सड़कों की गुणवत्ता पर सरकार सख्त, सात जिलों में औचक निरीक्षण,35 निर्माण कार्यों की जांच, अफसर निलंबित ,ठेकेदार ब्लैकलिस्ट
MP Road Construction : मध्य प्रदेश में सड़कों और सरकारी भवनों की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अब राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग ने साफ संकेत दे दिए हैं कि घटिया निर्माण पर कोई समझौता नहीं होगा। फरवरी की शुरुआत में प्रदेश के सात जिलों में एक ही दिन किए गए औचक निरीक्षण ने कई निर्माण कार्यों की असल तस्वीर सामने रख दी।
जहां कुछ जगहों पर मानकों के अनुरूप काम मिला, वहीं कई परियोजनाओं में गंभीर लापरवाही उजागर हुई। नतीजा यह रहा कि अधिकारियों को नोटिस, एक उपयंत्री का निलंबन और ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने तक की कार्रवाई की गई।
यह पूरी कवायद सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं थी, बल्कि इसका मकसद यह दिखाना था कि सरकारी पैसे से बनने वाली सड़कों, पुलों और भवनों में गुणवत्ता सर्वोपरि है। विभाग ने साफ कर दिया है कि अब फाइलों में सब ठीक दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर काम की मजबूती ही असली कसौटी होगी।
गुणवत्ता सुधारने के लिए बदली रणनीति
लोक निर्माण विभाग ने हाल के महीनों में अपनी निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। इसके तहत एक विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई, जिसमें नियमित और औचक निरीक्षण को अहम हिस्सा बनाया गया। विभाग का मानना है कि जब तक बिना सूचना के जांच नहीं होगी, तब तक वास्तविक स्थिति सामने नहीं आएगी। इस नई रणनीति का उद्देश्य समय रहते खामियों को पकड़ना, निर्माण एजेंसियों को जवाबदेह बनाना और भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोकना है।
अधिकारियों के अनुसार, कई बार शुरुआती चरण में छोटी कमियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो बाद में बड़ी समस्या बन जाती हैं। इसलिए अब काम की गुणवत्ता, सामग्री और तकनीकी मानकों की जांच हर स्तर पर की जा रही है।
सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण
5 फरवरी को मुख्य अभियंताओं के सात अलग-अलग दलों ने भोपाल, डिंडौरी, अशोकनगर, इंदौर, शहडोल, नीमच और सागर जिलों में अचानक निरीक्षण किया। इन जिलों में कुल 35 निर्माण कार्यों की जांच की गई। इनमें से 21 कार्य लोक निर्माण विभाग से जुड़ी सड़क और पुल परियोजनाएं थीं।
इसके अलावा पीआईयू के तहत भवन निर्माण के छह कार्य, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के छह कार्य, भवन विकास निगम का एक काम और एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना भी जांच के दायरे में आई।
इन निरीक्षणों में सड़क की सतह, लेयर की मोटाई, उपयोग की गई सामग्री, भवनों में कंक्रीट और फिनिशिंग जैसे बिंदुओं को बारीकी से परखा गया। कुछ जगहों पर काम संतोषजनक मिला, लेकिन कई परियोजनाओं में तय मानकों से समझौता साफ नजर आया।
समीक्षा बैठक में सामने आए सख्त फैसले
निरीक्षण के बाद सभी रिपोर्टों की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रमुख अभियंता सड़क केपीएस राणा ने की। इसमें प्रमुख अभियंता भवन एसआर बघेल, एमपीआरडीसी के तकनीकी सलाहकार आरके मेहरा समेत सभी वरिष्ठ अधिकारी जुड़े। बैठक का फोकस साफ था, जहां सुधार संभव है वहां तुरंत निर्देश दिए जाएं और जहां गंभीर लापरवाही है, वहां कड़ी कार्रवाई हो।
खराब काम पर नोटिस, निलंबन और ब्लैकलिस्ट
रिपोर्ट के अनुसार इंदौर जिले में चटवाड़ा से हरनासा तक बनी लगभग 5.30 किलोमीटर लंबी सड़क की हालत संतोषजनक नहीं पाई गई। इस मामले में संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और निर्माण करने वाली आनंद इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए।
सागर जिले के बीलाग्राम स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में प्रयोगशालाओं और अतिरिक्त कक्षों के निर्माण में भी गंभीर खामियां मिलीं। यहां कार्यपालन यंत्री और अनुविभागीय अधिकारी को नोटिस देने, उपयंत्री को निलंबित करने और ठेकेदार रविंद्र सिंह ठाकुर के खिलाफ अनुबंध के अनुसार कार्रवाई करते हुए ब्लैकलिस्ट करने का आदेश दिया गया।
इसी जिले में रेहली से गौरझामर मार्ग की स्थिति भी खराब पाई गई। इस पर सड़क विकास निगम के ठेकेदार बंसल पाथवेज प्राइवेट लिमिटेड और कंसल्टेंट योंगमा इंजीनियर प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा 17 अन्य निर्माण कार्यों में आंशिक सुधार के आदेश भी दिए गए ताकि समय रहते गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके।
अच्छे कार्यों को भी मिली पहचान
समीक्षा बैठक में केवल खामियों पर चर्चा नहीं हुई। जिन परियोजनाओं में काम की गुणवत्ता अच्छी पाई गई, उनकी खुलकर सराहना भी की गई। अधिकारियों का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाले कामों को उदाहरण के तौर पर सामने लाना जरूरी है, ताकि बाकी एजेंसियां भी उनसे सीख लें। इससे यह संदेश भी जाता है कि सख्ती के साथ-साथ ईमानदार काम की कद्र भी की जाती है।
नरसिंहपुर जिले में भी घटिया निर्माण की जांच जल्द
प्रदेश सरकार लगातार घटिया निर्माण को लेकर प्रमुख अभियंता सड़क केपीएस राणा सख्त नजर आ रही है ऐसे में नरसिंहपुर जिले में बनाई गई कुछ सड़क भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं जहां पर विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर जमकर भ्रष्टाचार कर घटिया सड़क बनाई हुई हैं इस पूरे मामले में भी बात सामने आ रही है कि जल्द ही शिकायत के बाद घटिया निर्माण की जांच शुरू हो जाएगी













