MP illegal colony law : अब अवैध कॉलोनी बनी तो कलेक्टर पर कार्रवाई, एमपी सरकार का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर लगाम के लिए सरकार नया कानून ला रही है, जिसमें कलेक्टर की जवाबदेही, एक लाइसेंस व्यवस्था और कड़े दंड का प्रावधान होगा।
- अवैध कॉलोनी बनने पर कलेक्टर की जिम्मेदारी तय
- कॉलोनाइजर पर 1 करोड़ जुर्माना और 10 साल जेल
- शिकायतों पर 45 दिन में अनिवार्य कार्रवाई
MP illegal colony law : मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की बढ़ती समस्या पर अब सरकार ने सीधा और सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है। नए प्रस्तावित कानून के तहत अगर राज्य के किसी भी कोने में अवैध कॉलोनी बनती है, तो उसकी जिम्मेदारी सिर्फ बिल्डर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सीधे जिले के कलेक्टर पर भी तय की जाएगी। सरकार का मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना इस समस्या पर स्थायी रोक नहीं लगाई जा सकती।
अवैध कॉलोनियों पर सरकार का बड़ा एक्शन प्लान
प्रदेश में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही बिना अनुमति कॉलोनियां भी फैलती गईं। इन्हीं हालात को देखते हुए नगरीय विकास एवं आवास विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मौजूदा कानूनों को मिलाकर एक नया एकीकृत कॉलोनाइजर अधिनियम तैयार किया जा रहा है। इस विधेयक को 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में पेश करने की तैयारी है। सरकार इसे अवैध निर्माण के खिलाफ अब तक का सबसे कठोर कदम मान रही है।
अब पूरे प्रदेश के लिए एक ही कॉलोनाइजर लाइसेंस
नए कानून में लाइसेंस व्यवस्था को सरल किया जा रहा है। अभी तक ग्रामीण और शहरी इलाकों के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेने पड़ते थे, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था में एक ही लाइसेंस से कॉलोनाइजर पूरे मध्य प्रदेश में कहीं भी कॉलोनी विकसित कर सकेगा। इससे प्रक्रिया आसान होगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
कलेक्टर होंगे अंतिम जिम्मेदार
इस अधिनियम में जिले के कलेक्टर को सक्षम प्राधिकारी बनाया जाएगा। वे चाहें तो कुछ अधिकार अनुविभागीय अधिकारियों को सौंप सकते हैं, लेकिन अवैध कॉलोनी बनने की स्थिति में अंतिम जवाबदेही कलेक्टर की ही मानी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक लापरवाही पर लगाम लगेगी।
अवैध कॉलोनाइजर पर भारी जुर्माना और जेल
नए कानून में सजा के प्रावधान भी पहले से कहीं ज्यादा सख्त होंगे। अभी तक जहां जुर्माने की सीमा 10 लाख रुपये तक थी, उसे बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही अवैध कॉलोनी विकसित करने पर 10 साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है। सरकार को ऐसी कॉलोनियों की जमीन जब्त करने का अधिकार भी मिलेगा।
ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लागू
अवैध निर्माण पर नजर रखने के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। आम लोगों की शिकायतों को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत लाने की तैयारी है, ताकि तय समय में कार्रवाई हो सके। शिकायत मिलने पर 45 दिनों के भीतर उसका निराकरण अनिवार्य होगा। बिल्डर को पहले 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा और समयसीमा पूरी होने पर सरकार खुद कार्रवाई करेगी।
हजारों अवैध कॉलोनियां बनीं बड़ी चुनौती
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब चार हजार कॉलोनियां अवैध मानी जा रही हैं। ग्रामीण इलाकों में कई जगह सरपंच की अनुमति से कॉलोनियां बना दी जाती हैं, लेकिन बाद में जब ये क्षेत्र नगर सीमा में शामिल होते हैं, तो सड़क, पानी, सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी सामने आती है। इसका बोझ अंततः सरकार और वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है।
नया कानून से स्थायी समाधान की उम्मीद
सरकार का कहना है कि शहरी और ग्रामीण विकास से जुड़े कानूनों को एक साथ लाने से व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी होगी और जिम्मेदारी तय करना आसान होगा। इसके लिए एक राज्य स्तरीय समिति बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसमें दोनों विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। उम्मीद की जा रही है कि इस कदम से अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और भविष्य में लोगों को बिना बुनियादी सुविधाओं के घर लेने की मजबूरी नहीं रहेगी।












