MP Atithi Shikshak News : मध्य प्रदेश में शिक्षा का बुरा हाल, 70 हजार अतिथि शिक्षकों को नौकरी से निकालने की तैयारी DPI ने जारी किया नया आदेश
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के नए आदेश से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के सामने खड़ा हुआ रोजगार का संकट, 30 मार्च को भोपाल में जमेगा विरोध का डेरा।
- लोक शिक्षण संचालनालय ने 30 अप्रैल 2026 तक अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया।
- इस फैसले से मध्य प्रदेश के लगभग 70 हजार अतिथि शिक्षकों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।
- सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में 30 मार्च को भोपाल में प्रदेश स्तरीय आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
MP Atithi Shikshak News : मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को संभालने वाले हजारों अतिथि शिक्षकों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवाएं आगामी 30 अप्रैल 2026 तक ही ली जाएंगी।
इस आधिकारिक आदेश के बाद प्रदेशभर के लगभग 70 हजार अतिथि शिक्षकों में सरकार के प्रति गहरा असंतोष व्याप्त हो गया है। एक तरफ जहां सरकार बार-बार इन शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने का दावा करती रही है, वहीं दूसरी ओर अचानक आए इस फैसले ने शिक्षकों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक के.के. द्विवेदी द्वारा जारी किए गए निर्देशों में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे अतिथि शिक्षकों की सेवाएं केवल निर्धारित तिथि तक ही लें। इस फैसले से उन हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, जो पूरी तरह से इस मानदेय पर निर्भर थे।
डीपीआई के आदेश और प्रशासनिक व्यवस्था
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी पत्र में शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के तर्क दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि जहां नियमित शिक्षकों के पद रिक्त हैं, वहां व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाने के लिए ही अतिथि शिक्षकों की सेवाएं एक निश्चित अवधि तक ली जाती हैं। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी और शाला प्रभारी यह सुनिश्चित करें कि 30 अप्रैल के बाद किसी भी अतिथि शिक्षक की उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्तमान में शिक्षकों के करीब 70 हजार पद रिक्त पड़े हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए सरकार ने अतिथि शिक्षकों को एक वैकल्पिक माध्यम के रूप में नियुक्त किया था। हालांकि, हर साल सत्र के अंत में उनकी सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया ने शिक्षकों के बीच अस्थिरता पैदा कर दी है। विभाग का यह तर्क कि नई नियुक्तियों या स्थानांतरण के माध्यम से पद भरे जा रहे हैं, अतिथि शिक्षकों के गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि धरातल पर अब भी हजारों स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।
शिक्षक संगठनों की नाराजगी
राज्य शिक्षक संघ ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव का कहना है कि अतिथि शिक्षक प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बन चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश स्कूल इन्हीं शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनकी सेवाओं को महज कुछ महीनों तक सीमित कर देना उनके साथ एक बड़ा अन्याय है। यादव ने मांग की है कि जब तक पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक इन शिक्षकों को पूरे 12 महीने का सेवाकाल दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
अतिथि शिक्षकों का तर्क है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान उनकी सेवाएं समाप्त करने से उन्हें दो-तीन महीनों तक बिना वेतन के रहना पड़ता है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती है, बल्कि मानसिक रूप से भी वे खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं। शिक्षकों का कहना है कि सरकार को उनकी वरिष्ठता और अनुभव का लाभ उठाते हुए एक स्थायी नीति बनानी चाहिए, न कि हर साल उन्हें नौकरी से बाहर करने का डर दिखाना चाहिए।
चुनावी वादे और वर्तमान स्थिति का टकराव
अतिथि शिक्षकों में सबसे ज्यादा आक्रोश पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर है। अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि शिक्षकों की एक विशाल महापंचायत बुलाई थी। उस दौरान मंच से कई लुभावने वादे किए गए थे, जिसमें मानदेय दोगुना करने और भविष्य सुरक्षित करने के लिए विभागीय परीक्षा या अन्य पात्रता मापदंड तय करने की बात कही गई थी।
परिहार के अनुसार, सरकार ने सत्ता में आने के बाद उन वादों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। वर्तमान आदेश ने घाव पर नमक छिड़कने का काम किया है। यही कारण है कि अब प्रदेश के सभी अतिथि शिक्षक संगठन एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्यवाही चाहते हैं।
30 मार्च को भोपाल में बड़े आंदोलन की तैयारी
अपनी मांगों को मनवाने और सेवा समाप्ति के आदेश का विरोध करने के लिए अतिथि शिक्षकों ने अब निर्णायक लड़ाई का मन बना लिया है। समन्वय समिति ने घोषणा की है कि 30 मार्च को पूरे प्रदेश से हजारों की संख्या में अतिथि शिक्षक राजधानी भोपाल पहुंचेंगे। यह विरोध प्रदर्शन सरकार की “वादाखिलाफी” के खिलाफ होगा। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि उन्हें नियमित किया जाए या कम से कम उनकी सेवाओं को निरंतर रखा जाए।
आंदोलन की रणनीति को लेकर संभाग और जिला स्तर पर बैठकें शुरू हो चुकी हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी शिक्षक अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। यदि सरकार इस प्रदर्शन से पहले कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो आने वाले दिनों में यह विवाद प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।













