंकि मामला लगभग एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी से जुड़ा था। पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि लुटेरों ने बड़े ही शातिर तरीके से अपना चेहरा छिपा रखा था। लेकिन नरसिंहपुर पुलिस की मुस्तैदी और बारीकी से की गई जांच ने महज कुछ ही घंटों के भीतर इस पूरी साजिश की परतों को उधेड़ कर रख दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस व्यक्ति पर होटल की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, वही इस पूरी वारदात का सूत्रधार निकला।
जांच के दौरान रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक की गतिविधियों ने पुलिस का ध्यान अपनी ओर खींचा। जब उससे सामान्य पूछताछ की गई, तो उसके बयानों में काफी विरोधाभास नजर आया। वह बार-बार अपनी बातों से पलट रहा था और उसके चेहरे पर घबराहट साफ देखी जा सकती थी। पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों और मैनेजर के फोन रिकॉर्ड्स की जांच की, तो शक यकीन में बदल गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर चंद्रेश रजक टूट गया और उसने वह सच उगल दिया जिसने सबको हैरान कर दिया।
आधी रात का वो खौफनाक मंजर
घटना मंगलवार तड़के करीब 3:00 बजे की है। होटल कुसुम वैली के स्टाफ ने घबराए हुए स्वर में पुलिस को सूचना दी कि तीन से चार नकाबपोश लोग होटल के अंदर जबरन घुस आए हैं। इन बदमाशों ने वहां मौजूद कर्मचारियों को डराया-धमकाया और होटल के लॉकर या सुरक्षित स्थान पर रखी लगभग एक करोड़ रुपये की नकदी लेकर फरार हो गए। इतनी बड़ी रकम की लूट की खबर आग की तरह फैली। सूचना मिलते ही पुलिस विभाग के आला अधिकारी सक्रिय हो गए। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना खुद घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उनके साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया और एसडीओपी मनोज गुप्ता भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया ताकि आरोपियों को शहर छोड़ने से पहले ही दबोचा जा सके।पुलिस की पैनी नजर और मैनेजर का संदिग्ध व्यवहार
जांच टीम ने जब होटल के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली और वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, तो उन्हें कुछ बातें खटकने लगीं। पुलिस की अनुभवी नजरों ने भांप लिया था कि बाहर से आए लुटेरों के लिए होटल के भीतर नकदी के सटीक स्थान तक पहुंचना इतना आसान नहीं था।
जांच के दौरान रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक की गतिविधियों ने पुलिस का ध्यान अपनी ओर खींचा। जब उससे सामान्य पूछताछ की गई, तो उसके बयानों में काफी विरोधाभास नजर आया। वह बार-बार अपनी बातों से पलट रहा था और उसके चेहरे पर घबराहट साफ देखी जा सकती थी। पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों और मैनेजर के फोन रिकॉर्ड्स की जांच की, तो शक यकीन में बदल गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर चंद्रेश रजक टूट गया और उसने वह सच उगल दिया जिसने सबको हैरान कर दिया। 