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वन विभाग में रिश्वतखोरी का खेल: बाबू रंगे हाथों गिरफ्तार, छुट्टी के बदले मांगे थे पैसे


Ujjain Lokayukta action : मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त और प्रभावी कार्रवाई सामने आई है। उज्जैन लोकायुक्त पुलिस की टीम ने बुधवार को मंदसौर स्थित वन विभाग कार्यालय में अचानक दबिश दी और स्थापना शाखा में कार्यरत एक बाबू को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा। यह घटना तब प्रकाश में आई जब विभाग के ही एक कर्मचारी ने अपने हक की छुट्टी स्वीकृत कराने के लिए मांगी गई घूस की शिकायत लोकायुक्त से की। इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद पूरे दफ्तर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई अधिकारी अपने कक्ष से बाहर निकलते दिखाई दिए।

छुट्टी की फाइल से शुरू हुआ मामला

मामले की शुरुआत वन विभाग में कार्यरत वन रक्षक ललित मीणा की छुट्टी से जुड़ी प्रक्रिया से हुई। अधिकारियों के अनुसार, ललित मीणा ने 43 दिनों के अर्जित अवकाश (Earned Leave) के लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत आवेदन किया था। आवेदन IFMIS पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि स्थापना शाखा में पदस्थ बाबू कृष्ण प्रताप सिंह राठौर ने अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और संबंधित औपचारिकताएं पूरी कराने के नाम पर 3 से 4 हजार रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाने का निर्णय लिया और उज्जैन लोकायुक्त कार्यालय से संपर्क किया।

शिकायत के बाद शुरू हुई गोपनीय जांच

लोकायुक्त पुलिस को शिकायत मिलने के बाद मामले का प्राथमिक सत्यापन किया गया। जांच के दौरान शिकायत में प्रथम दृष्टया तथ्य पाए जाने पर विशेष टीम गठित की गई। इसके बाद अधिकारियों ने नियमानुसार ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की। भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां आमतौर पर ऐसे मामलों में शिकायत की पुष्टि होने के बाद ही ट्रैप ऑपरेशन चलाती हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कार्रवाई तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर हो।

जैसे ही पैसे लिए, सक्रिय हुई लोकायुक्त टीम

पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार शिकायतकर्ता वन रक्षक ललित मीणा आरोपी बाबू से मिलने पहुंचे। जैसे ही उन्होंने 3 हजार रुपये की राशि आरोपी को सौंपी, मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम सक्रिय हो गई। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कृष्ण प्रताप सिंह राठौर को हिरासत में ले लिया। जांच प्रक्रिया के दौरान आरोपी के हाथ धुलवाए गए, जिनमें रासायनिक परीक्षण सकारात्मक पाए गए। इसके बाद पूरी कार्रवाई का पंचनामा तैयार किया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं।

विभाग में मचा हड़कंप, कर्मचारियों में चर्चा

लोकायुक्त की अचानक कार्रवाई के बाद वन विभाग कार्यालय में हलचल का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्रवाई की सूचना मिलते ही कार्यालय में मौजूद कई अधिकारी और कर्मचारी घटनाक्रम को लेकर चर्चा करते नजर आए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में ट्रैप कार्रवाई केवल आरोपी व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र को एक स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी सेवाओं के बदले अवैध धन की मांग स्वीकार्य नहीं है।

लोकायुक्त अधिकारी ने क्या कहा?

उज्जैन लोकायुक्त के उप पुलिस अधीक्षक दिनेशचंद्र पटेल ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायतकर्ता की सूचना के आधार पर टीम ने जाल बिछाया था। आरोपी बाबू को वन विभाग कार्यालय परिसर में ही 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।