Narsinghpur News Today : नरसिंहपुर जिले का
सरसला गांव इस मंगलवार को एक अलग ही ऊर्जा से भरा हुआ था। जिले की कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने यहां एक विशेष ग्राम चौपाल का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल ग्रामीणों की समस्याओं को सुनना था, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देकर सीधे लाभ दिलाना भी था। सुबह से ही गांव में सरकारी विभागों के स्टॉल सज गए थे, जहां ग्रामीणों ने विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जाना। इस पहल में जिला पंचायत के सीईओ श्री गजेन्द्र सिंह नागेश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री संदीप भूरिया सहित कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।
संवाद और समाधान की अनूठी पहल
कलेक्टर श्रीमती सिंह ने स्पष्ट किया कि चौपाल का उद्देश्य सिर्फ औपचारिकता निभाना नहीं है। उन्होंने कहा कि अक्सर ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए शहर के चक्कर काटने पड़ते हैं। अब हमारी कोशिश यह है कि प्रशासन खुद गांव तक पहुंचे और ग्रामीणों को उनके घर के पास ही समाधान मिले।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों पर गहरी चोट की। इस दौरान ग्रामीणों से अपील की गई कि वे न केवल खुद नशा छोड़ें, बल्कि समाज को भी नशामुक्त बनाने में अपना योगदान दें।
स्वास्थ्य से लेकर तकनीक तक: शिविरों का लाभ
चौपाल में एक नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई गईं। विशेष रूप से आधार कार्ड शिविर ने ग्रामीणों को बड़ी राहत दी। जो लोग अपने कार्ड में सुधार करवाना चाहते थे या नए कार्ड के लिए परेशान थे, उन्होंने शिविर का पूरा लाभ लिया। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए शिविर में नागरिकों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। कलेक्टर ने विशेष रूप से टीबी जैसी बीमारियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि ऐसे मरीजों को चिन्हित कर तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। डिजिटल युग के खतरों को देखते हुए चौपाल में साइबर सुरक्षा पर भी जोर दिया गया। प्रशासन ने ग्रामीणों को जागरूक किया कि किसी भी तरह के डिजिटल फ्रॉड या ऑनलाइन ठगी के शिकार होने पर वे तुरंत टोल फ्री नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज करें। यह जानकारी ग्रामीणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि आजकल साइबर अपराध गांव-देहात तक पहुंच रहे हैं।
श्रमिक कल्याण और कृषि पर विशेष ध्यान
कलेक्टर श्रीमती सिंह ने श्रम विभाग की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रत्येक श्रमिक को संबल योजना में अपना पंजीयन जरूर कराना चाहिए। उन्होंने श्रमिकों को श्रमिक योगी मानधन योजना के बारे में समझाते हुए बताया कि 18 से 40 वर्ष की आयु के श्रमिक इसमें जुड़ सकते हैं। साठ वर्ष की उम्र के बाद उन्हें हर महीने तीन हजार रुपये की पेंशन मिलेगी, जो उनके बुढ़ापे का सहारा बनेगी। किसानों के साथ संवाद करते हुए कलेक्टर ने प्राकृतिक खेती पर जोर दिया। उन्होंने समझाया कि रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खेती अपनाना न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति भी लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही, फार्मर रजिस्ट्री और खाद्यान्न वितरण जैसी व्यवस्थाओं की भी उन्होंने समीक्षा की। उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना जैसी महिला कल्याणकारी योजनाओं के प्रति भी ग्रामीणों को जागरूक किया।
सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण का संदेश
कार्यक्रम का समापन एक मजबूत सामाजिक संदेश के साथ हुआ। कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत ने पंचायत भवन में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा पर चर्चा करते हुए उन्होंने दो-पहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने और चार-पहिया चालकों को सीट बेल्ट का उपयोग करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने चेतावनी दी कि नशे की हालत में वाहन चलाना न केवल स्वयं के लिए, बल्कि दूसरों के लिए भी जानलेवा हो सकता है। इस तरह के आयोजनों से न केवल ग्रामीणों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ता है, बल्कि विकास की योजनाएं अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचना आसान हो जाता है। सरसला की यह चौपाल एक उदाहरण है कि जब अधिकारी और जनता एक मंच पर आते हैं, तो बदलाव की नींव उसी दिन पड़ जाती है।