एमपी में फिर सक्रिय हुआ नया वेदर सिस्टम, इन जिलों में ओलावृष्टि से फसलों को खतरा – MP Weather News
मध्यप्रदेश में चक्रवातीय घेरे के कारण मौसम बिगड़ गया है। अगले 48 घंटों में भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है, जिससे फसलों को नुकसान और ठंड बढ़ने की आशंका है।
- प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में कोहरा और ठंड
- अगले दो दिन बारिश और ओलों की संभावना
- चना, सरसों और गेहूं की फसलों पर खतरा
MP Weather News : मध्यप्रदेश में एक बार फिर कुदरत के तेवर बदलते नजर आ रहे हैं। अगर आप राजधानी भोपाल या ग्वालियर-चंबल के इलाकों में रहते हैं, तो आपने गौर किया होगा कि सुबह की शुरुआत अब सूरज की किरणों से नहीं बल्कि घने कोहरे और ठंडी हवाओं के साथ हो रही है।
मौसम का यह बदला हुआ मिजाज कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली मौसमी सिस्टम के सक्रिय होने का नतीजा है। पिछले दो दिनों से प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में धुंध की चादर लिपटी हुई है और अब मौसम विभाग ने आने वाले दो दिनों के लिए भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी कर दी है।
मध्यप्रदेश में अचानक क्यों बदला मौसम का मिजाज
मध्यप्रदेश के मौसम में आए इस अचानक बदलाव के पीछे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार, वर्तमान में एक ‘साइक्लोनिक सर्कुलेशन’ यानी चक्रवातीय घेरा सक्रिय हो गया है। इसके साथ ही एक ‘ट्रफ लाइन’ भी गुजर रही है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींच रही है। जब भी इस तरह का सिस्टम बनता है, तो आसमान में बादलों का जमघट लग जाता है और ठंडी हवाओं के साथ बारिश की स्थिति पैदा होती है।
अक्सर जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में ऐसी स्थिति तब बनती है जब उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं और दक्षिण से आने वाली नमी वाली हवाएं आपस में टकराती हैं। इसी टकराव की वजह से बादल बनते हैं और कई बार ओले भी गिरते हैं। भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में पिछले कुछ घंटों से बादलों ने डेरा डाल रखा है, जिससे दिन के तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।
कोहरे की गिरफ्त में प्रदेश के प्रमुख हिस्से
प्रदेश का उत्तरी और पूर्वी हिस्सा इस समय सबसे ज्यादा कोहरे की मार झेल रहा है। ग्वालियर-चंबल संभाग में तो हालात ऐसे हैं कि विजिबिलिटी यानी दृश्यता बहुत कम रह गई है। सुबह के समय सड़कों पर वाहन चलाना मुश्किल हो रहा है। रीवा और बुंदेलखंड के जिलों में भी घना कोहरा छाया हुआ है। सागर, दमोह और छतरपुर जैसे जिलों में सुबह 10 बजे तक सूरज के दर्शन नहीं हो रहे हैं।
राजधानी भोपाल की बात करें तो यहाँ का बड़ा तालाब और आस-पास के इलाके पूरी तरह कोहरे की आगोश में हैं। कोहरे के कारण न केवल सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि ट्रेनों और उड़ानों की समय-सारणी पर भी इसका असर पड़ने लगा है। ठंड और नमी के इस मिश्रण ने लोगों को एक बार फिर से भारी ऊनी कपड़े निकालने पर मजबूर कर दिया है।
भारी बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि भले ही कुछ इलाकों में अभी धूप-छांव का खेल चल रहा हो, लेकिन आने वाले 48 घंटे काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। सबसे ज्यादा चिंता ओलावृष्टि को लेकर है। जब तापमान में अचानक गिरावट आती है और ऊपरी वायुमंडल में नमी अधिक होती है, तो बारिश की बूंदें बर्फ के गोलों यानी ओलों में बदल जाती हैं।
ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी और दतिया जैसे जिलों में ओले गिरने की अधिक संभावना है। इसके अलावा मालवा और निमाड़ के कुछ हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और बिजली कड़कने की स्थिति में पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
फसलों पर संकट के बादल
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे बुरा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। मध्यप्रदेश के किसान इस समय गेहूं, चना और सरसों की खेती में व्यस्त हैं। कृषि जानकारों का मानना है कि इस समय फसलें पकने की अवस्था में हैं या उनमें फूल आ रहे हैं। ऐसे में अगर तेज बारिश के साथ ओले गिरते हैं, तो सरसों की फलियां टूट सकती हैं और चने के फूल झड़ सकते हैं।
गेहूं की फसल के लिए हल्की बारिश तो फायदेमंद हो सकती है, लेकिन अगर पानी खेतों में जमा हो गया या तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, तो गेहूं के पौधे गिर सकते हैं जिससे पैदावार में भारी कमी आ सकती है।
ठिठुरन ने बढ़ाई मुश्किलें: कैसा रहेगा तापमान
बारिश और कोहरे के इस दोहरे वार ने प्रदेश में कड़ाके की ठंड की वापसी कर दी है। पिछले कुछ दिनों से रात का पारा कई जिलों में 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। दिन में भी धूप न निकलने के कारण ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जैसे ही बारिश का यह दौर थमेगा, उत्तरी हवाएं एक बार फिर सक्रिय होंगी और न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री तक की और गिरावट आ सकती है।
शहरों का हाल: कहाँ कैसा है मौसम
अगर हम जिलावार स्थिति देखें, तो ग्वालियर, मुरैना और भिंड में कोहरा सबसे घना है। यहाँ सुबह के समय विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई है। वहीं, विदिशा, रायसेन और सीहोर जैसे जिलों में बादलों की आवाजाही जारी है और रुक-रुक कर बूंदाबांदी हो रही है। इंदौर और उज्जैन में भी ठंडक बढ़ गई है और यहाँ बादल छाए रहने से दिन का तापमान सामान्य से कम बना हुआ है।
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान और सुरक्षा उपाय
अगले दो दिनों तक मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर संभागों में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ ही रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नया सिस्टम काफी मजबूत है और इसका प्रभाव शुक्रवार और शनिवार को सबसे ज्यादा दिखाई देगा। रविवार से मौसम में कुछ सुधार की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन कोहरा जारी रह सकता है।













