MP School Chale Hum Abhiyan : मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से ‘स्कूल चलें हम’ अभियान, हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने की पहल
मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से ‘स्कूल चलें हम’ अभियान शुरू होगा, जिसमें 92 हजार स्कूलों में कार्यक्रम, मुफ्त किताब वितरण, नामांकन बढ़ाने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने पर फोकस रहेगा।
- 1 से 4 अप्रैल तक पूरे मध्य प्रदेश में अभियान चलेगा
- 92 हजार से ज्यादा स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित होंगे
- नामांकन बढ़ाने और बच्चों को जोड़ने पर खास जोर
MP School Chale Hum Abhiyan : मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत इस बार एक खास पहल के साथ होने जा रही है। 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में ‘स्कूल चलें हम’ अभियान शुरू होगा, जिसका उद्देश्य साफ है हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाना और शिक्षा को एक उत्सव जैसा बनाना। यह अभियान सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बच्चों, अभिभावकों और समाज को एक साथ जोड़ने की कोशिश भी है।
नए सत्र की शुरुआत उत्सव के साथ
राज्य सरकार ने 2026-27 सत्र के पहले चार दिन, यानी 1 से 4 अप्रैल तक, इस अभियान को चलाने का फैसला किया है। इन चार दिनों में प्रदेश की करीब 92 हजार सरकारी स्कूलों में अलग-अलग गतिविधियां होंगी। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दिनों को उत्सव की तरह मनाएं, ताकि बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह बढ़े।
राज्य स्तर पर होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी रहेगी। इस दौरान बच्चों को मुफ्त किताबें, साइकिल और जरूरी शैक्षणिक सामग्री दी जाएगी। सरकार का मानना है कि अगर सत्र की शुरुआत सकारात्मक माहौल में होगी, तो बच्चों का जुड़ाव स्कूल से मजबूत होगा।
नामांकन बढ़ाने पर खास जोर
इस अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य उन बच्चों को स्कूल तक लाना है, जो अब तक किसी कारण से पढ़ाई से दूर हैं। इसके लिए गांवों और बस्तियों में ऐसे बच्चों की पहचान की गई है। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन बच्चों के अभिभावकों से संपर्क करें और उन्हें नामांकन के लिए प्रेरित करें।
साथ ही, स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों और उनके परिवारों का स्वागत किया जाएगा। इससे स्कूल का माहौल दोस्ताना बनेगा और नए छात्रों को अपनापन महसूस होगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह तरीका बच्चों के ड्रॉपआउट को कम करने में मदद कर सकता है।
पहले दिन बालसभा और स्वागत कार्यक्रम
1 अप्रैल को सभी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बालसभाएं आयोजित की जाएंगी। इस दिन बच्चों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था भी रहेगी। इसका मकसद है कि स्कूल का पहला दिन बच्चों के लिए यादगार बने।
स्कूलों में प्रवेशोत्सव के कार्यक्रम भी होंगे, जिनमें जनप्रतिनिधि जैसे सांसद, विधायक और स्थानीय नेता शामिल होंगे। वे बच्चों को किताबें वितरित करेंगे और शिक्षा के महत्व पर बात करेंगे।
दूसरे दिन ‘भविष्य से भेंट’ कार्यक्रम
2 अप्रैल को स्कूलों में ‘भविष्य से भेंट’ नाम से एक खास कार्यक्रम होगा। इसमें समाज के अलग-अलग क्षेत्रों के सफल लोग बच्चों से मिलने आएंगे। इनमें खिलाड़ी, कलाकार, लेखक, मीडिया से जुड़े लोग, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
ये लोग अपने अनुभव साझा करेंगे और बच्चों को बताएंगे कि पढ़ाई उनके जीवन को कैसे बदल सकती है। इस तरह के संवाद से बच्चों को प्रेरणा मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि अधिकारी स्कूलों में जाकर बच्चों से सीधे बातचीत करें।
तीसरे दिन अभिभावकों की भागीदारी
3 अप्रैल को स्कूलों में सांस्कृतिक और खेल-कूद कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा। इस दिन का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि माता-पिता को स्कूल की गतिविधियों से जोड़ना भी है।
शिक्षक इस मौके पर अभिभावकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। साथ ही, जिन बच्चों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से ज्यादा रही है, उनके माता-पिता को सम्मानित किया जाएगा। इससे अन्य परिवारों को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे बच्चों की नियमित पढ़ाई पर ध्यान दें।
चौथे दिन ‘हार के आगे जीत’ का संदेश
4 अप्रैल को उन छात्रों पर ध्यान दिया जाएगा, जो पिछली कक्षा में सफल नहीं हो पाए। स्कूल प्रबंधन और शिक्षक उनके अभिभावकों से बात करेंगे और उन्हें समझाएंगे कि असफलता अंत नहीं होती।
बच्चों को दोबारा प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, स्कूल प्रबंधन समितियों की बैठक होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि हर बच्चे का नामांकन कैसे सुनिश्चित किया जाए।













