भोपाल तक साथ आए दिव्यांग, ‘मामा’ का यह वीडियो क्यों छू रहा दिल
Shivraj Singh Chauhan News : कभी-कभी राजनीति की रोज़मर्रा की खबरों के बीच ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं, जो किसी सरकारी फैसले से ज्यादा लोगों के दिलों को छू जाती हैं। मध्य प्रदेश से जुड़ा ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से देखा जा रहा है, जिसमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक संवेदनशील और मानवीय रूप सामने आया है। यह वीडियो न केवल भावनात्मक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सत्ता में बैठे लोग जब आम नागरिकों से सीधे जुड़ते हैं, तो भरोसा अपने आप बनता है।
शिवराज सिंह चौहान, जिन्हें मध्य प्रदेश में लोग प्यार से ‘मामा’ कहते हैं, पहले भी कई बार अपने सरल व्यवहार और जनता से सीधे संवाद के कारण चर्चा में रहे हैं। इस बार मामला और खास है, क्योंकि यह किसी मंच या कार्यक्रम का नहीं, बल्कि सड़क पर हुई एक सच्ची मुलाकात का है।
सीहोर जाते समय रुका काफिला
घटना उस समय की है जब शिवराज सिंह चौहान सीहोर की ओर जा रहे थे। रास्ते में उनकी नजर भंवरलाल नाम के एक दिव्यांग व्यक्ति पर पड़ी, जो पैरों से चलने में असमर्थ थे। आमतौर पर ऐसे दृश्य सड़क किनारे अनदेखे रह जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। शिवराज सिंह ने अपना काफिला रुकवाया और खुद भंवरलाल से मिलने पहुंचे।
इस मुलाकात में कोई औपचारिकता नहीं थी। बातचीत सीधी और सहज थी। भंवरलाल ने अपनी रोजमर्रा की परेशानियों के बारे में बताया और यह भी कि बिना सहारे चलना उनके लिए कितना मुश्किल है। बातचीत के दौरान शिवराज सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी मदद की जाएगी और उन्हें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उनका जीवन थोड़ा आसान बन सके।
रात में फिर हुई मुलाकात, सीधे घर पहुंचे दिव्यांग
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उसी दिन रात को, जब शिवराज सिंह चौहान भोपाल लौट रहे थे, तब भंवरलाल अपने दो अन्य दिव्यांग साथियों रामलाल और जीवन वर्मा के साथ उनसे दोबारा मिले। यह मुलाकात अचानक थी, लेकिन भावनाओं से भरी हुई। शिवराज सिंह ने तीनों को अपनी गाड़ी में बैठाया और अपने साथ भोपाल ले आए।
भोपाल पहुंचने के बाद उन्हें सीधे अपने आवास पर ले जाया गया। वहां कोई औपचारिक प्रोटोकॉल नहीं था। चाय, नाश्ता और फिर भोजन के साथ बातचीत हुई। यह दृश्य किसी राजनीतिक खबर से ज्यादा एक पारिवारिक मुलाकात जैसा था, जहां मेहमान और मेजबान के बीच कोई दूरी नहीं दिखती।
ट्राइसाइकिल मिली, चेहरों पर लौटी मुस्कान
इसके बाद वह पल आया, जिसने इस पूरी घटना को खास बना दिया। भंवरलाल, रामलाल और जीवन वर्मा को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल सौंपी गई। जब तीनों अपनी-अपनी ट्राइसाइकिल पर बैठे, तो उनके चेहरों की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। यह सिर्फ एक साधन नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम था।
मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उन दिव्यांग लोगों के लिए बहुत मायने रखती है, जो रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। इससे न केवल उनकी आवाजाही आसान होती है, बल्कि आत्मसम्मान भी बढ़ता है।
सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव
इस पूरी घटना के बाद शिवराज सिंह चौहान ने खुद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि यह दिन उनके मन को छू गया और रास्ते में कुछ नए अपने मिल गए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी के जीवन की राह थोड़ी आसान बनाना और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सबसे बड़ी कमाई है।
एक दिन कुछ यूँ बीता कि मन को छू गया,
रास्ते में कुछ नए अपने बन गए।सीहोर जाते हुए भंवरलाल जी से मुलाक़ात हुई,
और लौटते समय रामलाल जी और जीवन वर्मा जी भी साथ जुड़े।हम सब साथ ही भोपाल आए,
जहाँ उनके जीवन की राह थोड़ी आसान बने,
इसी संकल्प के साथ उन्हें मोटराइज़्ड ट्राइसाइकिल… pic.twitter.com/F4xDoD0qb9ये खबर भी पढ़ें…— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) February 8, 2026
उनकी यह पोस्ट और वीडियो तेजी से वायरल हो गए। हजारों लोगों ने इसे साझा किया और प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत की मिसाल बताया।
‘मामा’ नाम के पीछे की वजह
शिवराज सिंह चौहान को ‘मामा’ कहे जाने की वजह भी यही जुड़ाव है। मध्य प्रदेश में यह नाम उन्हें जनता ने दिया है। यह किसी प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्षों से बने भरोसे का परिणाम माना जाता है। मुख्यमंत्री रहते हुए भी और अब केंद्रीय मंत्री के रूप में भी, उनका यह अंदाज कई बार सामने आ चुका है।
यह घटना बताती है कि सत्ता और आम आदमी के बीच की दूरी तब कम होती है, जब संवाद सीधा और ईमानदार हो। भंवरलाल और उनके साथियों के लिए यह सिर्फ एक दिन की मदद नहीं थी, बल्कि आगे की जिंदगी के लिए एक सहारा था।













