मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की तारीख तय: 10 अप्रैल से शुरू होगा काम, किसानों को 7 अप्रैल से मिलेगी स्लॉट बुकिंग की सुविधा
भोपाल, इंदौर समेत कई संभागों के किसानों के लिए राहत की खबर, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तैयारियों का लिया जायजा; विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की नीतियों के खिलाफ खोला मोर्चा।
MP Wheat Procurement 2026 : मध्य प्रदेश के किसानों के लिए गेहूं बेचने का इंतजार अब खत्म होने वाला है। राज्य सरकार ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को भोपाल में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान ऐलान किया कि इन क्षेत्रों में 10 अप्रैल से विधिवत गेहूं की खरीदी शुरू हो जाएगी।
किसान अपनी सुविधा के अनुसार उपज बेचने के लिए 7 अप्रैल से ऑनलाइन स्लॉट बुक कर सकेंगे। यह फैसला प्रदेश के लाखों उन किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो अपनी फसल कटाई के बाद मंडियों और केंद्रों के खुलने का इंतजार कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार हर एक पंजीकृत किसान का गेहूं खरीदेगी और इस प्रक्रिया में किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है।
किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग और खरीदी की नई व्यवस्था
इस बार गेहूं खरीदी की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने विशेष योजना तैयार की है। 7 अप्रैल से शुरू होने वाली स्लॉट बुकिंग में किसान यह बता पाएंगे कि वे किस दिन और किस समय अपनी उपज लेकर केंद्र पर आएंगे। इससे मंडियों में बेवजह की भीड़ कम होगी और किसानों का समय भी बचेगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि खरीदी के दौरान सबसे पहले छोटे किसानों को मौका दिया जाए। इसके बाद मध्यम श्रेणी के किसानों से गेहूं खरीदा जाएगा और सबसे अंत में बड़े किसानों की बारी आएगी। इस कदम का उद्देश्य यह है कि छोटे किसानों को जल्दी भुगतान मिल सके ताकि वे अपनी अगली फसल या घर की जरूरतों के लिए पैसों का इंतजाम कर सकें।
खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के लिए जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 अप्रैल से पहले राज्य के सभी तौल केंद्रों का बारीकी से निरीक्षण किया जाए। केंद्रों पर बिजली, पीने का साफ पानी, बैठने की व्यवस्था, छाया और प्रसाधन जैसी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि केंद्रों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी लाइनें लग जाती हैं, जिससे किसानों को रातें सड़कों पर गुजारनी पड़ती हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि इस बार ऐसी स्थिति पैदा न हो और भुगतान की प्रक्रिया भी कम से कम समय में पूरी की जाए।
बोनस के साथ मिलेगा अच्छा दाम और बारदाने की उपलब्धता
खेती-किसानी के इस बड़े अभियान के लिए आंकड़े भी काफी बड़े हैं। इस साल प्रदेश में लगभग 19 लाख 4 हजार से ज्यादा किसानों ने गेहूं बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया है। सरकार ने पूरे राज्य में 3,627 खरीदी केंद्र बनाए हैं।
आर्थिक रूप से किसानों को मजबूती देने के लिए सरकार ने 2,625 रुपये के समर्थन मूल्य के ऊपर 40 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि (बोनस) देने का भी निर्णय लिया है। इस प्रकार किसानों को एक अच्छी कीमत मिल सकेगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल लगभग 78 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीदी होगी।
अक्सर गेहूं खरीदी के समय बारदाने (बोरों) की कमी की खबरें सामने आती हैं, जिससे काम रुक जाता है। लेकिन इस बार खाद्य विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने आश्वस्त किया है कि प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। सरकार को जूट कमिश्नर की ओर से ढाई करोड़ बोरों का आवंटन मिल चुका है और प्लास्टिक बैग के लिए भी टेंडर जारी कर दिए गए हैं।
विभाग का कहना है कि काम शुरू करने के लिए पर्याप्त स्टॉक पहले से ही केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भी संकेत दिए हैं कि कुछ जगहों पर अगर जरूरत पड़ी तो 9 अप्रैल से ही खरीदी का काम शुरू किया जा सकता है।
विपक्ष का हमला और कांग्रेस का प्रदर्शन
एक तरफ सरकार अपनी तैयारियों का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ प्रदेश की राजनीति में किसानों के मुद्दे पर उबाल भी देखा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने गेहूं खरीदी में हो रही देरी और कर्ज चुकाने की तारीख न बढ़ाए जाने को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का आरोप है कि सरकार ने बारदाने की मांग केंद्र से समय पर नहीं की, जिसके कारण खरीदी शुरू करने में इतनी देरी हुई। पटवारी ने कहा कि छोटी जोत वाले किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और समय पर खरीदी न होने से उन्हें अपनी फसल कम दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है।
आज गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न हो। प्रदेश के किसानों का हर तरह से कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। सरकार… pic.twitter.com/j0TWV1wsLz
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कांग्रेस ने घोषणा की है कि 9 अप्रैल को सभी जिलों में कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि सहकारी समितियों से लिए गए कर्ज को चुकाने की अंतिम तिथि नहीं बढ़ाई गई है, जिससे राज्य के करीब 40 प्रतिशत किसान डिफॉल्टर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
इसके विरोध में 15 अप्रैल को भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास के बाहर उपवास भी किया जाएगा। विपक्ष का दावा है कि सरकार किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही है और बार-बार खरीदी की तारीख आगे बढ़ाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच चल रही इस तकरार के बीच अब सबकी नजरें 10 अप्रैल पर टिकी हैं, जब वास्तव में मंडियों में गेहूं की तुलाई शुरू होगी।













