Local News : मानसून का नाम सुनते ही जहां मन में
ठंडी हवाओं और रिमझिम बारिश की कल्पना आती है, वहीं कुछ लोगों के लिए यह मौसम डर भी लेकर आता है। पुराने और जर्जर घरों में रहने वाले लोग अक्सर बारिश के दौरान छत गिरने या दीवारों के ढहने की चिंता में डूबे रहते हैं। नरसिंहपुर जिले में इस बार प्रशासन ने मानसून के आने से पहले ही अपनी कमर कस ली है। जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन विभाग ने मिलकर जन सुरक्षा के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ा है, ताकि बारिश में कोई बड़ा हादसा न हो। प्रशासन का कहना है कि चिन्हित भवनों के मालिकों और संबंधित विभागों को नियमानुसार नोटिस जारी कर दिए गए हैं। साथ ही लोगों को सतर्क करने के लिए सभी खतरनाक भवनों पर चेतावनी बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।
जिले में 88 जर्जर भवन मिले, 14 शासकीय और 74 निजी
सर्वेक्षण के अनुसार जिले में कुल 88 भवन ऐसे पाए गए हैं जिन्हें जर्जर श्रेणी में रखा गया है। इनमें 14 शासकीय भवन हैं, जबकि 74 निजी स्वामित्व के भवन शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित भवन स्वामियों को समय-सीमा के भीतर आवश्यक मरम्मत या अन्य सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होती है तो जनहित और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
किस नगरीय निकाय में कितने जर्जर भवन मिले?
सर्वेक्षण के दौरान सबसे अधिक 24 जर्जर भवन नरसिंहपुर नगर में चिन्हित किए गए। इनमें 5 शासकीय और 19 निजी भवन शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार यहां सभी चिन्हित भवनों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जा चुके हैं। गाडरवारा में कुल 16 जर्जर भवन मिले हैं। इनमें 1 शासकीय और 15 निजी भवन शामिल हैं। करेली में 18 भवनों को जर्जर घोषित किया गया है, जिनमें 2 शासकीय और 16 निजी भवन हैं। गोटेगांव में 21 जर्जर भवन मिले हैं। खास बात यह रही कि यहां कोई भी शासकीय भवन जर्जर नहीं पाया गया। सभी 21 भवन निजी स्वामित्व के हैं। तेंदुखेड़ा में कुल 5 जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 4 शासकीय और 1 निजी भवन शामिल है। चीचली में 4 भवन जर्जर पाए गए। इनमें 2 शासकीय और 2 निजी भवन हैं। वहीं, साईंखेड़ा और सालीचौका में किए गए सर्वेक्षण के दौरान कोई भी जर्जर भवन नहीं मिला, जो स्थानीय स्तर पर राहत की खबर मानी जा सकती है।
प्रशासन ने नागरिकों से की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे चिन्हित जर्जर भवनों के आसपास अनावश्यक रूप से न जाएं और लगाए गए चेतावनी बोर्डों तथा सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। भवन स्वामियों से भी कहा गया है कि वे नोटिस में निर्धारित समय के भीतर मरम्मत या अन्य आवश्यक सुधार कार्य पूरा करें। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो नियमों के अनुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।