एमपी में फिर एक्टिव हुआ मानसून, बंगाल की खाड़ी के नए सिस्टम से 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
Madhya Pradesh Weather News ; मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। पिछले कुछ दिनों की अपेक्षाकृत धीमी बारिश के बाद अब मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र है, जिसका असर अब पूरे मध्य भारत में महसूस किया जा रहा है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 28 से 30 जुलाई के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। इसी को देखते हुए आठ जिलों के लिए भारी बारिश का विशेष अलर्ट जारी किया गया है, जबकि भोपाल समेत 50 से अधिक जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और बिजली गिरने के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।
बंगाल की खाड़ी का नया सिस्टम क्यों बना बारिश की बड़ी वजह?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। इसके साथ मानसून ट्रफ भी मध्य प्रदेश के ऊपर सक्रिय बनी हुई है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के संयुक्त असर से प्रदेश में नमी बढ़ गई है, जिससे बादल तेजी से विकसित हो रहे हैं और बारिश की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 48 से 72 घंटे मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि यह सिस्टम अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखता है, तो प्रदेश के और भी जिलों में अच्छी बारिश दर्ज हो सकती है।
इन 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने सतना, कटनी, उमरिया, मंडला, डिंडौरी, सिवनी, रायसेन और बैतूल जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में चार इंच या उससे अधिक वर्षा रिकॉर्ड होने की संभावना है।
लगातार बारिश के कारण छोटी नदियों, नालों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा टालने और मौसम से जुड़ी आधिकारिक चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की अपील की है।
भोपाल समेत 50 से ज्यादा जिलों में बदला मौसम
राजधानी भोपाल में सुबह से बादलों की आवाजाही बनी हुई है और रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इसी तरह जबलपुर, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और शहडोल संभाग के कई जिलों में भी अच्छी बारिश के संकेत हैं।
मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और कुछ स्थानों पर वज्रपात की आशंका जताई है। प्रशासन ने भी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं।
इस सीजन में अब तक कितनी हुई बारिश?
बारिश का यह नया दौर राहत जरूर लेकर आया है, लेकिन पूरे मानसून सीजन की तस्वीर अभी भी संतोषजनक नहीं कही जा सकती।
उपलब्ध मौसम आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक औसतन करीब 13.2 इंच वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 17 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में करीब 20 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में लगभग 15 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। यही वजह है कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में अब तक सामान्य वर्षा का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है। भोपाल, इंदौर, देवास, सीहोर, राजगढ़, मंदसौर, भिंड और बुरहानपुर जैसे जिलों में सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज की गई है। इससे कई जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ा है, जो सिंचाई और पेयजल व्यवस्था के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
जुलाई के आखिरी सप्ताह में मानसून रहेगा सक्रिय
मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय बना रह सकता है। यदि वर्तमान सिस्टम कमजोर नहीं पड़ता, तो बारिश की कमी काफी हद तक पूरी होने की संभावना है। इससे खेती, जलाशयों और भूजल स्तर को भी फायदा मिलेगा।
फिलहाल इतना तय है कि आने वाले दो-तीन दिन मध्य प्रदेश के मौसम की दिशा तय करेंगे। इसलिए मौसम का ताजा अपडेट देखते रहें और किसी भी अफवाह के बजाय केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
