Latest crime news MP : भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने की
जिम्मेदारी जिस संस्था पर है, जब उसी के भीतर से भ्रष्टाचार की खबरें बाहर आती हैं, तो आम जनता का विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकायुक्त कार्यालय से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां भ्रष्टाचार के मामलों में 'डीलिंग' का खेल चल रहा था। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस मामले में लोकायुक्त कार्यालय में तैनात दो डीएसपी मंजू सिंह और बीएम द्विवेदी को उनके पद से हटाकर तत्काल प्रभाव से पुलिस मुख्यालय (PHQ) भेज दिया गया है।
लोकायुक्त की साख पर बड़ा सवाल
मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संस्था को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली सबसे महत्वपूर्ण एजेंसियों में माना जाता है। ऐसे में जब उसी संस्था के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार मामलों में कथित सौदेबाजी के आरोप लगते हैं, तो मामला केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी जवाबदेही व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हैं। मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार, भोपाल स्थित लोकायुक्त संगठन में पदस्थ दो डीएसपी अधिकारियों मंजू सिंह और बी.एम. द्विवेदी को उनके वर्तमान पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है। साथ ही उनके निलंबन का प्रस्ताव भी वरिष्ठ स्तर पर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाना है।
कथित स्टिंग ऑपरेशन के बाद बढ़ी हलचल
मामले ने तब गति पकड़ी जब एक मीडिया संस्थान द्वारा किए गए कथित स्टिंग ऑपरेशन में कुछ कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार संबंधी मामलों को प्रभावित करने के आरोप सामने आए। रिपोर्टों के अनुसार, कथित बातचीत में जांच को लंबा खींचने, प्रक्रिया को प्रभावित करने और कुछ तकनीकी पहलुओं में हस्तक्षेप की चर्चा सामने आई थी। आरोप यह भी लगाए गए कि कुछ मामलों में जांच प्रक्रिया को इतना लंबा करने की बात कही गई जिससे संबंधित आरोपी कर्मचारी अपने सेवा काल के अंत तक गंभीर प्रशासनिक प्रभावों से बच सकें। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
किन कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त संगठन से जुड़े कुछ तकनीकी और सहायक कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है। विभागीय स्तर पर जांच शुरू होने के बाद कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।