नरसिंहपुर में अनोखी चौपाल: जब अपनी गाड़ियां छोड़ एक ही बस में बैठकर गांव पहुंचे जिले के सारे बड़े अफसर
Narsinghpur District News Hindi : मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में प्रशासनिक कामकाज का एक बेहद सकारात्मक और अनोखा रूप देखने को मिला है। आमतौर पर देखा जाता है कि जब भी कोई बड़ा सरकारी कार्यक्रम होता है, तो अफसरों की गाड़ियों का लंबा काफिला निकलता है। लेकिन बुधवार को विकासखंड करेली के ग्राम गोकला में आयोजित जिला स्तरीय जन चौपाल में नजारा बिल्कुल बदला हुआ था। कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह और जिला पंचायत सीईओ श्री गजेंद्र सिंह नागेश सहित जिले के तमाम आला अधिकारी अलग-अलग सरकारी गाड़ियों के बजाय एक ही बस में सवार होकर गांव पहुंचे। प्रशासन की इस पहल ने न सिर्फ सरकारी ईंधन की बचत की, बल्कि टीम वर्क और सामूहिक सहभागिता का एक बेहतरीन संदेश भी जनता के बीच दिया। इस जन चौपाल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने से बचाना और सरकारी योजनाओं को सीधे उन तक पहुंचाना था। गांव के सामुदायिक स्थल पर सजी इस चौपाल में कलेक्टर ने सीधे जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी शिकायतों को बेहद गंभीरता से सुना। कार्यक्रम के दौरान न केवल तात्कालिक समस्याओं का निपटारा किया गया, बल्कि विभिन्न सरकारी विभागों ने अपने स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को कल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। इस विशेष चौपाल में ग्रामीणों की सहूलियत के लिए विभिन्न विभागों की तरफ से काउंटर लगाए गए थे। ग्रामीण इलाकों में पहचान पत्रों और दस्तावेजों में गड़बड़ी एक बड़ी समस्या होती है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने इस चौपाल में विशेष प्रबंध किए थे। शिविर के दौरान तकनीकी टीम ने मौके पर ही ग्रामीणों के दस्तावेजों की कमियों को सुधारा। इसके साथ ही नए आवेदकों के पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी की गई ताकि उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने में कोई परेशानी न आए।
शिक्षा और समाज कल्याण से जुड़े विभागों ने भी चौपाल में सक्रिय भूमिका निभाई। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गांव के छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों से मुलाकात की। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में बताया, जिससे गांव के बच्चों को आगे की पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा मिली। करेली क्षेत्र में खेती-किसानी का रकबा काफी बड़ा है, इसलिए कृषि विभाग की टीम ने चौपाल में किसानों के साथ एक विशेष सत्र आयोजित किया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए मूंग, उड़द और अन्य नकदी फसलों के वैज्ञानिक उत्पादन की तकनीक समझाई। इसके साथ ही, वर्तमान समय की एक बड़ी समस्या 'नरवाई' (फसल के अवशेष) को जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया गया। अधिकारियों ने किसानों को बताया कि नरवाई जलाने से खेत की मिट्टी के मित्र कीट मर जाते हैं और भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है। इसके समाधान के रूप में 'सुपर सीउर मशीन' के उपयोग की जानकारी दी गई। यह मशीन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करती है, जिससे अगली फसल की बुआई भी आसान हो जाती है। गोकला और आसपास के ग्रामीणों ने अपनी रोजमर्रा की दिक्कतों को भी कलेक्टर के सामने रखा। ग्रामीणों ने गांव के भीतर और संपर्क मार्गों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए मुख्य रूप से चार सड़कों के निर्माण की मांग की। इनमें गोकला से गुरसी तक, हैंडपंप कॉलोनी से खेल मैदान तक, खेल मैदान से शिव मंदिर तक और पंप हाउस से टोरिया तक की सड़कें शामिल हैं। ग्रामीणों की इस जायज मांग को सुनते ही कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को इन सड़कों का भौतिक सत्यापन करने और निर्माण कार्य के लिए जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षा और समाज कल्याण से जुड़े विभागों ने भी चौपाल में सक्रिय भूमिका निभाई। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गांव के छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों से मुलाकात की। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में बताया, जिससे गांव के बच्चों को आगे की पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा मिली। करेली क्षेत्र में खेती-किसानी का रकबा काफी बड़ा है, इसलिए कृषि विभाग की टीम ने चौपाल में किसानों के साथ एक विशेष सत्र आयोजित किया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए मूंग, उड़द और अन्य नकदी फसलों के वैज्ञानिक उत्पादन की तकनीक समझाई। इसके साथ ही, वर्तमान समय की एक बड़ी समस्या 'नरवाई' (फसल के अवशेष) को जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया गया। अधिकारियों ने किसानों को बताया कि नरवाई जलाने से खेत की मिट्टी के मित्र कीट मर जाते हैं और भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है। इसके समाधान के रूप में 'सुपर सीउर मशीन' के उपयोग की जानकारी दी गई। यह मशीन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करती है, जिससे अगली फसल की बुआई भी आसान हो जाती है। गोकला और आसपास के ग्रामीणों ने अपनी रोजमर्रा की दिक्कतों को भी कलेक्टर के सामने रखा। ग्रामीणों ने गांव के भीतर और संपर्क मार्गों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए मुख्य रूप से चार सड़कों के निर्माण की मांग की। इनमें गोकला से गुरसी तक, हैंडपंप कॉलोनी से खेल मैदान तक, खेल मैदान से शिव मंदिर तक और पंप हाउस से टोरिया तक की सड़कें शामिल हैं। ग्रामीणों की इस जायज मांग को सुनते ही कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को इन सड़कों का भौतिक सत्यापन करने और निर्माण कार्य के लिए जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।