सरकारी अस्पताल या वसूली का अड्डा? नरसिंहपुर जिला अस्पताल पर ₹5000 मांगने के आरोप
Narsinghpur Hospital News : नरसिंहपुर के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकार भले ही करोड़ों रुपये का बजट स्वास्थ्य योजनाओं के लिए पानी की तरह बहा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यहाँ प्रसूता महिलाओं और उनके परिवारों से ऑपरेशन के नाम पर खुलेआम पांच हजार रुपये वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं। शर्मनाक बात यह है कि अगर गरीब मरीज पैसे नहीं दे पाते, तो उन्हें दूसरे अस्पताल जाने का डर दिखाकर मानसिक रूप से तोड़ दिया जाता है। यह सेवा है या फिर वसूली का धंधा, यह एक बड़ा सवाल है।
गरीब परिवारों के सामने उस समय सबसे बड़ी चिंता मां और बच्चे की सुरक्षा होती है। ऐसे में, अगर ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी बड़ा सवाल होगा।
ऑपरेशन से पहले मांगे जाते हैं ₹5000
कुछ पीड़ित परिजनों ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर दावा किया है कि प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं से ऑपरेशन से पहले कथित तौर पर ₹5000 की मांग की जाती है। उनका आरोप है कि यदि रकम देने से इनकार किया जाए तो मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने जैसी बातें कहकर दबाव बनाया जाता है।
गरीब परिवारों के सामने उस समय सबसे बड़ी चिंता मां और बच्चे की सुरक्षा होती है। ऐसे में, अगर ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी बड़ा सवाल होगा। शिकायत करने वालों को डराने के भी आरोप
कुछ परिजनों का कहना है कि आवाज उठाने वालों को कथित रूप से डराने और शिकायत न करने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन दावों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। यही वजह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है।मुफ्त इलाज की योजनाएं हैं, फिर पैसों की मांग क्यों?
सरकार की कई स्वास्थ्य योजनाओं के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ऐसे में यदि मरीजों से पैसे मांगे जाने के आरोप लग रहे हैं तो यह जांच का विषय बनता है। नियम साफ हैं, इसलिए सवाल भी सीधा है अगर सेवाएं मुफ्त हैं तो रकम किस बात की?दलाली के आरोप भी चर्चा में
स्थानीय लोगों ने यह आरोप भी लगाया है कि अस्पताल परिसर में सक्रिय कुछ आशा/ऊषा कार्यकर्ता मरीजों की भर्ती और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर कथित तौर पर दलाली करते हैं।प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर, CMHO और सिविल सर्जन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी अस्पतालों पर गरीब मरीजों का भरोसा बना रहे।जांच टीम गठित
फिलहाल इस मामले में शिकायत के बाद सिविल सर्जन राजकुमार चौधरी ने एक जांच टीम गठित कर दी है जांच टीम जल्द ही पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट सौंपेगी
