नरसिंहपुर: 'प्रशासन तय नहीं करेगा कौन शंकराचार्य है', अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान पर भड़के द्वारका पीठाधीश्वर
Avimukteshwaranand Controversy : नरसिंहपुर उत्तर प्रदेश के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान से रोकने और उनके पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी संत की पदवी और परंपरा का फैसला प्रशासनिक अधिकारी नहीं कर सकते।
मुक्तानंद संस्कृत पाठशाला में गरजे शंकराचार्य
शनिवार को नरसिंहपुर के श्री मुक्तानंद संस्कृत पाठशाला के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके अभिषेक की प्रक्रिया पूरी तरह विधिवत और शास्त्रसम्मत थी। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। शंकराचार्य ने प्रशासन के हस्तक्षेप को धर्म के आंतरिक मामलों में दखल बताया।अभिषेक की वैधता पर दिया बड़ा प्रमाण
अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए सदानंद सरस्वती ने कहा कि उनका अभिषेक श्रृंगेरी में ही संपन्न हुआ था। उन्होंने साक्ष्य देते हुए बताया:- श्रृंगेरी के शंकराचार्य भारतीय तीर्थ जी महाराज ने स्वयं उनका अभिषेक किया था।
- उनके उत्तराधिकारी विधु शेखर ने भी इस प्रक्रिया को पूर्ण किया।
- "हम स्वयं उस अभिषेक समारोह में उपस्थित थे," शंकराचार्य ने जोर देकर कहा।
"हमारी परंपरा गुरु-शिष्य की है। हमारे गुरु जी ने केवल दो ही ब्रह्मचारियों को संन्यास दिया—एक मुझे और एक अविमुक्तेश्वरानंद को। जब गुरु परंपरा स्पष्ट है, तो अब किसी और प्रमाण की क्या आवश्यकता है? प्रशासन को अपनी सीमाएं नहीं लांघनी चाहिए।" — शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, द्वारका शारदा पीठ
