MP Open Jail for Women : मध्य प्रदेश की खुली जेलों में अब महिलाएं भी रहेंगी, जेल विभाग ने भेजा प्रस्ताव
जेल मुख्यालय ने शासन को भेजा संशोधन का प्रस्ताव, महाराष्ट्र और राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश बनेगा देश का तीसरा राज्य; आठ प्रमुख शहरों में मिलेगी यह सुविधा।
MP Open Jail for Women : मध्य प्रदेश में जेल सुधारों की दिशा में एक बड़ा और प्रगतिशील कदम उठाते हुए राज्य सरकार अब महिला कैदियों के लिए भी खुली जेल के दरवाजे खोलने जा रही है। वर्तमान में प्रदेश की खुली जेलों में केवल पुरुष कैदियों को ही अपने परिवार के साथ रहने और बाहर जाकर काम करने की अनुमति है।
जेल मुख्यालय ने इस व्यवस्था में बदलाव करने और महिलाओं को भी यह अधिकार देने के लिए जेल मैन्युअल में संशोधन का एक विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के बाद देश का ऐसा तीसरा राज्य बन जाएगा जहां महिला कैदियों को खुली जेल (ओपन जेल) में रखने की व्यवस्था होगी।
अब तक सुरक्षा कारणों और प्रशासनिक जटिलताओं का हवाला देकर महिला कैदियों को खुली जेलों से दूर रखा गया था। हालांकि, जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि केवल लिंग के आधार पर कैदियों के बीच इस तरह का भेदभाव संवैधानिक और मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है।
जेल मुख्यालय के अधिकारियों का तर्क है कि यदि पुरुष कैदी अनुशासन का पालन करते हुए समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के पात्र हो सकते हैं, तो यही अवसर महिला कैदियों को भी मिलना चाहिए। इस निर्णय का उद्देश्य महिला कैदियों के पुनर्वास को बढ़ावा देना और उन्हें सजा पूरी होने के बाद समाज में सम्मानजनक तरीके से फिर से स्थापित होने के लिए तैयार करना है।
इन आठ शहरों में शुरू होगी व्यवस्था
मध्य प्रदेश में वर्तमान में आठ स्थानों पर खुली जेलें संचालित की जा रही हैं। इनमें राजधानी भोपाल के साथ-साथ इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, सागर, ग्वालियर और जबलपुर शामिल हैं। जेल विभाग की योजना के अनुसार, शासन से अनुमति मिलने के बाद इन्हीं मौजूदा केंद्रों पर महिलाओं के लिए विशेष वार्ड या अलग से रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
इन जेलों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध होते हैं, लेकिन कैदियों को एक निश्चित दायरे में रहकर सामान्य जीवन जीने की छूट मिलती है। महिला कैदियों के आने से इन केंद्रों के प्रबंधन और सुरक्षा ढांचे में कुछ आवश्यक बदलाव भी किए जा सकते हैं ताकि उनकी निजता और सुरक्षा बनी रहे।
खुली जेल की अवधारणा सजा काटने के पारंपरिक तरीके से काफी अलग है। यहां कैदी अपने जीवनसाथी और बच्चों के साथ रह सकते हैं। उन्हें दिन के समय जेल परिसर से बाहर जाकर शहर में मजदूरी या कोई अन्य व्यावसायिक कार्य करने की स्वतंत्रता होती है। शाम को एक निश्चित समय पर उन्हें वापस अपनी कॉलोनी में रिपोर्ट करना होता है। यह व्यवस्था कैदियों में जिम्मेदारी की भावना पैदा करती है और उन्हें मानसिक रूप से जेल की चारदीवारी के तनाव से मुक्त रखती है।
चयन के लिए निर्धारित किए गए हैं कड़े मापदंड
खुली जेल में जाने का अवसर हर कैदी को नहीं मिलता है। इसके लिए जेल विभाग ने बेहद सख्त शर्तें और नियम तय किए हैं। इस सुविधा का लाभ केवल उन्हीं महिला कैदियों को मिल सकेगा जिन्होंने अपनी कुल सजा का एक बड़ा हिस्सा सामान्य जेल में काट लिया है और जिनका आचरण इस दौरान उत्कृष्ट रहा है। विभाग के अनुसार, उन कैदियों को खुली जेल में नहीं भेजा जाता जिन्हें आतंकी गतिविधियों, देशद्रोह, संगठित अपराध या नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर मामलों में सजा मिली है।
इसके अलावा, आदतन अपराधी या जेल के भीतर बार-बार अनुशासनहीनता करने वाले कैदियों को भी इस श्रेणी से बाहर रखा गया है। चयन प्रक्रिया के दौरान यह भी देखा जाता है कि कैदी के फरार होने का कोई जोखिम न हो। एक विशेष कमेटी प्रत्येक मामले की समीक्षा करती है और यह सुनिश्चित करती है कि संबंधित कैदी समाज के लिए खतरा नहीं है। महिला कैदियों के मामले में भी इन्हीं मानकों का पालन किया जाएगा, जिससे व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता बनी रहे।
लिंग भेद खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम
मध्य प्रदेश में अब तक यह माना जाता था कि महिला कैदियों के लिए खुली जेल में सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी। इसी कारण से प्रदेश की पहली खुली जेल 2010 में होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) में शुरू होने के बाद से यह केवल पुरुषों तक ही सीमित रही।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में महिला अधिकारों और जेल सुधारों पर बढ़ती चर्चा के बीच विभाग ने अपनी सोच में बदलाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि महिला कैदियों के लिए भी यह व्यवस्था उतनी ही सफल साबित हो सकती है जितनी पुरुषों के लिए रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को खुली जेल में रखने से उनके बच्चों के भविष्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कई बार महिला कैदियों के बच्चे जेल के भीतर ही पलते हैं, जिससे उनके मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। खुली जेल में रहने से ये बच्चे एक सामान्य वातावरण में बड़े हो सकेंगे और स्कूल जा सकेंगे।













