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मछली पकड़ने गए थे साथ, लौटकर आईं लाशें; बालाघाट हादसे में तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़


Balaghat News Today : मौसम कब अपना मिजाज बदल दे और कब एक आम दिन बड़े हादसे में बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। शुक्रवार दोपहर को अचानक बदले मौसम और गरज-चमक के साथ हुई तेज बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना में तीन युवकों की जान चली गई, जबकि छह अन्य लोग बुरी तरह झुलस गए हैं। यह पूरी घटना बैहर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिरवा हवाई पट्टी के पास भमोडी गांव की है। शुक्रवार का दिन था और गांव के कुछ लोगों का एक समूह रोजाना की तरह अपने काम में व्यस्त था। दिन के समय यह समूह भमोडी गांव के पास जंगल के किनारे स्थित एक तालाब में मछली पकड़ने गया था। सभी लोग तालाब के पास शांति से मछली पकड़ रहे थे कि अचानक प्रकृति ने अपना रुख बदल लिया। दोपहर के करीब दो बजे के बाद अचानक तेज हवाएं चलने लगीं। आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते जबरदस्त तूफान के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। जंगल के खुले इलाके में होने के कारण लोगों के पास छिपने की कोई तुरंत व्यवस्था नहीं थी। बारिश की तेज बौछारों और हवा के थपेड़ों से बचने के लिए इस समूह ने सूझबूझ से काम लेने की कोशिश की, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जंगल के किनारे खुद को सुरक्षित रखने के लिए लोगों ने दो अलग-अलग रास्ते चुने। कुछ लोग भागकर पास ही बने वन विभाग के एक कैंप में चले गए। वहीं दूसरी तरफ, चार युवकों को सामने दिखाई दे रहा वन विभाग का ऊंचा वॉच टावर ज्यादा सही लगा और वे बारिश से बचने के लिए उस पर चढ़ गए। लॉजिक के हिसाब से ऊंचाई पर बना टावर उन्हें पानी से तो बचा रहा था, लेकिन वे इस बात से अनजान थे कि यह फैसला उनके लिए कितना भारी पड़ने वाला है। जैसे ही बारिश तेज हुई, वॉच टावर के बिल्कुल पास मौजूद एक ऊंचे पेड़ पर अचानक बेहद शक्तिशाली आकाशीय बिजली गिरी। बिजली भले ही पेड़ पर गिरी थी, लेकिन उसका करंट इतनी तेजी से फैला कि पूरा वॉच टावर उसकी चपेट में आ गया। टावर के सबसे ऊपरी हिस्से पर मौजूद चारों युवक इस करंट की सीधी चपेट में आ गए और बुरी तरह झुलस गए। करंट का झटका इतना जोरदार था कि दो युवकों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। वहीं, टावर के अंदर और नीचे मौजूद पांच अन्य लोग भी इसकी चपेट में आकर घायल हो गए। जो लोग पास के वन विभाग के कैंप में शरण लिए हुए थे, वे पूरी तरह सुरक्षित रहे। इस तरह एक ही समय पर लिए गए दो अलग-अलग फैसलों ने लोगों की जान और सुरक्षा के बीच एक बड़ा अंतर पैदा कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। बैहर थाना प्रभारी जयंत मर्सकोल्हे ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को सबसे पहले डायल 100 के माध्यम से इस हादसे की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गई। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तुरंत बैहर के अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत घायलों का इलाज शुरू किया, लेकिन अस्पताल लाते-लाते एक और युवक की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ चुकी थी। इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। इसके अलावा दो अन्य लोगों की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बालाघाट के जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वाले तीनों युवाओं की पहचान कर ली गई है। मृतकों में बिरवा के रहने वाले 19 वर्षीय सतीश वाल्के और 18 वर्षीय लकी मेरावी शामिल हैं, जिनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं, भमोडी के रहने वाले 32 वर्षीय झमसिंह तारम की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई। मृतकों में से दो युवक कोहका के और एक भीमोरी का रहने वाला था। पुलिस ने बताया कि सभी मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम करवाकर उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। बैहर थाना पुलिस ने इस पूरी घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद से पूरे भमोडी और आसपास के गांवों में मातम का माहौल है।