MP Health News: फार्मासिस्टों के लिए खुशखबरी, केंद्र को भेजा गया समान वेतन का प्रस्ताव
मध्यप्रदेश में फार्मासिस्टों के लिए समान वेतन और पदोन्नति नीति पर केंद्र को प्रस्ताव, 90 हजार कर्मचारियों और स्वास्थ्य सेवाओं को मिल सकता है बड़ा लाभ।
MP Health News : मध्यप्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में काम करने वाले फार्मासिस्ट लंबे समय से एक ही सवाल उठा रहे थे जब जिम्मेदारी समान है, काम समान है, तो वेतन और अवसरों में फर्क क्यों? अब इस सवाल का जवाब सकारात्मक दिशा में जाता दिख रहा है। राज्य के करीब 90 हजार फार्मासिस्टों के लिए समान वेतन, पदोन्नति और बेहतर सेवा शर्तों को लेकर एक नई पहल सामने आई है, जिसे अगर लागू किया गया, तो यह सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही नहीं बल्कि मरीजों और पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले फार्मासिस्ट दवाओं की उपलब्धता, सही खुराक और मरीज की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद देश के अलग-अलग राज्यों और संस्थानों में उनके वेतन, पद और प्रमोशन की व्यवस्था में काफी अंतर रहा है। मध्यप्रदेश में अब इस असमानता को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया गया है।
मध्यप्रदेश के फार्मासिस्टों को समान वेतन की उम्मीद
प्रदेश में कार्यरत लगभग 90 हजार फार्मासिस्टों के लिए “समान काम, समान वेतन” की मांग अब सिर्फ नारा नहीं रह गई है। मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने अपना स्पष्ट पक्ष रखा है। काउंसिल का मानना है कि अगर देशभर में एक जैसी भर्ती और सेवा नीति लागू होती है, तो इससे फार्मासिस्टों को उनका हक मिलेगा और सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।
फिलहाल प्रदेश में फार्मासिस्ट अलग-अलग विभागों, अस्पतालों और संस्थानों में अलग-अलग वेतनमान पर काम कर रहे हैं। इससे न केवल असंतोष पैदा होता है, बल्कि काम के स्तर और प्रेरणा पर भी असर पड़ता है। प्रस्तावित बदलाव इस असंतुलन को दूर करने की कोशिश है।
केंद्र सरकार को भेजा गया प्रस्ताव क्या कहता है
मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर “फार्मासिस्ट रिक्रूटमेंट, प्रमोशन एंड सर्विस रेगुलेशन पॉलिसी-2025” को राज्य में लागू करने का समर्थन किया है। यह नीति फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तैयार की गई है और इसका उद्देश्य पूरे देश में फार्मासिस्टों के लिए एक समान व्यवस्था बनाना है।
इस पॉलिसी के तहत भर्ती प्रक्रिया, वेतन संरचना और प्रमोशन सिस्टम को एक जैसा रखने की बात कही गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी फार्मासिस्ट की योग्यता और अनुभव का मूल्यांकन राज्य के आधार पर नहीं, बल्कि काम और प्रदर्शन के आधार पर हो।
करियर ग्रोथ और पदोन्नति के नए रास्ते
अगर यह नीति लागू होती है, तो फार्मासिस्टों के लिए करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर खुल सकते हैं। प्रस्ताव के अनुसार, सेवा अवधि और प्रदर्शन के आधार पर वेतन में बढ़ोतरी और पदोन्नति का स्पष्ट रास्ता तय किया जाएगा। योग्य फार्मासिस्टों को उच्च पदों तक पहुंचने और राजपत्रित अधिकारी बनने का मौका भी मिल सकता है।
इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा। जब कर्मचारी सुरक्षित और संतुष्ट महसूस करते हैं, तो वे मरीजों को बेहतर सेवा दे पाते हैं। दवाओं की निगरानी, स्टॉक प्रबंधन और मरीजों को सही जानकारी देने जैसे कामों में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
फार्मासिस्टों के साथ-साथ सिस्टम को भी फायदा
समान सेवा नियम लागू होने से न केवल फार्मासिस्टों को फायदा होगा, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत होगी। एक जैसी नीति होने से दूसरे राज्यों में काम कर रहे अनुभवी फार्मासिस्ट भी मध्यप्रदेश में सेवा देने के लिए आकर्षित हो सकते हैं। इससे मानव संसाधन की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, पूरे देश में लागू एक समान ढांचे से यह भी तय होगा कि फार्मासिस्ट अपनी योग्यता के अनुसार किसी भी राज्य में काम कर सकें, बिना किसी भेदभाव के।
निजी मेडिकल कॉलेजों में नीट पीजी दाखिले का बदला समीकरण
इसी बीच मध्यप्रदेश की मेडिकल शिक्षा से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। निजी मेडिकल कॉलेजों में नीट पीजी दाखिले को लेकर नियमों में बदलाव हुआ है। अब इन कॉलेजों की 50 प्रतिशत से अधिक सीटें अन्य राज्यों के छात्रों के लिए खुली रहेंगी। इसका मतलब यह है कि मध्यप्रदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धा पहले से ज्यादा कड़ी हो गई है।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, ओपन कैटेगरी की 487 सीटें दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध हैं, जबकि प्रदेश के छात्रों के लिए यह संख्या 192 तक सीमित रह गई है।
हाईकोर्ट के फैसले से बदली तस्वीर
राज्य सरकार ने 3 सितंबर 2025 को एक संशोधन के जरिए प्रदेश के एमबीबीएस छात्रों को 100 प्रतिशत संस्थागत प्राथमिकता देने की कोशिश की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस संशोधन को अमान्य कर दिया। इसके बाद निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
इस फैसले का असर सीधे उन छात्रों पर पड़ा है, जो पीजी मेडिकल सीटों के लिए तैयारी कर रहे हैं। अब उन्हें देशभर के उम्मीदवारों से मुकाबला करना होगा।
फार्मासिस्ट नीति को लागू कराने की कोशिश जारी
मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष संजय जैन के अनुसार, फार्मासिस्टों को प्रस्तावित पॉलिसी का पूरा लाभ दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार को भेजा गया पत्र इसी दिशा में एक अहम कदम है।
आने वाले समय में अगर यह नीति लागू होती है, तो यह मध्यप्रदेश के फार्मासिस्टों के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है।













