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बाघिन ने महिला को बनाया शिकार, कान्हा प्रबंधन ने रातों-रात किया रेस्क्यू ऑपरेशन

Kanha Tiger Reserve news : बालाघाट के पर्रापुर गांव में बाघिन के हमले में महिला की मौत के बाद कान्हा प्रबंधन ने सतर्कता दिखाते हुए बाघिन टी-27 को रेस्क्यू कर वन विहार भोपाल भेजा, जांच में दांत घिसे मिले।
Kanha Tiger Reserve news

Kanha Tiger Reserve news : बालाघाट के जंगल किनारे बसे गांवों में इन दिनों डर का माहौल है। वजह है एक ऐसी घटना, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में एक बाघिन ने सोते हुए एक महिला को अपना शिकार बना लिया। इसके बाद वन विभाग ने जो कदम उठाया, वो चर्चा का विषय बन गया है।

आखिर हुआ क्या था उस रात

बात 2 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि की है। खापा बफर परिक्षेत्र की कुम्हादेही बीट में ग्राम पर्रापुर, जिसे स्कूल टोला भी कहा जाता है, वहां सुगनी बाई अपने घर में सो रही थीं। सुगनी बाई की उम्र करीब 50 साल थी और वे बुधराम बैगा की पत्नी थीं।

रात के अंधेरे में एक बाघिन घर तक पहुंची और सुगनी बाई को बिस्तर से उठाकर जंगल की ओर ले गई। सुबह जब यह बात सामने आई तो पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। महिला की मौत हो चुकी थी। गांव वालों के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं था। रोज की तरह सुगनी बाई रात को सोने गई थीं, लेकिन सुबह वे कभी नहीं जाग पाईं।

घटना के बाद प्रबंधन हरकत में आया

जैसे ही खबर कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन तक पहुंची, वन अमला तुरंत मौके पर पहुंच गया। पूरे इलाके में कैमरा ट्रैप लगाए गए ताकि बाघिन की हरकतों पर नजर रखी जा सके।

गश्ती दल दिन-रात जंगल में सर्चिंग करते रहे। हाथियों की मदद ली गई, क्योंकि घने जंगल में पैदल सर्चिंग करना आसान नहीं होता। हाथी दल की मदद से जंगल और आसपास के गांवों तक बारीकी से निगरानी की गई।

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इसी दौरान करीब 14 साल की एक मादा बाघिन, जिसे टी-27 नाम दिया गया है, गांव के पास घूमती हुई नजर आई। जांच में पता चला कि यह बाघिन पहले भी इंसानी बस्तियों के आसपास देखी जा चुकी थी। यही नहीं, घटना से एक दिन पहले भी उसने गांव के नजदीक शिकार करने की कोशिश की थी।

रेस्क्यू का फैसला क्यों लिया गया

ग्रामीणों की जान को खतरा देखते हुए वन विभाग के पास ज्यादा वक्त नहीं था। ऐसे हालात में अकेले फैसला लेना मुमकिन नहीं होता, इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति ली गई।

अनुमति मिलने के बाद हाथी दल की मदद से बाघिन टी-27 का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। यह काम आसान नहीं था, लेकिन वन अमले की टीम ने सूझबूझ के साथ बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया।

स्वास्थ्य जांच में सामने आई असली वजह

रेस्क्यू के बाद जब बाघिन का मेडिकल परीक्षण किया गया, तो एक अहम बात सामने आई। बाघिन के कैनाइन दांत काफी घिसे हुए पाए गए। जानकारों का कहना है कि उम्रदराज बाघों के दांत कमजोर होने पर वे जंगली जानवरों का शिकार करने में सक्षम नहीं रह पाते। ऐसे में वे आसान शिकार की तलाश में गांवों के आसपास मंडराने लगते हैं। यही वजह मानी जा रही है कि टी-27 बार-बार इंसानी बस्तियों की तरफ आ रही थी।

अब कहां है बाघिन टी-27

स्वास्थ्य जांच पूरी होने के बाद बाघिन को विशेष रूप से तैयार किए गए परिवहन वाहन में रखा गया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से वन विहार, भोपाल भेज दिया गया, जहां अब उसकी देखरेख की जाएगी।

गांव वालों को मिली कुछ राहत

बाघिन के रेस्क्यू के बाद गांव में लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि सुगनी बाई की मौत का गम अभी भी गांव पर छाया हुआ है। पड़ोसी और रिश्तेदार अब भी उस रात को याद कर सहम जाते हैं।

वन विभाग का कहना है कि आगे भी इलाके में निगरानी जारी रहेगी, ताकि इस तरह की घटना दोबारा न हो। बफर क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है, खासकर रात के समय घर से बाहर निकलने से बचने की।