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गाडरवारा वन विभाग का वायरल वीडियो: सरकारी रेस्ट हाउस में ताश की गड्डियां और उड़ती धज्जियां

गाडरवारा के सरकारी रेस्ट हाउस में जंगल बचाने के बजाय ताश के पत्ते खेलते कर्मचारियों का वीडियो वायरल होने के बाद, अब जनता प्रशासनिक अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
Narsinghpur latest news

Narsinghpur latest news ; जिस सरकारी बंगले या रेस्ट हाउस को जंगल और जानवरों की रखवाली के लिए बनाया गया है, वहां आराम फरमाने के बजाय ताश के पत्ते फेंटे जाएंगे? मामला नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा वन विभाग से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों आग की तरह फैल रहा है, जिसे देखकर आम आदमी का माथा ठनकना लाजिमी है। जंगल बचाने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वो खुद दफ्तर के अंदर ताश की बाजी पर दांव लगाते दिख रहे हैं।

52 पत्तों का खेल और जंगल की सुरक्षा रामभरोसे

जब वीडियो सामने आया तो लोगों को अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ। भाई सीधी सी बात है, जिस जगह पर शिकारियों को पकड़ने की प्लानिंग होनी चाहिए थी, जहां पेड़ों की अवैध कटाई रोकने की फाइलें चलनी चाहिए थीं, वहां राजा-गुलाम और इक्के की चाल चली जा रही है। वीडियो भले ही कुछ दिन पुराना बताया जा रहा हो, लेकिन इसने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। आम जनता के खून-पसीने के टैक्स के पैसों से बनी सरकारी इमारतों का यह हाल देखकर हर कोई हैरान है।

साहब, क्या आपको सच में कुछ पता नहीं था?

अब जनता सीधे तौर पर बड़े अधिकारियों से सवाल पूछ रही है। बात बिल्कुल साफ है कि या तो डीएफओ साहब और बाकी बड़े अफसरों को इस खेल की भनक तक नहीं थी, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई थीं। 


अगर अफसरों को पता ही नहीं था, तो यह उनकी नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है कि उनके नाक के नीचे क्या चल रहा है, उन्हें खबर तक नहीं। और अगर सब कुछ जानकारी में हो रहा था, तो फिर मिलीभगत की बू साफ आती है। सरकारी वर्दी की शान को ताक पर रखकर इस तरह का खेल खेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

कानून सबके लिए बराबर या सिर्फ आम जनता के लिए?

सोचने वाली बात यह है कि अगर कोई आम नागरिक सड़क पर या किसी नुक्कड़ पर ताश खेलता पकड़ा जाए, तो पुलिस तुरंत डंडा लेकर पहुंच जाती है। जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज होता है, थाने के चक्कर काटने पड़ते हैं और जेल जाने की नौबत तक आ जाती है। 

लेकिन जब सरकारी कर्मचारी, सरकारी बिल्डिंग के अंदर और सरकारी समय पर यह सब करते हैं, तो क्या कानून अंधा हो जाता है? क्या सिस्टम को सच में लकवा मार गया है? यह सिर्फ ताश खेलने भर की बात नहीं है, बल्कि यह उस वर्दी और उस कुर्सी का सीधा अपमान है जो जनता की सेवा और जंगल की सुरक्षा के लिए मिली है।