मेट्रीमोनियल साइट पर NRI बनकर ठगी, मंदसौर पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का किया पर्दाफाश
Online Marriage Scam : मंदसौर में मेट्रीमोनियल वेबसाइट पर शादी का भरोसा देकर ठगी करने वाले एक कथित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह के सदस्य खुद को NRI बताकर लोगों से संपर्क करते थे और फिर विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने की कहानी बनाकर उनसे पैसे ऐंठते थे। मंदसौर पुलिस के मुताबिक, इस मामले में मुख्य सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
इस पूरे मामले की शुरुआत शामगढ़ क्षेत्र की एक महिला की शिकायत से हुई। महिला ने मेट्रीमोनियल वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल बनाया था। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उससे संपर्क किया और खुद को NRI बताते हुए शादी की बात आगे बढ़ाई। बातचीत को भरोसेमंद बनाने के लिए कथित तौर पर नकली फोटो और परिजनों के नाम से व्हाट्सऐप पर संपर्क किया गया।
कुछ समय बाद आरोपी ने विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने की बात कही। फिर कथित गिफ्ट के कस्टम विभाग में फंसने की कहानी बताकर कस्टम ड्यूटी, प्रोसेसिंग फीस और दूसरे शुल्क के नाम पर रकम मांगी गई। इस तरह अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करवाकर महिला से करीब 7.50 लाख रुपये की ठगी की गई।
शिकायत पुलिस तक पहुंची तो जांच सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं रही। पुलिस के अनुसार, तकनीकी जांच और बैंक खातों की कड़ियां खंगालने पर एक बड़े नेटवर्क का पता चला, जिससे देश के अलग-अलग राज्यों में की गई 11 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की जानकारी सामने आई है।
शिकायत के बाद शुरू हुई डेढ़ से दो महीने की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विनोद कुमार मीना ने विशेष टीम गठित की। शामगढ़ थाना प्रभारी कपिल सौराष्ट्री और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने करीब डेढ़ से दो महीने तक तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल नंबरों और बैंक खातों से जुड़ी कड़ियों का विश्लेषण किया। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को आरोपियों के अलग-अलग राज्यों में मौजूद होने की जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस टीम ने करीब 15 दिनों तक अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई की। राजस्थान के जयपुर में दबिश देकर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर गिरोह के एक अन्य सदस्य को बिहार के अरवल जिले से भी पकड़ा गया। इस कार्रवाई में कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस अब उनसे गिरोह के दूसरे सदस्यों और अन्य साइबर अपराधों से जुड़े पहलुओं के बारे में पूछताछ कर रही है।
एक शिकायत से सामने आया बड़ा नेटवर्क
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि यह कथित गिरोह एक ही जगह से काम नहीं करता था। इसके सदस्य अलग-अलग राज्यों में रहकर अपनी भूमिका निभाते थे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह में अलग-अलग काम के लिए अलग टीमें बनाई गई थीं। एक टीम का काम म्यूल बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम उपलब्ध कराना था। इसके लिए आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली और बिहार समेत अलग-अलग जगहों से सिम उपलब्ध कराए जाते थे। कुछ बैंक खाते और सिम भोपाल से भी लिए जाने की बात जांच में सामने आई है।
दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में अस्थायी ठिकाने बनाकर ठगी से मिली रकम निकालने और उसे दूसरे बैंक खातों में जमा करने का काम करती थी। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य व्यक्ति अलग-अलग खातों में जमा रकम की जानकारी देता था और पैसे निकालने के लिए निर्देश करता था।
बैंक खाते फ्रीज होते ही बदल देते थे पूरा सेटअप
जांच में पुलिस को गिरोह के काम करने का एक और तरीका पता चला। कथित तौर पर जब किसी बैंक खाते को फ्रीज किया जाता था, तो आरोपी उससे जुड़े मोबाइल फोन, सिम, पासबुक और एटीएम कार्ड को नष्ट कर देते थे।
इसके बाद अगली ठगी के लिए नए मोबाइल फोन, नए सिम और नए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। इस तरीके से पुराने सेटअप को छोड़कर नया इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती थी।
यानी ठगी के लिए केवल फर्जी पहचान का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था, बल्कि बैंक खातों और मोबाइल कनेक्शन को भी अलग-अलग स्तर पर बदलने का नेटवर्क बनाया गया था।
मेट्रीमोनियल साइट से शुरू होता था भरोसे का खेल
इस मामले का एक अहम पहलू मेट्रीमोनियल वेबसाइट के जरिए संपर्क स्थापित करना है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने महिला को पहले शादी का भरोसा दिलाया और बातचीत को आगे बढ़ाया।
खुद को NRI बताने के बाद कथित तौर पर नकली फोटो और परिजनों के नाम से व्हाट्सऐप पर बातचीत की गई। इससे सामने वाले व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि संपर्क करने वाला व्यक्ति और उसके परिवार की पहचान वास्तविक है।
इसके बाद विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने की बात सामने आई। जब कथित गिफ्ट कस्टम विभाग में फंसने की बात कही गई, तो कस्टम ड्यूटी और दूसरे शुल्क के नाम पर रकम मांगी गई। यहीं से ठगी की रकम बढ़ती गई और महिला से करीब 7.50 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराए गए।
पुलिस ने 22 मोबाइल और 30 सिम किए बरामद
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने बड़ी संख्या में डिजिटल और बैंकिंग सामग्री बरामद की है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से:
22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन
30 मोबाइल सिम
5 एटीएम कार्ड
बरामद किए गए हैं। इसके अलावा अलग-अलग बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की रकम को पुलिस ने लिक्विड फ्रिज कराया है।
यह कार्रवाई जांच के लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंक खाते, मोबाइल नंबर, सिम और एटीएम कार्ड इस तरह की साइबर ठगी की रकम के लेन-देन और नेटवर्क की कड़ियों को समझने में मदद कर सकते हैं।
1 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी की जानकारी
मंदसौर पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में इस नेटवर्क से देश के अलग-अलग राज्यों में 11 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की जानकारी सामने आई है।
पुलिस का कहना है कि अब तक 100 से अधिक साइबर घटनाओं को अंजाम दिए जाने की जानकारी मिली है। साथ ही, गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े होने की आशंका को लेकर भी जांच जारी है।
हालांकि, इन पहलुओं की विस्तृत जानकारी पुलिस की आगे की जांच और पूछताछ के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी जुटा रही है।
