मध्य प्रदेश में 769 दिनों में 32 हजार से अधिक आत्महत्याएं, रोज औसतन 42 लोगों ने गंवाई जान
विधानसभा में सरकार का खुलासा, 1229 किसान-कृषि मजदूर और 987 छात्र भी शामिल
- 769 दिनों में 32,385 आत्महत्याएं दर्ज
- 1,229 किसान-कृषि मजदूर और 987 छात्र शामिल
- भोपाल और इंदौर में सबसे अधिक मामले
Madhya Pradesh suicide cases। मध्य प्रदेश में 13 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच कुल 32,385 लोगों ने आत्महत्या की। यह जानकारी राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश विधानसभा में एक लिखित जवाब में दी। आंकड़ों के अनुसार 769 दिनों की इस अवधि में औसतन प्रतिदिन 42 लोगों ने अपनी जान गंवाई। आत्महत्या करने वालों में 1,229 किसान और कृषि मजदूर तथा 987 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। सरकार ने बताया कि इन घटनाओं के पीछे कर्ज, बेरोजगारी, पारिवारिक तनाव और प्रेम संबंध जैसे कारण सामने आए हैं।
यह जानकारी कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिखित रूप में प्रस्तुत की। प्रश्न में जिलेवार आंकड़ों और कारणों की जानकारी मांगी गई थी।
विधानसभा में पेश हुए आधिकारिक आंकड़े
विधानसभा में प्रस्तुत जवाब के अनुसार 13 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 तक राज्य में कुल 32,385 आत्महत्याएं दर्ज की गईं। यह अवधि 769 दिनों की है। आंकड़ों को औसत में देखें तो प्रतिदिन लगभग 42 लोगों ने आत्महत्या की।
सरकार ने बताया कि आत्महत्या के मामलों में सामाजिक और आर्थिक कारण प्रमुख रहे। कर्ज, बेरोजगारी, पारिवारिक विवाद, प्रेम प्रसंग और अन्य व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया गया है।
किसान और कृषि मजदूरों की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 562 किसानों और 667 कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की, यानी कुल 1,229 लोग कृषि क्षेत्र से जुड़े थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि फसल नुकसान को कारण बताते हुए केवल दो किसानों की आत्महत्या दर्ज हुई है।
कृषि क्षेत्र में आत्महत्या का मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय बहस का विषय रहा है। हालांकि इस जवाब में सरकार ने सीमित मामलों में फसल हानि को कारण माना है, लेकिन अन्य सामाजिक-आर्थिक कारकों की भी भूमिका बताई गई है।
छात्र-छात्राओं में भी चिंता
आंकड़ों के अनुसार 987 छात्र-छात्राओं ने भी इस अवधि में आत्महत्या की। यह संख्या शिक्षा और युवा वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञ लगातार परीक्षा दबाव, प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक अपेक्षाएं और व्यक्तिगत तनाव को प्रमुख कारण मानते रहे हैं।
राज्य में आनंद विभाग की स्थापना लोगों को तनावमुक्त और सकारात्मक जीवन शैली की दिशा में प्रेरित करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके बावजूद बढ़ते आत्महत्या के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और परामर्श तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
बड़े शहरों और जिलों के आंकड़े
जिलेवार आंकड़ों में कई बड़े शहरों के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
भोपाल शहर में 1,074 और ग्रामीण क्षेत्र में 210 लोगों ने आत्महत्या की, यानी कुल 1,284 मामले दर्ज हुए। इंदौर शहर में 1,314 और इंदौर ग्रामीण में 477 मामलों के साथ कुल 1,791 आत्महत्याएं दर्ज की गईं।
ग्वालियर में 889, जबलपुर में 1,192, सागर में 1,075, धार में 994, खरगोन में 1,039, छिंदवाड़ा में 843, सतना में 838, सिंगरौली में 808 और सीधी में 805 मामले सामने आए।
इसके अलावा रायसेन में 803, रीवा में 732, उज्जैन में 695, देवास में 684, छतरपुर में 681, नरसिंहपुर में 640, रतलाम में 632, नर्मदापुरम में 605, खंडवा में 598, मुरैना में 570, अलीराजपुर में 568, दमोह में 558 और मंडला में 554 आत्महत्याएं दर्ज हुईं।
छोटे जिलों में भी आंकड़े चिंताजनक रहे। श्योपुर में 82, आगर मालवा में 125, पांढुर्णा में 144 और मऊगंज में 50 मामलों की जानकारी दी गई।













